राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान में हर्षोल्लास से मनाया गया 80वां स्वतंत्रता दिवस
रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों में दिखी देशभक्ति, राष्ट्रीय एकता और भारतीय संस्कृति की अद्भुत झलक
पंचकूला : राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान (एनआईए), पंचकूला में 80वां स्वतंत्रता दिवस पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। आयुष मंत्रालय भारत सरकार के तत्वाधान में राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान के कुलपति प्रोफेसर (डॉ.) संजीव शर्मा और डीन प्रोफेसर गुलाब चंद पमनानी के मार्गदर्शन में संस्थान ने इस वर्ष एक नई प्रेरणादायी पहल की। संस्थान में कार्यरत एमटीएस निशा ने ध्वजारोहण किया और सलामी दी। संस्थान के सुरक्षा कर्मियों की ओर से मार्च पास्ट किया गया। मुख्यातिथि डीएमएस डॉ. गौरव गर्ग और कल्चरल कमेटी के चेयरमैन डॉ. प्रह्लाद रघु ने निशा को पगड़ी पहनाकर सम्मानित किया।

अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रोफेसर प्रह्लाद रघु ने स्वतंत्रता संग्राम के वीरों के बलिदान को नमन करते हुए कहा कि आजादी केवल अधिकार नहीं, बल्कि देश के प्रति कर्तव्यों और जिम्मेदारियों का भी बोध कराती है। उन्होंने सभी से राष्ट्र निर्माण, सामाजिक समरसता और जनसेवा की भावना को मजबूत करने का आह्वान किया।
मुख्यातिथि डीएमएस डॉ. गौरव गर्ग ने कहा कि देश की आजादी के लिए स्वतंत्रता सेनानियों से लेकर वीरों जवानों ने अनगिनत बलिदान दिए गए। देश की आजादी के लिए जेलों की यातनाओं से लेकर गोलियां तक खाई। महात्मा गांधी का सत्याग्रह से लेकर भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव और नेता जी सुभाष चंद बोस की कुर्बानी तथा रानी लक्ष्मी भाई की शौर्य गाथा ने स्वतंत्रत भारत की नींव रखी। 15 अगस्त हमें उन महान स्वतंत्रता सेनानियों और वीर शहीदों के त्याग, तपस्या और बलिदान का स्मरण कराता है, जिनके संघर्ष के कारण देश को आजादी मिली।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान में चिकित्सा व शिक्षा के साथ भारत की प्राचीन आयुर्वेद पंरपरा को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने आयुष मंत्रालय भारत सरकार के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा का मार्गदर्शन के लिए आभार व्यक्त किया। साथ ही, उन्होंने संस्थान के कुलपति प्रोफेसर (डॉ.) संजीव शर्मा, डीन प्रोफेसर गुलाब चंद पमनानी तथा डीन इंचार्ज प्रोफेसर सतीश गंधर्व का भी आभार जताया, जिनके कुशल नेतृत्व में संस्थान नई बुलंदियों को छू रहा है। वर्ष 2023 से लेकर अब तक संस्थान में डेढ़ लाख रोगी इलाज के लिए पहुंचे हैं, जिनका आयुर्वेद पर भरोसा बढ़ा रहा है।
उन्होंने कहा कि आयुर्वेद भारत तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पूरी दुनिया आयुर्वेद को अपना रही है। आयुष मंत्रालय भारत सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में आयुर्वेद को वैश्विक स्तर पर नई पहचान मिली है। उन्होंने संस्थान के चिकित्सकों व कर्मियों का आभार व्यक्त किया, जोकि आयुर्वेद पद्धति को आगे बढ़ाने में अपना योगदान दे रहे हैं। खासकर चिकित्सक न केवल आयुर्वेद पद्धति से रोगियों का सफल इलाज कर रहे हैं, बल्कि संस्थागत कार्यों में भी अपना महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।
उन्होंने संस्थान के चिकित्सकों, कर्मियों और विद्यार्थियों को आह्वान किया कि राष्ट्र की प्रगति और जनकल्याण के लिए अपनी जिम्मेदारियों का ईमानदारी और समर्पण के साथ निर्वहन करना चाहिए।
एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अनूप एम ने स्वतंत्रता दिवस समारोह के सफल आयोजन पर आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सभी चिकित्सकों, कर्मियों और विद्यार्थियों ने पूरी निष्ठा एवं एकजुटता के साथ अपना योगदान दिया। मंच का सफल संचालन संस्थान की छात्रा अनुष्का और कशिश ने किया। संस्थान के कर्मियों और विद्यार्थियों ने रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से देशभक्ति, राष्ट्रीय एकता और भारतीय संस्कृति की अद्भुत झलक प्रस्तुत की। प्रस्तुतियों ने पूरे वातावरण को देशप्रेम और उत्साह से भर दिया।
इस अवसर पर असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. समित मसंद असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. रितेश, असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. आकांक्षा राणा, असिस्टेंट प्रोफेसर पूजा हसन जी, असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. सुनीता यादव, असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. धवल मकवाना, असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अश्वति पी, असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. गरिमा गुप्ता, मेडिकल आफिसर डॉ. मानसी ग्रेवाल, मेडिकल आफिसर डॉ. शीन्षा पी, असिस्टेंट प्रोफेसर महेश एम, असिस्टेंट प्रोफेसर चंद्रमोहन, प्रशासनिक अधिकारी सतपाल ऐसवाल तथा लेखाकार दीपक राणा सहित बड़ी संख्या में संस्थान के कर्मी और विद्यार्थी मौजूद रहे।























