चण्डीगढ़ : शब्दों के माध्यम से समाज, संवेदना और समय की धड़कनों को अभिव्यक्ति देने वाले वरिष्ठ साहित्यकार प्रेम विज के साहित्यिक अवदान को एक और महत्वपूर्ण सम्मान प्राप्त हुआ है। बाबा मस्तराम यूनिवर्सिटी, रोहतक ने उनके साहित्य पर शोध कार्य कराने का निर्णय लिया है। इस संबंध में विश्वविद्यालय प्रशासन ने उन्हें औपचारिक पत्र जारी कर इसकी सूचना दी। डीन एकेडमिक अफेयर्स द्वारा जारी पत्र के अनुसार शोध का विषय ‘प्रेम विज के साहित्य में निरूपित विविध सरोकार’ निर्धारित किया गया है। यह शोध कार्य गीता सुपुत्री सुरेंद्र द्वारा किया जाएगा, जबकि इसके शोध निर्देशक डॉ. राजेंद्र सिंह होंगे। उल्लेखनीय है कि प्रेम विज के साहित्य पर इससे पूर्व भी विभिन्न विश्वविद्यालयों में शोध कार्य सम्पन्न हो चुके हैं। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के पत्राचार
पाठ्यक्रम निदेशालय ने वर्ष 1997-98 में ‘प्रेम विज : व्यक्तित्व एवं कृतित्व’ विषय पर लघु शोध कराया था। इसके बाद वर्ष 2002-03 में विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग ने ‘लघुकथाकार प्रेम विज’ विषय पर शोध सम्पन्न करवाया। इसी क्रम में गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी के हिंदी विभाग ने वर्ष 2003 में ‘प्रेम विज के काव्य का विवेचनात्मक अध्ययन’ विषय पर शोध कराया, जबकि हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के अंतर्राष्ट्रीय दूरवर्ती शिक्षा एवं मुक्त अध्ययन केंद्र ने वर्ष 2004 में ‘प्रेम विज की कविता में यथार्थ बोध’ विषय पर लघु शोध कार्य सम्पन्न कराया था। प्रेम विज की अब तक कविता, कहानी, हास्य-व्यंग्य, लघुकथा और आलोचना जैसी विविध विधाओं में 26 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। उनके साहित्य में मानवीय संवेदनाओं, सामाजिक यथार्थ और समय की विडंबनाओं का गहरा और प्रभावी चित्रण देखने को मिलता है।




























