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Posted by Surinder Verma on Wednesday, June 17, 2020

किसानों की मुख्यमंत्री को काले झंडे दिखाने की चेतावनी से प्रशासन के हाथ-पांव फूले

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करीब 22 माह से जमीन के मुआवजे की मांग को लेकर आईएमटी के गेट के सामने धरने पर बैठे 5 गांवों के किसान अब जन आशीर्वाद यात्रा के दौरान बुधवार को सीएम को काले झंडे नहीं दिखाएंगे। किसान संघर्ष समिति आईएमटी ने रविवार को महापंचायत कर काले झंडे दिखाने की चेतावनी दी थी। इसके बाद इस चेतावनी को गंभीरता से लेते हुए डीसी अतुल कुमार ने सोमवार को किसानों को बुलाया था। उन्होंने किसानों को आश्वासन दिया कि आपकी मांगें सीएम के सामने रख उन्हें हल कराने की कोशिश की जाएगी।

इस दौरान डीसी ने किसानों से उनकी मांगों से संबंधित मंगलवार को मांगपत्र भी मांगा था। जिसे समिति के पदाधिकारियों ने सौंप दिया। काले झंडे दिखाने की चेतावनी को भाजपा ने भी गंभीरता से लिया। इसके बाद पार्टी की तरफ से भाजपा प्रदेश कार्यकारिणी के सदस्य नयनपाल रावत को किसानों के धरना स्थल पर भेजा गया। रावत ने मंगलवार को धरना स्थल पर पहुंचकर किसानों से बातचीत कर उन्हें विश्वास दिलाया कि एक महीने के अंदर उनकी मांगों को सरकार से पूरा करा दिया जाएगा। उनके आश्वासन के बाद किसानों ने अपने विरोध प्रदर्शन के कार्यक्रम को रद्द कर दिया।

मुआवजे की मांग को लेकर धरना चल रहा है, वह जारी रहेगा

फरीदाबाद. धरना स्थल पर पहुंच कर किसानों को उनकी मांगें हल कराने का आश्वासन देते भाजपा नेता नयनपाल रावत।

मांगें बहुत पुरानी हैं, लेकिन आज तक नहीं हुईं पूरी

आईएमटी में 22 महीने से मुआवजे की मांग को लेकर धरने पर बैठे नवादा, चंदावली, मच्छगर, मुजेड़ी व सोतई गांव के किसानों ने रविवार को महापंचायत कर सीएम के आगमन पर उन्हें दिल्ली-बाइपास रोड पर काले झंडे दिखाने का निर्णय लिया था। किसान संघर्ष समिति के प्रधान रामनिवास नागर और गिरिराज सिंह का कहना है कि उनकी मांगों को लेकर जो धरना चल रहा है, वह जारी रहेगा। उन्हें जिला प्रशासन और भाजपा की ओर से आश्वासन दिया गया है कि सीएम से मिलकर उनकी मांगें हल कराने की पूरी कोशिश की जाएगी। इससे सीएम की यात्रा को काले झंडे नहीं दिखाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि उनकी मांगें बहुत पुरानी हैं। इनको लेकर कई बार स्थानीय विधायकों व मंत्रियों से बातचीत हो चुकी है, लेकिन ये आज तक पूरी नहीं हुईं।