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Posted by Surinder Verma on Wednesday, June 17, 2020

किदार अदबी ट्रस्ट, पंचकुला की मासिक काव्य गोष्ठी का आयोजन

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किदार अदबी ट्रस्ट, पंचकुला की मासिक काव्य गोष्ठी का आयोजन
दिनांक 1/8/2021, रविवार को श्री गणेश दत्त जी के संयोजन में ऑनलाइन गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस गोष्ठी में संस्था के संस्थापक श्री किदार नाथ किदार जी को याद करते हुए सभी संस्था से जुड़े सभी कवि कवयित्री हर माह इस आयोजन को अनवरत करते रहने के लिए कृत संकल्प रहे। श्री किदार नाथ किदार जी की सुपुत्री श्री मति पूनम कोचर ने इस कार्यक्रम मे भागीदारी की और बताया कि संस्था का कार्यक्रम अनवरत चलते रहना चाहिए।
कार्यक्रम का सुन्दर, सहज, मोहक और व्यवस्थित संचालन श्री गणेश दत्त जी, वरिष्ठ सदस्य, किदार अदबी ट्रस्ट ने किया। कार्यक्रम का शुभारंभ श्री सुरजीत सिंह जी कि मधुर वाणी में सरस्वती वंदना से किया गया ।
इ़स गोष्ठी में वरिष्ठ और दिग्गज कवि ,कवयित्रियों श्री प्रेम विज जी, सुदेश मोदगिल नूर जी, गुरदीप गुल जी, इन्द्र वर्षा जी, नीरू मित्तल जी, संतोष गर्ग जी, सगीता शर्मा कुंद्रा जी, अश्वनी कुमार जी, सुरजीत सिंह जी व गणेश दत्त जी ने भाग लिया।
कुछ झलकियाँ
इन्द्र वर्षा जी – शत शत बार प्रणाम, किदार नाथ किदार जी को, सब को करते प्यार, उस दिलदार जी को ।
नीरू मित्तल नीर जी – सब ने कहा सिमटी रहो, सहती रहो करती रहो, सिमट गई ।
गुरदीप गल जी – जाने वालो देते रहना अपने कदमों के सुराग़, जलाते रहना तारीक राहों में उम्मीदों के चिराग़
प्रेम विज जी – पक्षी आसमान में कितनी भी ऊंची उड़ान क्यों न भर लें, लेकिन ज़मीन पर ही लौटना पढ़ता है
सुदेश मोदगिल नूर जी ने बोलियाँ सुनाईं – महीना सावन दा आया ऐ, ढोलना वे पिपली ते असां झूला पाया आ।
संतोष गर्ग जी – कभी पर्वतों के घर जाया करो, ढेरों आशीर्वाद पाया करो । वह अम्मा कुछ कहती है, चुपके से जो रहती है।
अश्वनी कुमार जी – क्या भूलूँ और क्या याद करूँ मैं।
संगीता शर्मा कुंद्रा जी – याद आती है मुझको वो बचपन की मस्ती, सवार होकर साइकिल पर, घूमना बस्ती बस्ती।
श्री गणेश दत्त जी ने सभी कवियों की रचनाओं पर उन्हें बधाई देते हुए उनका और श्री मति पूनम कोचर जी का आभार प्रकट किया।