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Posted by Surinder Verma on Wednesday, June 17, 2020

देवम कला एवं संस्कृति फाउंडेशन द्वारा चण्डीगढ़ की लेखिका शैलजा की कहानियों पर वर्चुअल परिचर्चा का आयोजन

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देवम कला एवं संस्कृति फाउंडेशन द्वारा चण्डीगढ़ की लेखिका शैलजा की कहानियों पर वर्चुअल परिचर्चा का आयोजन
शैलजा की कहानियां लेखक मनोहर श्याम जोशी की लीग की कहानियां हैं : डॉ. सुधांशु कुमार शुक्ल


चण्डीगढ़ : बल्गारिया की  देवम कला एवं संस्कृति फाउंडेशन ने बसंत पंचमी के अवसर पर चण्डीगढ़ की लेखिका शैलजा कौशल कोछड़ की कहानियों पर एक ख़ास वर्चुअल परिचर्चा का आयोजन किया। इस दौरान प्रख्यात समीक्षक डॉ. सुधांशु कुमार शुक्ल ने कहा कि शैलजा की कहानियां लेखक मनोहर श्याम जोशी की लीग की कहानियां हैं। डॉ. शुक्ल दिल्ली के हंसराज कॉलेज में हिंदी के प्रोफेसर होने के साथ साथ भारत में हिंदी के जाने-माने समीक्षक हैं। वे पोलैंड में इंडियन कौंसिल फॉर कल्चरल रिलेशन्स की हिंदी चेयर पर रह चुके हैं। बल्गारिया की देवम कला एवं संस्कृति फाउंडेशन की फाउंडर – अध्यक्ष डॉ. मोना कौशिक ने बताया कि इस ख़ास वार्ता को ‘पांच के सिक्के – एक सार्थक परिचर्चा’ का नाम दिया गया है। डॉ. मोना बल्गारिया की सोफ़िया यूनिवर्सिटी के भारतीय विद्या विभाग में व्याख्याता हैं।
शैलजा की नई किताब ‘पांच के सिक्के तथा अन्य कहानियां’ देश – विदेश से समीक्षकों की भूरी – भूरी प्रशंसा बटोर रही है। परिचर्चा का आरम्भ बल्गारिया से स्टेला स्तोईलोवा की बसंत पंचमी की शुभकामनायों से हुआ। लेखिका शैलजा कौशल ने बल्गारिया से अपने लगाव पर बात की और अपनी लेखन यात्रा का उल्लेख किया। डॉ. सुधांशु ने किताब ‘पांच के सिक्के’ की गहराई से समीक्षा करते हुए कहा कि इस किताब की हर एक कहानी हमारे रोज़मर्रा के जीवन से जुडी हुई है। प्रेम का जो उदात्त रूप लेखिका ने इस किताब की कहानियों के माध्यम से प्रस्तुत किया है वह बहुत कम लेखक कर पाते हैं। इन कहानियों में प्रेम को सम्मान और आदर के भाव के समक्ष रखा गया है। डॉ. शुक्ल ने कहा कि यह कहानियां निश्चित तौर से पाठ्यक्रम का भाग बनने योग्य हैं। विद्यार्थी ऐसी कहानियों से कथा – शिल्प और जीवन के बारे में बहुत कुछ सीख सकते हैं। उन्होने कुछ कहानियों का ख़ास तौर से उल्लेख करते हुए कहा कि लेखिका की कलम गरीबी, और हाशिये पर जी रहे लोगों पर भी चली है। इनकी कहानियां कल्पना नहीं हकीकत पर आधारित हैं। डॉ. शुक्ल ने कहा कि इनकी कहानियां जहाँ समाप्त होती हैं दरअसल वहीँ से शुरू होती हैं। उन्होनें कहा कि शैलजा कौशल की कहानियों की लेखन विधा और शिल्प उन्हें विख्यात लेखक मनोहर श्याम जोशी के टीवी सीरियल ‘हम लोग’ और ‘बुनियाद’ की श्रेणी में लाने योग्य है। डॉ. मोना कौशिक ने इस अवसर पर निराला जी को याद करते हुए ‘सखी बसंत आया रे’ कविता पढ़ी। डॉ. शुक्ल ने अपन बेटी को समर्पित करते हुए एक कविता पढ़ी।
इस परिचर्चा में जानी-मानी रेडियो उद्घोषिका इंदु पांडे, उत्तर प्रदेश सोनभद्र आकाशवाणी से श्रीमती सुरसरी, डॉ आरती पाठक, डॉ. इला कौशिक, जर्मनी से सुश्री कट्रीन जुड़ीं। क्यक स्टोरीटेलिंग ने इस अवसर पर कार्यक्रम के आकर्षक पोस्टर तैयार किये।