इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री कुलदीप चंद अग्निहोत्री, कार्यकारी उपाध्यक्ष हरियाणा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी थे और अध्यक्ष डॉ. चन्दर त्रिखा, निदेशक उर्दू प्रकोष्ट हरियाणा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी थे | प्रधानगी मंडल में सरदार मंजीत सिंह, मेंबर सेक्रेटरी और श्री सी डी कौशल, निदेशक, संस्कृत प्रकोष्ट हरियाणा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी थे | कार्यक्रम का संचालन मशहूर कवि अष्विनी शांडिल्य ने किया | अशोक भंडारी नादिर अध्यक्ष भंडारी अदबी ट्रस्ट ने आये प्रधानगी मंडल का शॉल और पौधे भेंट करके और आए सभी बुद्धिजीवियों का भी स्वागत किया|
इस अवसर पर बोलते हुए कर्नल एस एस कालिया जी ने कारगिल लड़ाई पर रौशनी डाली और बतलाया कि अपनी फ़ौज के 523 जांबाज़ जवानों ने शहादत पाई | ये जंग जो कि 11000 फुट से 19000 फुट ऊंची चोटियों पर लड़ी गयी और उन चोटियों के शिखर पर दुश्मनों ने बंकर बना रखे थे | और पूरी दुनिया ये सोच रही थी के पाकिस्तान से यह जुंग जीतना नामुमकिन थी |
हमारी जांबाज़ फ़ौज ने उस नामुमकिन को मुमकिन बनाया और जीत हासिल की और पाकिस्तान के 4000 से अधिक फौजियों को मार गिराया|
इस मौके पर बोलते हुए मंजीत जी और कौशल जी ने ओजपूर्ण कविताएँ सुनाई और फ़ौज की वीरता पर अपने ख्याल रखे | चन्दर त्रिखा साहब और कुलदीप अग्निहोत्री जी ने फ़रमाया कि ये कार्यक्रम भव्य पैमाने पे होना चाहिए ताकि अपने आने वाली पीढ़ियों को ये अहसास हो कि आज़ादी की कीमत क्या है | और उनके अंदर देश प्रेम का जज़्बा भरना अनिवार्य है |
इस मौके पर इंडियन एक्स- सर्विसमैन मूवमेंट के ब्रिगेडियर किरण कृष्ण जी की उपस्तिथि से कार्यक्रम ओजपूर्ण हो गया |
त्रिभाषीय कवी दरबार में बिजिंदर सिंह फौजी, श्री राजेश अत्रे, सविता गर्ग सावी, आर पी मल्होत्रा, नंदिनी शर्मा, पवन शर्मा मुसाफिर, अश्विनी शांडिल्य, शम्स तबरेज़ी और अशोक नादिर ने ओज से परिपूर्ण कविताओं से माहौल में देशभक्ति की ज्वाला को प्रचंड रूप दिया, उसके उपरान्त श्री अशोक नादिर ने सभी कवियों को पौधे देकर आभार प्रकट किया |आखिर में श्री आर के मल्होत्रा जी ने सभी आये अतिथिगणों को आभार प्रकट किया |



























