चंडीगढ़ सुनीता शास्त्री।चंडीगढ़ लिटरेरी सोसाइटी द्वारा आयोजित लिटराटी-2020 के दौरान दिन का विशेष सेशन अभिनेता आशीष विद्यार्थी और लेखिका सुपर्णा सरस्वति पुरी के बीच रहा। जहां आशीष ने अपने जीवन, अभिनय और माता पिता से जुड़ी दिलचस्प बात की। सुपर्णा ने उन्हें जीवन की चुनौतियों से जुड़ा पहला सवाल किया, तो आशीष ने कहा किमेरे लिए हर दिन नया होता है। जो मेरे लिए कुछ नया करने का एक मौका लाता है। इसके लिए ये नहीं सोचता कि मैं कौन हूं। मेरी क्या इमेज है। बस सुबह उठता हूं, कुछ अलग करने की सोचता हूं। मेरे लिए अनुभव बाद में होता है, पहले मौका होता है। मुझे जो भी जीवन में मौका मिला, उसे खुलकर जीया। चाहे वो फिल्म हो या जिंदगी। हिंदी के अलावा कई क्षेत्रीय भाषाओं में काम किया। कुछ फिल्म तो रिलीज भी नहीं हो पाई । क्षेत्रीय फिल्म में श्यामानंद जालान जैसे निर्देशकों के साथ काम करने का मौका मिला। कुत्ते की मौत फिल्म में सईद मिर्जा के साथ काम किया। वो फिल्म रिलीज नहीं हुई, मगर उनके साथ बातचीत और दोस्ती ने जीवन जीने की कला सिखाई। मेरे जीवन में एक ही रंज है कि मेरे पिता को मैं काफी देर से समझा। जब मैं बड़ा हो रहा था, तो उन्होंने चुप रहना शुरू कर दिया था। शायद उनके न बोले शब्द ही थे, जिसने मुझे कामयाब बनाया।आशीष के मोटीवेशनल स्पीकर बनने पर सुपर्णा ने पूछा तो उन्होंने कहा कि मैं खुद को मोटीवेशनल नहीं इग्नीशर मानता हूं। जो लोगों को रास्ता दिखाता है। दरअसल, अपने करियर के दौरान मैं कई लोगों को मिला जो काफी दुखी रहते थे। जबकि उनके पास सब कुछ था। मैं अपने मां बाबा को देखता था, जिनके पास ज्यादा पैसे नहीं होते थे, फिर भी वो खुश रहते थे। ऐसे में लगता है कि मैं भी उनकी तरह हूं, मगर लोगों को भी सुखी रहने की तरकीब सिखाता हूं। पुराने दिनों को याद करते हुए आशीष ने कहा कि एक बार मैं किसी को इंटरव्यू दे रहा था, इंटरव्यू के बाद एक पीआर मेरे पास आई और बोली कि आपको इंग्लिश भी आती है। दरअसल, मेरे किरदार की वजह से सबको लगता था कि मैं ज्यादा पढ़ा लिखा नहीं हूं।
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Posted by Surinder Verma on Wednesday, June 17, 2020


















