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Posted by Surinder Verma on Wednesday, June 17, 2020

सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश एके सिकरी (पूर्व) ने पुक्का वेबिनार में भाग लिया

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चंडीगढ़,सुनीता शास्त्री,मोहाली। पंजाब अनएडेड कॉलेजिस एसोसिएशन (पुक्का) और एसोसिएशन ऑफ ज्यूरिस्ट्स ने आर्यन्स कॉलेज ऑफ लॉ, राजपुरा, नजदीक चंडीगढ़ के सहयोग से ‘‘इंटरनेशनल आर्बिट्रेशन-चैलेंजेस इन द एक्जीक्यूशन ऑफ द अवार्ड्स’’ पर एक वेबिनार का आयोजन किया।माननीय न्यायमूर्ति श्री एके सिकरी, पूर्व न्यायाधीश, सुप्रीम कोर्ट ऑफ इण्डिया, नई दिल्ली और माननीय न्यायमूर्ति मिस प्रतिभा एम सिंह, न्यायाधीश, दिल्ली उच्च न्यायालय मुय वक्ता थे। अडवाणी एंड कंपनी के पार्टनर एडवोकेट शशांक गर्ग मॉडरेटर थे। एडवोकेट गगन प्रदीप एस बॅल ने मेहमानों का स्वागत किया, जबकि डॉ अंशु कटारिया, अध्यक्ष, पुक्का और चेयरमैन, आर्यन्स ग्रुप ने मेहमानों को धन्यवाद दिया।पंजाब के बहुत से लॉ कॉलेजिस के विद्याॢथयों ने इस वेबिनार में भाग लिया जिनमें सेंट सोल्जर लॉ कॉलेज, जालंधर; सीटी इंस्टीट्यूट ऑफ लॉ, जालंधर; अमृतसर लॉ कॉलेज; शहीद अमरजीत मेमोरियल लॉ कॉलेज, पटियाला; पंजाब कॉलेज ऑफ लॉ, तरनतारन; आर्यन्स कॉलेज ऑफ लॉ, चंडीगढ़ शामिल है। जीएनडीयू कॉलेज के लॉ डायरेक्टर डॉ कुलदीप ग्रैवाल और सीटी लॉ कॉलेज के डॉ युग खैरा भी इस वेबिनार में उपस्थित थे।न्यायमूर्ति सीकरी ने अंतर्राष्ट्रीय मध्यस्थता के विभिन्न वर्गों जैसे कि प्रक्रिया, कार्यान्वयन और निर्णय के आधार के बारे में चर्चा की। मूल परिभाषा, विदेशी मध्यस्थता से संबंधित अंतरिम उपाय आदि। जस्टिस सीकरी ने घरेलू निर्णय और विदेशी निर्णय के बीच भी अंतर किया।न्यायमूर्ति प्रतिभा एम सिंह ने मध्यस्थ निर्णयों को अलग करने के लिए आवेदन को समझाया और अंतरिम उपायों पर भी चर्चा की। न्यायमूर्ति सिंह ने विदेशी निर्णयों के प्रवर्तन की शर्तों के बारे में बताया।एडवोकेट शशांक गर्ग ने आर्बिट्रेशन की प्रक्रियाओं, कुछ विदेशी निर्णयों के प्रवर्तन की जानकारी दी और विद्याॢथयों के सवालों को जजों के सामने रखा और उनकी शंकाओं को दूर किया।