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Posted by Surinder Verma on Wednesday, June 17, 2020

एक अतुल्‍य पर्यटन स्थल के रूप में भारत का विकास

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एक अतुल्‍य पर्यटन स्थल के रूप में भारत का विकास

लेखक -रितेश अग्रवाल

भारत की समृद्ध संस्कृति, आध्यात्मिक विरासत, प्राकृतिक सौंदर्य और ऐतिहासिक महत्व इसे दुनिया भर के पर्यटकों के लिए एक मनपसंद पर्यटन स्‍थल बनाते हैं। फिर भी, इस क्षेत्र को वर्तमान मोदी सरकार के कार्यकाल में ही वह प्राथमिकता मिली है जिसका यह हकदार है—अर्थव्यवस्था के प्रमुख चालक और सॉफ्ट पावर के एक साधन, दोनों ही रूपों में। प्रधानमंत्री मोदी ने इस क्षमता को गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए भी पहचाना था। पर्यटन भारत में अब केवल फुरसत में छुट्टियां बिताने का साधन भर नहीं रह गया है; यह रोज़गार, गौरव और विश्व मानचित्र पर भारत को स्‍थापित करने का माध्‍यम भी बन गया है।

पिछले एक दशक के दौरान, भारत में परिवहन अवसंरचना का व्यापक विस्तार हुआ है। राजमार्ग, रेलवे और विमानन नेटवर्क उन क्षेत्रों तक पहुँच चुके हैं, जो पहले दुर्गम हुआ करते थे। स्वदेश दर्शन (विषय-आधारित पर्यटन) और प्रशाद (PRASHAD) – तीर्थयात्रा पुनरुद्धार एवं आध्यात्मिक संवर्धन अभियान – जैसी योजनाओं ने आस्था और संस्कृति के प्राचीन मार्गों को पुनर्जीवित किया है और साथ ही छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में रोज़गार के अवसर भी पैदा किए हैं। पिछले दशक के दौरान निर्मित प्रत्येक राजमार्ग, हवाई अड्डा और तीर्थ गलियारा केवल अवसंरचना मात्र नहीं है – यह भारत की विरासत की ओर एक सेतु है।

मोदी के विज़न ने अध्यात्म, स्वास्थ्य, एडवेंचर और व्यावसायिक पर्यटन पर जोर देते हुए अतुल्य भारत 2.0 में नई जान फूंक दी है। बौद्ध सर्किट, रामायण सर्किट जैसे विशेष सर्किट, वाराणसी में काशी विश्वनाथ कॉरिडोर और गुजरात में स्टैच्यू ऑफ यूनिटी लाखों लोगों को आकर्षित करने वाली ऐतिहासिक परियोजनाएं हैं। केदारनाथ, जो कभी त्रासदी से तबाह हो गया था, साल 2024 में 16 लाख से अधिक तीर्थयात्रियों का स्वागत करने के लिए फिर से तैयार हो गया। एक दशक पहले तक यह आंकड़ा केवल 40,000 का था। महाकाल की नगरी के रूप में पुनर्जीवित उज्जैन ने साल 2024 में 7.32 करोड़ आगंतुकों को आकर्षित किया। काशी ने 11 करोड़ तीर्थयात्रियों का स्वागत किया, जबकि बोधगया और सारनाथ ने साल 2023 में 30 लाख से अधिक साधकों को आकर्षित किया। अयोध्या में राम लला की प्राण प्रतिष्ठा के केवल छह महीनों के भीतर, 11 करोड़ से अधिक भक्तों ने दर्शन किए। महाकुंभ 2025, विश्व का सबसे बड़ा आध्यात्मिक समागम, में 65 करोड़ से अधिक श्रद्धालु आए। केदारनाथ का पुनरुद्धार, काशी का कायाकल्‍प और अयोध्या का पुनर्जन्म यह दर्शाता है कि किस प्रकार आस्था और अवसंरचनाएं मिलकर यात्रा को पुनर्परिभाषित कर सकते हैं।

डिजिटल इंडिया और स्मार्ट सिटीज़ पर ध्यान केंद्रित करने से बुनियादी ढाँचों और पहुँच में और सुधार हुआ है। आधुनिक हवाई अड्डे, उन्नत राजमार्ग, बेहतर रेल संपर्क और निर्बाध डिजिटल बुकिंग प्रणालियों ने यात्रा को और अधिक सुविधाजनक और विश्वसनीय बना दिया है। डिजिटल ऐप्स, बहुभाषी हेल्पलाइन और अंतिम छोर तक कनेक्टिविटी भले ही छोटे बदलाव लगें, लेकिन इन सबने मिलकर भारत को दुनिया के सबसे ज़्यादा यात्री-अनुकूल स्थलों में से एक बना दिया है।

साथ ही, वीज़ा मानदंडों में ढील और विस्तारित ई-वीज़ा नीति ने विदेशी पर्यटकों के आगमन को उल्लेखनीय रूप से बढ़ावा दिया है। सरकार ने इको-टूरिज्म, वेलनेस टूरिज्म और एडवेंचर स्पोर्ट्स को भी बढ़ावा दिया है, जिससे यह सुनिश्चित हुआ है कि भारतीय पर्यटन का भविष्य संतुलन में है – विकास के साथ-साथ स्‍थायित्‍व, बुनियादी ढाँचों के साथ-साथ विरासत और आधुनिकता के साथ-साथ परंपरा।
जी-20 शिखर सम्मेलन जैसे उच्च-स्तरीय वैश्विक आयोजनों की भारत द्वारा मेज़बानी ने न केवल आतिथ्य सत्कार, बल्कि सांस्कृतिक गहराई को भी प्रदर्शित किया। ऐसे अवसरों ने भारत को एक आधुनिक अर्थव्यवस्था और एक शाश्वत सभ्यता, दोनों के रूप में स्थापित किया, जिसने अंतर्राष्ट्रीय ध्यान आकर्षित किया और विदेशों से अधिक से अधिक पर्यटकों को प्रोत्‍साहित किया।

नीतियों से परे, मोदी जी जिस तरह से भारतीय संस्कृति और पर्यटन स्थलों का समर्थन करते हैं, उसका एक व्यक्तिगत पहलू भी है। योग को दुनिया भर में लोकप्रिय बनाने से लेकर केदारनाथ में नंगे पैर चलने और अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह के पानी में गोता लगाने तक, उन्होंने न केवल भाषणों के माध्यम से, बल्कि अपने अनुभवों के माध्यम से भी दुनिया को भारत से परिचित कराया है। ऐसा करके, वे स्वयं एक सांस्कृतिक राजदूत बन गए हैं, और इस विचार को पुष्ट कर रहे हैं कि ब्रांड इंडिया का निर्माण केवल बोर्डरूम या नीतिगत दस्तावेजों में ही नहीं, बल्कि वाराणसी के घाटों, हिमालय की चोटियों और केरल के तटों पर भी हो रहा है।

श्री मोदी पर्यटन का सिर्फ़ समर्थन ही नहीं करते; वे उसे साकार भी करते हैं। सोशल मीडिया पर भारतीय स्थलों का बार-बार प्रदर्शन, भाषणों में स्थानीय त्योहारों और परंपराओं का ज़िक्र, और भारतीयों से “पहले भारत को जानो” का आह्वान, इन सबने घरेलू पर्यटन के प्रति गौरव का भाव जगाया है। यहाँ तक कि आधिकारिक दौरों पर उनका पहनावा — चाहे नागा शॉल हो, हिमाचली टोपी हो या तमिल वेष्टि — क्षेत्रीय पहचान और परंपराओं के प्रति उनका सम्‍मान होता है, जो विविधता में एकता का प्रतीक है।

एक राष्ट्रीय नेता और एक वैश्विक राजनेता, दोनों के रूप में मोदी भारत की सौम्य शक्ति, संस्कृति और आध्यात्मिकता के महत्व को समझते हैं। संयुक्त राष्ट्र, विश्व आर्थिक मंच और जी-20 शिखर सम्मेलन में उनके संबोधन अक्सर भारत की विरासत को गौरवान्वित करते हैं। योग और आयुर्वेद के प्रति उनके वैश्विक प्रोत्साहन ने भारत को समग्र स्वास्थ्य के केंद्र के रूप में स्थापित किया है। आज, देश भर के ध्‍यान-आश्रम 120 से अधिक देशों के साधकों को आकर्षित करते हैं, जो इस बात का प्रमाण है कि कैसे प्राचीन पद्धतियां दुनिया भर में आधुनिक जीवनशैली को आकार दे रही हैं।

इस प्रकार, उनके नेतृत्व में पर्यटन रोज़गार, विकास और सांस्कृतिक आदान-प्रदान का एक सशक्त माध्यम बनकर उभरा है। भारत में साल 2024 में घरेलू पर्यटकों की संख्‍या 294.76 करोड़ थी, जो पिछले वर्ष की तुलना में 17.36% अधिक है। जैसे-जैसे यह क्षेत्र निरंतर विस्‍तृत हो रहा है, भारत न केवल अपने अतीत का जश्न मना रहा है, बल्कि एक ऐसे भविष्य का निर्माण भी कर रहा है जहाँ हर क्षेत्र का वैश्विक मानचित्र पर अपना एक स्थान हो। प्रत्येक राज्य, शहर और गाँव को अब अपनी कहानी कहने का अवसर मिला है—और मोदी जी के नेतृत्व में ये कहानियाँ दुनिया तक पहुँच रही हैं।
एक ऐसे नेता के साथ जो “ब्रांड इंडिया” की शक्ति में विश्वास रखता है, भारतीय पर्यटन का भविष्य मजबूत, गतिशील और चिरस्‍थायी है।

(श्री रितेश अग्रवाल एक आतिथ्य श्रृंखला, PRISM के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी हैं। इस लेख में व्यक्त विचार और राय उनके निजी हैं।)