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Posted by Surinder Verma on Wednesday, June 17, 2020

‘स्वस्थ जीवन शैली, अच्छे पोषण के साथ अच्छी सोच होना भी जरूरी :डॉक्टर्स व विशेषज्ञ

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चंडीगढ़, सुनीता शास्त्री। द सोसाइटी फॉर द प्रमोशन ऑफ एथिकल एंड अफोर्डेबल हेल्थ केयर (स्पीक) ने श्रृंखला की यूनिवर्सल हेल्थ लिटरेसी फ़ॉर प्रिवेंशन ऑफ डिजीज के तहत चंडीगढ़ प्रेस क्लब, सेक्टर 27 में यहां एक सेमिनार का आयोजन किया।सेमिनार, गुड न्यूट्रिशन ओर पुअर हेल्थ: च्वाइस इज यूअर पर आधारित था जिसमें डॉक्टरों और अन्य विशेषज्ञों के बीच दो संवादात्मक सत्र रखे गए।डॉ आर कुमार, अध्यक्ष स्पीक इंडिया ने इस अवसर पर बोलते हुए कहा कि इस सेमिनार का फोकस स्वस्थ भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए अच्छे पोषण के महत्व पर है, अंतर्निहित संदेश के साथ कि अधिकांश बीमारियों को स्वस्थजीवन शैलीऔर साफ वातावरण के माध्यम से रोका जा सकता है।पंजाब सरकार के साथ आरसीएस के रूप में तैनात श्री विकास गर्ग (आईएएस) ने डॉक्टरों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि लोगों के बीमार होने पर डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।अजीत सिंह च_ा, पूर्व मुख्य सचिव पंजाब तथा डॉ एस शर्मा पूर्व निदेशक पीजीआई ने सत्र की अध्यक्षता की।पहले सत्र में बोलते हुए चंडीगढ़ कॉर्निया सेंटर के डॉ अशोक शर्मा ने आंखों पर खराब पोषण के दुष्प्रभाव को बताया, विशेष रूप से विटामिन ए की कमी और प्रोटीन की कमी के कारण कॉर्नियल अल्सर के चांस बढ़ सकते हैं। पीजीआई के डॉ जे.एस. ठाकुर ने पोषण और कुपोषण की उत्पत्ति के बारे में बात की। वहीं डॉ अतुल सचदेव ने कहा कि जीएमसीएच 32 के चिकित्सक और पूर्व निदेशक प्रिंसिपल ने कुपोषण के कारण डांस ऑफ डिजीज एंड डेथ को रेखांकित किया। उन्होंने चौंकाने वाले आंकड़े साझा किया, जिसमें पंजाब की 30 प्रतिशत महिलाएं और 22 प्रतिशत पुरुष मोटापे से ग्रस्त हैं। एक अध्ययन का हवाला देते हुए, उन्होंने कहा कि दिल्ली की 70 प्रतिशत आबादी मोटापे से ग्रस्त है, 60 प्रतिशत कैंसर लोगों को होता है। उन्होंने कहा कि विश्व की 30 प्रतिशत आबादी अधिक वजन या मोटापे से ग्रस्त है, जबकि 2030 तक अमेरिका में 80 प्रतिशत लोग मोटापे या अधिक वजन वाले होंगे।डॉ एस शर्मा, पूर्व निदेशक, पीजीआई ने इस अवसर पर बोलते हुए कहा कि भारत उभरती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है, लेकिन हम नहीं जानते कि भारी प्रदूषण के कारण हम क्या खा रहे हैं। इसलिए कड़े कदम उठाने की जरूरत है ताकि हमें उचित भोजन मिले, उन्होंने कहा कि सरकार को लोगों में जागरूकता लाने का प्रयास करना चाहिए।स्थानीय मेडिकल कॉलेज के एक वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ दिलप्रीत संधू ने भी कुपोषण के कारण महिलाओं और बच्चों की बीमारियों की रोकथाम पर जोर दिया। डॉ। प्रीति प्रधान, डीन मेडिकल साइंसेज, चितकारा विश्वविद्यालय ने कम्युनिटी को अच्छा पोषण प्रदान करने में सुशासन के महत्व पर प्रकाश डाला।दूसरे सत्र में स्वस्थ जीवन शैली पर गई, पोषण के महत्व पर प्रमुख वक्ताओं ने प्रकाश डाला। डॉ सुकांत गुप्ता ने उनके कार्यान्वयन पर एफएसएसएआई के पोषण और भूमिका को नियंत्रित करने वाले कानूनों पर बात की। श्रीमती कमल मल्ही और डॉ मनु जटाना ने सेमिनार के दौरान बताया कि कल्याण के लिए पोषण कैसे आवश्यक है। डॉ हेमराज ने अपने विचार रखते हुए बैक्टीरिया खाद्य श्रृंखला पर कैसे हमला करते हैं, के बारे में अपनी बात रखी। प्रो अरुणदीप अहलूवालिया ने बताया कि खाद्य सुरक्षा पर्यावरण से किस प्रकार संबंधित है, डॉ मीनाक्षी उप्पल ने भोजन के पहलुओं पर तथा हैप्पीनेस विषय पर अपने विचार रखे।