चण्डीगढ़ : अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु तब एक ऐतिहासिक उपलब्धि का साक्षी बनेगी, जब हिमालयन सिद्ध अक्षर के मार्गदर्शन में अक्षर योग केंद्र एक ही दिन में 21 गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाएगा। योग और ध्यान के क्षेत्र में एक ही दिन में इतने बड़े स्तर पर अभूतपूर्व विश्व रिकॉर्ड वर्षों की साधना, योजना, प्रशिक्षण और समर्पण का परिणाम है। जिसका उद्देश्य योग, ध्यान और समग्र स्वास्थ्य के वास्तविक विज्ञान को जन-जन तक पहुंचाना है।
अक्षर योग केंद्र पहले से ही योग के क्षेत्र में अपनी वैश्विक पहचान और पहले से दर्ज 21 गिनीज बुक वर्ल्ड विश्व रिकॉर्ड उपलब्धियों के लिए जाना जाता है। अब संस्था एक और ऐतिहासिक अध्याय लिखने की तैयारी कर रही है। इसमें स्कूलों और कॉलेजों के विद्यार्थी, शिक्षक, शैक्षणिक संस्थान, अनाथालयों और सेवा गृहों के बच्चे, विशेष रूप से सक्षम बच्चे एवं युवा, गृहिणियां, उद्यमी, उद्योग जगत से जुड़े लोग, कॉर्पोरेट कर्मचारी, योग साधक, स्वास्थ्य एवं कल्याण के क्षेत्र से जुड़े लोग तथा विभिन्न सामाजिक संगठन भाग ले रहे हैं। अनेक देशों से भी प्रतिभागी ऑनलाइन और ऑफलाइन माध्यमों से इस वैश्विक योग उत्सव हिस्सा बन रहे हैं।
इस आयोजन सहभागिता करने वाले सुरक्षा बलों में बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स , भारतीय वायुसेना, सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स ,कर्नाटक राज्य पुलिस तथा सीआईएसएफ कर्मी भाग ले रहे हैं। इन प्रतिभागियों के लिए विशेष प्रशिक्षण, तैयारी सत्र और चयन प्रक्रियाएं आयोजित की गई हैं। रिकॉर्ड प्रयासों में सबसे महत्वपूर्ण गतिविधियों में से एक होगी त्राटक ध्यान की विशाल सामूहिक साधना। कई महीनों से हजारों प्रतिभागियों को विशेष कार्यशालाओं, प्रशिक्षण शिविरों और ऑनलाइन सत्रों के माध्यम से त्राटक का प्रशिक्षण दिया गया है। योग सत्रों, ध्यान कार्यशालाओं, जन-जागरूकता अभियानों, सामुदायिक कार्यक्रमों और डिजिटल प्रशिक्षण मंचों के माध्यम से प्रतिभागियों को इस दिन के लिए तैयार किया गया है। इस पहल का उद्देश्य केवल रिकॉर्ड बनाना नहीं, बल्कि लोगों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने, अनुशासन विकसित करने, समाज को सशक्त बनाने और सकारात्मक जीवन मूल्यों को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित करना भी है। कार्यक्रम के सूत्रधार हिमालयन सिद्ध अक्षर कहते हैं, “योग का उद्देश्य लोगों को स्वस्थ, प्रसन्न और सार्थक जीवन जीने के लिए प्रेरित करना है, साथ ही मजबूत परिवारों, स्वस्थ समुदायों और अधिक सामंजस्यपूर्ण समाज के निर्माण में योगदान देना है।





























