मित्रों कोरोना आज दोबारा से इस प्रकार से फैल रहा है जैसे जंगल में आग फैलती है। कहीं ना कहीं हम लोगों की कमियां रही, जो दोबारा से यह बीमारी पहले से भी तेज गति से चल रही है । आज हमारा विषय लोगों द्वारा की गई गलतियों का आंकलन करना नहीं है हम लोगों से गलती हो चुकी है, अब हमें उसका सुधार करना है।
गुजरात के आयुर्वेद की विशेषज्ञ डॉक्टर हितेश जानी, जो एक प्रसिद्ध आयुर्वेदिक कॉलेज से प्रिंसिपल पद से रिटायर हुए हैं वह एक चुटकी सोंठ के द्वारा अभी तक तकरीबन एक लाख से ज्यादा कोविड मरीजों का इलाज कर चुके हैं।
कृपया सभी ध्यान दें जो इलाज आप अभी कर रहे हैं जिस भी अस्पताल या डॉक्टर ने आपको बताया है उसे आप करते रहें, अदरक हमारे घर का एक महत्वपूर्ण खाने का मसाला है जिसे प्रत्येक घर पर सदियों से प्रयोग किया जा रहा है इसलिए आप अगर अदरक का प्रयोग करेंगे तो आपको कोई नुकसान नहीं होगा फायदा जरूर हो सकता है यह ध्यान रहे इसलिए सभी से निवेदन है आपको जिस भी डॉक्टर ने जो दवाई दी है उसका सेवन करते रहें परंतु इस विधि का भी प्रयोग कर सकते हैं
आप सभी जानते हैं कोरोना वायरस नाक और मुंह के मार्ग से ही शरीर में प्रवेश करता है, सोंठ का प्रयोग करके हम इस वायरस के संक्रमण से सुरक्षा कवच बना सकते हैं सोंठ का प्रयोग नाक और मुंह दोनों जगह करके इस वायरस के संक्रमण से सुरक्षा प्राप्त कर सकते हैं, जैसा हम सभी जानते हैं अदरक हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाता है।
पहली विधि आपको मात्र चुटकी भर सोंठ ( सूखी अदरक का पाउडर) को अपने नाक में सूंघना है जैसे पहले नसवार लिया करते थे यह दिन में एक बार ही करना है डॉक्टर हितेश जानी बताते हैं सोंठ हमारे नाक में फंसी कफ का नाश कर देती है ।
दूसरा प्रयोग हम अपनी जीभ के ऊपर 1 ग्राम अदरक को रखकर करते हैं इससे मुंह मार्ग से जो वायरस हमारे भीतर जा रहा है उसका नाश हो सके, जब हमारे गले में खराश होगी उससे कब बनेगा अगर हमने शॉट का प्रयोग किया तो वह कफ को बनने नहीं देगा। लगभग 1 ग्राम सोंठ का पाउडर मुंह में रखकर उसे 5 मिनट तक खुलने दें और फिर उसको निकल जाएं यह प्रयोग दिन में दो बार करना है सुबह और शाम , इस प्रयोग को कर कर हम नाक और गले के भाग की अच्छी तरह सफाई कर सकते हैं।
इस प्रयोग को प्रत्येक दिन करें प्रयोग के आधा घंटा कुछ ना खाएं और पिए। गर्भवती माताएं इस विधि का प्रयोग बिल्कुल ना करें। 12 बरस से कम बच्चों को आधा ग्राम सोंठ का ही प्रयोग करना है। वह भी गाय के घी के साथ मुंह के द्वारा बच्चे नाक से सोने वाला प्रयोग ना करें।
एक शोध से पता चला है भाप अगर हम सही प्रयोग करेंगे तो वह हमारे फेफड़ों के लिए सैनिटाइजर से भी ज्यादा अच्छा कार्य करता है जैसे सैनिटाइजर कोरोनावायरस क्यों मारता है उसी प्रकार भारत भी हमारे फेफड़ों में जाकर वायरस को मारने में अति महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है
विशेषज्ञों का मानना है भाप कोरोनावायरस को निष्क्रिय करने के लिए आज के समय कारगर उपचार है, जनरल ऑफ लाइफ साइंस में भी प्रकाशित हुई है एक रिपोर्ट में वैज्ञानिकों ने बताया है कि रोजाना दो से तीन बार पांच 5 मिनट तक का भाप लेने से वायरस को खत्म किया जा सकता है केजीएमयू के रेस्पिरेट्री मेडिसिन की विभागाध्यक्ष डॉ सूर्यकांत त्रिपाठी कहते हैं क्रोना वायरस पहले मुंह नाक व गले में कई दिन रुकने के बाद फेफड़ों में था इस दौरान गर्म पानी पीने से व गर्म गरारे करने से इसकी सक्रियता काफी कम हो जाती थी मगर अब यह नाक में पैरानैसल साइनस के आंतरिक लिए हो पूरे पेपर में पहुंच जाता है आप में इतनी क्षमता होती है कि पैरानैसल साइनस में छुप के वायरस को निष्क्रिय करने के साथ फेफड़ों में वायरस के जमाव को रोक सकती है कई अध्ययन में यह माना गया है कि 50 डिग्री सेल्सियस पर आपसे वायरस पैरालाइज हो सकता है जबकि 60 डिग्री इतना कमजोर हो जाता है कि अंदर की मिनट ही उसे मात दे सकती है
अगर भाप भारत में संतरे के छिलके या नींबू के छिलके या लहसुन अदरक नीम की पत्तियां कुछ भी मिला कर प्रयोग करते हैं तो यह आपको ज्यादा असरदार साबित होगा क्योंकि यह एंट्री माइक्रोवल होते हैं जो वायरस को कमजोर करने में मदद करते हैं





















