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Posted by Surinder Verma on Wednesday, June 17, 2020

केन्द्र की 284 वीं मासिक बैठक में वैदेही के नृत्य की झंकार ने जमाया रंग

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केन्द्र की 284 वीं मासिक बैठक में वैदेही के नृत्य की झंकार ने जमाया रंग

प्राचीन कला केन्द्र द्वारा 284 वीं मासिक बैठक में नासिक से आई वैदेही कुलकर्णी द्वारा कुचीपुड़ी नृत्य पेश किया गया । वैदेही ने 4 वर्ष की अल्पायु में नृत्य सीखना शुरू किया और बचपन से ही नृत्य में इनकी गहरी रूचि थी । इन्होंने पद्मभूषण गुरू चिन्ना सत्यम के अलावा गुरू वेम्पति रवि शंकर और श्रीमती श्रीमई वेम्पति से नृत्य की शिक्षा प्राप्त की । कुचीपुड़ी एवं भरतनाट्यम नृत्य में महारथ रखने वाली वैदेही ने बहुत से कार्यक्रमों में अपने नृत्य से खूब वाहवाही बटोरी ।

आज की 284 वीं बैठक का आयोजन केन्द्र के एम.एल.कौसर सभागार में सायं 6 बजे से किया गया । कार्यक्रम में वैदेही ने सबसे पहले नतेशा कौतुवम प्रस्तुत किया । जिसमें वैदेही ने भगवान शिव के आलौकिक रूप को नृत्य के माध्यम से पेश किया और इसके पश्चात भगवान शिव की स्तुति पेश की । इसके उपरांत पदमावती श्रृंगार प्रस्तुत किया जिसमें देवी पदमावती ने अपने भगवान श्रीनिवास के साथ बिताई खूबसूरत रात का चित्रण नृत्य के माध्यम से किया । वैदेही की भाव भंगिमाएं एवं पैरों की चालों को देखकर ही उनकी नृत्य प्रतिभा का पता चलता है। सजग नृत्य और खूबसूरत भाव वैदेही के नृत्य के विशेष गुण हैं । इसके उपरांत वैदेही ने कुचीपुड़ी नृत्य का एक रूप जवाली प्रस्तुत किया । जिसमें नायिका द्वारा नायक से शिकायत करते हुए एक खूबसूरत भाव प्रदर्शन है जिसमें नायिका नायक से अपनी जलन भाव का प्रदर्शन करती है ।
कार्यक्रम के अंत में वैदेही ने मरकाटा मणीमाया रचना पेश की । जिसमें भगवान कृष्ण की सुंदरता और महिमा का बखान किया गया और नायिका श्री कृष्ण की स्तुति करते हुए उनकी सुंदरता का बखान करती है । इस प्रस्तुति का समापन पीतल की थाली पर नृत्य करते हुए होता है जो कि कुचीपुड़ी नृत्य की एक खास विशेषता है ।

कार्यक्रम के अंत में केन्द्र के सचिव श्री सजल कौसर एवं रजिस्ट्रार डॉ. शोभा कौसर द्वारा पुष्प,मोमेंटो और उतरीया भेंट किया गया ।