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Posted by Surinder Verma on Wednesday, June 17, 2020

आर्यसमाज, चण्डीगढ़ द्वारा हर्षोल्लास के द्वारा मनाया गया जन्माष्टमी महोत्सव

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आर्यसमाज, चण्डीगढ़ द्वारा हर्षोल्लास के द्वारा मनाया गया जन्माष्टमी महोत्सव

आज दिनांक 30 अगस्त 2021 को आर्य समाज चंडीगढ़ के द्वारा सामूहिक रूप से सेक्टर 46 में जन्माष्टमी महोत्सव यज्ञीय धूमधाम के साथ मनाया गया। इस अवसर पर सर्वप्रथम ब्रह्मयज्ञ तत्पश्चात देव यज्ञ का आयोजन किया गया। देव यज्ञ में गायत्री मंत्र से विशेष आहुतियां डाली गई और ईश्वर से छल कपट रहित होने की प्रार्थना की गई। बच्चों का उत्साह कार्यक्रम में देखते ही बनता था क्योंकि कार्यक्रम में बच्चों के लिए, बच्चों के द्वारा, बच्चों की “कन्हैया संगोष्ठी” का विशेष आयोजन किया गया। कन्हैया संगोष्ठी में 3 वर्ष से लेकर 13 वर्षों तक के बालकों ने भाग लिया। सभी ने अपनी कविताओं, शेरो-शायरी एवं भाषण से उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया। “गाड़ी घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की” के विशेष नारे लगाए गए। कन्हैया संगोष्ठी में सेक्टर 50 से पधारे आर्य अर्जुन सिंह ने “यदा यदा ही धर्मस्य….”, “परित्राणाय साधुनाम विनाशाय दुष्कृताम्….” नामक गीता के श्लोकों का पाठ किया। मास्टर विवेक ने गायत्री मंत्र का शुद्ध उच्चारण किया। कृष्णभक्त स्नेहा ने ऋषि दयानंद से संबंधित गीत सबके सामने रखा जिन्होंने श्रीकृष्ण का वास्तविक इतिहास सबके सामने रखा। भवनीत, अन्वी, वेदिका, नवीन, ऋतिक ने भी अपनी-अपनी प्रस्तुति से प्रतिभा निखार किया।
कन्हैया संगोष्ठी के बाद सेक्टर 45 राजकीय विद्यालय की संस्कृत अध्यापिका डॉक्टर चांद कौर मान ने बच्चों को श्री कृष्ण की भांति सत्य, न्याय और निष्पक्षता के पथ पर आरूढ़ होने का संकल्प करवाया। प्रदीप त्रिवेणी ने सभी को अधिक से अधिक पीपल के वृक्ष लगवाने का संकल्प करवाया क्योंकि श्री कृष्णजी कहते थे कि मैं वृक्षों में पीपल हूं। सामाजिक कार्यकर्ता व भाजपा मंडल अध्यक्षा मंडल 34 डा.
मीना चड्ढा ने सभी बच्चों को आशीर्वाद दिया कि वे श्री कृष्णजी के नेक पथ पर चलते हुए शांति, धर्म और प्रेम से जीवन को सुखी बनायें।
कार्यक्रम के अंत में आचार्य अशोक पाल ने गुरूकुल रक्षक स्वामी शक्तिवेश के बारे जनसमूह को जानकारी देते हुये बताया कि स्वामी शक्तिवेश जी इन्द्रप्रस्थ गुरूकुल की रक्षा करते हुये बलिदान हो गये, देशद्रोहियों ने उनके सीने में 80 गोलियां दागी। मरते मरते भी उन्होनें गुरू परम्परा का पालन करते हुये अपने सभी शिष्यों की रक्षा की। शांति पाठ करते हुये उन्होंने बताया के श्रीकृष्ण और स्वामी शक्तिवेश के मार्ग पर चलते हुए ही वैश्विक एकता, स्थिरता और शांति संभव है। इससे ही सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास होगा। इस अवसर पर अनिल आर्य, बलजीत मान, अशोक आर्य, भ मूर्तिदेवी, रामरती देवी, पूजा आर्य, प्रवीण आर्या, अशोक आर्य आदि अनेक गणमान्य जन उपस्थित थे। अशोक आर्य ने सबका धन्यवाद ज्ञापन किया।