इस गोष्ठी में ट्राईसिटी के अनेक साहित्य प्रेमियों ने भाग लिया। सबसे पहले पंचकूला इकाई अध्यक्ष डॉ विनोद शर्मा ने सभी अतिथियों का स्वागत किया। तत्पश्चात् सृजन संस्था के अध्यक्ष व प्रसिद्ध गायक सोमेश गुप्त द्वारा इस संगोष्ठी का शुभारंभ हुआ। संगठन की प्रांतीय अध्यक्ष डॉ॰ संतोष गर्ग के सान्निध्य में उपस्थित रचनाकारों ने गुरु तत्व को वंदन करते हुए अपने अपने मन के उद्गार व्यक्त करते हुए शब्दरूपी श्रद्धा सुमन अर्पित किए।
मंच का संचालन करते हुए गणेश दत्त बजाज ने कहा कि जो गुरु तत्व दिखायी नहीं देता वही हमें सब कुछ दिखा रहा है, अच्छाई बुराई का ज्ञान करवा रहा है।
कवयित्री सुषमा जोशी ने कहा
कि गुरु के बिना भटक रही थी मिथ्या संसार में, कौन दिखाए किनारा? गुरु ने ही ज्ञान का दीप जलाया।
छंदों की साधिका सरोज चोपड़ा पद्म ने कहा कि गुरु अपने शिष्यों पर जब करते हैं उपकार, तब होती है गुरुकृपा बहती है रसधार। अखिल भारतीय अग्रवाल संगठन के प्रदेश सचिव राजीव गुप्ता जिन्होंने पहली बार संगठन की इस गोष्ठी में भाग लिया उन्होंने कहा कि गुरु की महिमा को लिखने के लिए कई जन्म लेने पड़ते हैं। दुआओं का अनोखा रंग चढ़े जिस पर एक बार, जिंदगी भर कभी उसकी हरियाली नहीं जाती।।
साहित्यकार एम एल अरोड़ा ने कहा कि गुरु एक से अनेक हो सकते हैं, जिस अवसर पर जो राह दिखाए वही आपका गुरु है।
कवयित्री नेह शर्मा नेह ने कहा कि गुरु की कृपा के बिना कुछ नहीं, गुरु कृपा से ही सब कुछ संभव हो सकता है।
इस संगोष्ठी की अध्यक्षता निभाते हुए डॉ संतोष गर्ग ने कहा कि इस धरती पर जो पूर्णता हमें अंधेरे से प्रकाश की ओर ले जाये, वही हमारी गुरु है। यह धरती जो हमें झुकना सिखाती है वह भी गुरु है। जल, पेड़, पौधे, पूरी प्रकृति के सभी संसाधन हमें पल पल ज्ञान का बोध करवाते हैं।
पंचकूला इकाई अध्यक्ष डॉ विनोद शर्मा ने कहा कि गुरु के ज्ञान से हमें दूसरा जन्म मिलता है और देह का अभिमान दूर हो कर मन में पवित्रता भर जाती है।
विश्व गुप्ता जी ने कहा कि हमें सदैव गुरु की शरण में रहना चाहिए।
भगवान धरा पर स्वयं नहीं आते, वह हमें ज्ञान देने के लिए माता पिता के साथ- साथ गुरु के रूप में किसी न किसी को भेज देते हैं। इस गोष्ठी के संयोजन में इकाई महासचिव अनिल शर्मा चिंतक का विशेष सहयोग रहा।
अंत में साहित्यप्रेमी सुशील चोपड़ा ने ‘गुरु मेरी पूजा गुरु गोविंद, गुरु मेरा पारब्रह्म गुरु भगवंत’ शब्द सुनाकर सभी को गुरु प्रेम रसधार में डुबो दिया।



























