
जीरकपुर शहर आबादी के मामले में लगातार इजाफा कर रहा है। वहीं दूसरी ओर नगर परिषद कई मुद्दों को लेकर कोई काम नहीं कर पा रही है। पॉलीथीन बैग बैन करने को लेकर इस साल कोई बड़ी ड्राइव यहां नहीं चली। कोई चालान भी नहीं किया गया। इस कारण पॉलीथीन का खुलकर इस्तेमाल हो रहा है।
नगर परिषद के पास शहर में इकट्ठा होने वाले गारबेज और इसमें से निकलने वाले पॉलीथीन को डंप करने तक की कोई पक्की जगह नहीं है। जिस जगह अभी शहर का गारबेज गिराया जा रहा है। वह टेंपरेरी डंपिंग ग्राउंड है। उस डंपिंग ग्राउंड को भी तभी साफ रखा जाएगा जब उसमें पॉलीथिन नहीं जाएंगे।एयरपोर्ट अथॉरिटी जीरकपुर एमसी को कह चुकी है कि डंिपंग ग्राउंड की जगह साफ होनी चाहिए ताकि जगह गारबेज जमा न हो। वजह यह है कि डंपिंग ग्राउंड के ऊपर से फ्लाइट्स गुजरती हैं। अगर डंपिंग ग्राउंड में गारबेज जमा होगा तो उसमें पक्षी भी पनपेंगे। इससे पक्ष विमानों से टकरा सकते हैं।
शहर के लोगों की ओर से यह बात उठाई जा रही है कि जब भी एमसी की मीटिंग हो, उसमें शहर के कई लोगों के फीडबैक भी लिए जाएं। इससे शहर के हित के लिए करने के लिए सही दिशा मिलेगी। लोग चाहते हैं कि जीरकपुर शहर चंडीगढ़ से जुड़ा है। वहां जो भी अच्छी प्लानिंग होती है उसी तरह यहां भी होना चाहिए। अगर पॉलीथीन पर बैन नहीं होगा तो इससे चंडीगढ़ को भी कहीं न कहीं नुकसान होगा।
हमारे पास अभी डंपिंग ग्राउंड नहीं है। इसलिए लोगांे को पॉलीथीन का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। जहां अभी कचरा डाला जा रहा है वह टेंपरेरी इस्तेमाल के लिए बनाया गया है। इसमें प्रशासन भी अपना काम करेगा। पर लोगांे का भी सोचना चाहिए कि पॉलीथीन का इस्तेमाल न करें।
-राजिंदर सिंह, चीफ सेनेटरी इंस्पेक्टर




















