चंडीगढ,सुनीता शास्त्री। चंडीगढ़ के गर्वमैंट मॉडल हाई स्कूल, सेक्टर 41 डी की होम साईंस अध्यापिका व शिक्षाविद् पुनीत मदान को उनके सर्वश्रेष्ठ कलाकृति आर्ट एंड काफ्र्ट ईबुक को गूगल ने अपनी आर्ट एग्जिबिट में लांच किया है। पुनीत मदान द्वारा बनाई गई यह आर्ट एंड काफ्र्ट ई-बुक को अब करोड़ो लोगों गूगल बुक्स सर्च के माध्यम से देख सकते हैं। गूगल की आर्ट एग्जिबिट एक ऐसी पहल है जहां कलाकार प्रतिष्ठित गूगल पुस्तकों पर अपनी सर्वश्रेष्ठ कलाकृति प्रदर्शित करते हैं। स्टेट व नेशनल स्तर तथा अब अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना चुकी पुनीत मदान ने बताया कि गूगल की आर्ट एग्जिबिट में जारी उनकी ई-बुक में बनाये गये विभिन्न चित्र क्विलिंग, कैलीग्राफी, डूडलेमैंडाला, ज़ेंटंगल, वेक्टर आर्ट, वॉटरकलर, टायपोग्राफी और कैनवास पेंटिंग, स्केचिंग और ड्राइंग के माध्यम से बनाई गई हैं। यह कुल 31 चित्र है इन जटिल कलाकृतियों को बनाने में कई महीनों की कड़ी मेहनत व एकाग्रता लगी है। इन्हें बनाते समय बारिकियों का विशेष ध्यान रखा गया है, जिससे यह चित्र अन्य कलाकारों के चित्रों से अलग ही अपनी सर्वश्रेष्ठ प्रस्तुति देते हैं। उन्होंने बताया कि ई-बुक में एक बुर्जुर्ग का झुर्रियों वाला चेहरा, फूल, पक्षी, आध्यात्मिक, सांस्कृतिक डांडिया व अन्यों चित्रों को बहुत ही आकर्षक व मनमोहक अंदाज में बनाया गया है। यह आर्ट वर्क उन्होंने पेपर, कैंवस, बुड, क्लॉथ के उपर बनाया है। उन्होंने बताया कि फुलकारी के क्षेत्र में भी उन्होंने बहुत वर्क किया था जिससें वे फुलकारी को मॉडर्न इंफ्केट देने में भी कामयाब रही थी। उन्होंने कहा कि उनके द्वारा बनाई गई कलाकृति में उनकी आंतर्रिक भावना का प्रतिनिधित्व करती है। पुनीत मदान ने बताया कि यह उनकी बहुत बड़ी उपलब्धियों में से एक है जिसे पूरे विश्व भर में प्रशंसा मिली है। उन्होंने बताया आर्ट एंड क्राफ्र्ट में उन्हें बचपन से ही रूचि रही है या यह कहें कि यह उनके जीन्स में ही है। वे बचपन से ही विभिन्न कलात्मक डिजाइन का इस्तेमाल करती आई है। उन्होंने बताया कि स्वर्गीय प्रो. साहिब सिंह जिन्होंने श्रीगुरू ग्रंथ साहिब जी की स्टीक बनाई थी, उनके परनाना (ग्रेट ग्रेंड फादर), थे तथा शेख फरीद पर पहला रिसर्च उनके नाना स्वर्गीय प्रो. प्रीतम सिंह ने किया था, जो कि दृढ सकंल्पी व कियेटिव सोच के धनी थे, से वे बहुत प्रभावित हुई जो कि उन्हें किसी भी काम में कुछ नया करने को कहते थे, और वे उस काम को उत्साहपूर्ण ढं्रग से करती थी जिसके लिए उन्हें शाबाशी भी मिलती थी। उन्होंने बताया कि वे अपनी क्रियेटिव सोच के माध्यम से आर्ट व काफ्र्ट में परिवर्तन ला रही हैं और इसके लिए वे प्रयासरत भी हैं। आर्ट व क्राफ्र्ट को एक नये तरीके से एक नया चेहरा देना और लोगों के समक्ष पेश करना उनका जीवन का सिद्धांत रहा है जिसमें वे सदैव कायम रहेंगी।
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Posted by Surinder Verma on Wednesday, June 17, 2020




















