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Posted by Surinder Verma on Wednesday, June 17, 2020

डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी त्याग की मूर्र्ती थे :अरूण सूद

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चंडीगढ़, सुनीता शास्त्री भारतीय जनसंघ के संस्थापक स्व डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी की पुण्यतिथि पर भारतीय जनता पार्टी चंडीगढ़ढ़ प्रदेश द्वारा वर्चुअल रैली का आयोजन किया गया जिसमे पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, सांसद और चंडीगढ़ प्रदेश मामलों के प्रभारी प्रभात झा ने मुख्य वक्ता के रूप में भाग लिया ।इस रैली में प्रदेश अध्यक्ष अरुण सूद, राष्ट्रीय परिषद सदस्य संजय टंडन, प्रदेश महामंत्री चन्द्रशेखर और रामबीर भट्टी सहित सैंकड़ो की संख्या में लोगों ने इसमें भाग लिया।इस अवसर पर प्रदेशाध्यक्ष अरुण सूद ने डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी की प्रतिमा पर पुष्प सुमन अर्पित कर उन्हें श्रदांजलि व्यक्त की इस अवसर पर प्रदेशाध्यक्ष अरुण सूद ने उपस्थित सभी लोगों को सम्बोधित करते हुए कहा कि डॉ मुखर्जी त्याग की मूर्र्ती थे । उन्होंने अपने आदर्शों के चलते कभी भी प्रकार का लोभ नहीं रखा और जम्मू कश्मीर में दो प्रधान, दो विदान और दो निदान के खिलाफ अपनी आवाज़ संसद में भी उठाई और यहाँ तक की तत्कालीन प्रधानमंत्री स्व जवाहरलाल नेहरू की केबिनेट से भी इस्तीफा दे दिया था । आज ये उन्ही की शहीदी का परिणाम है कि जम्मू कश्मीर में मोदी सरकार ने साहसिक निर्णय लेते हुए वहां से धारा 370 और 35 ऐ को जड़ड़से उखाडफ़ेंका और वहां के लोगों के विकास के लिए नए किरितमान स्थापित किये । मोदी सरकार द्वारा किया गया साहसिक कार्य ही उनके लिए आज सच्ची श्रधांजलि है ।इस वर्चुअल रैली को संबोधित करते हुए प्रभारी प्रभात झा ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी किसी व्यक्ति विशेष की पार्टी न होकर एक आम व्यक्ति को भी उच्च पद पर बैठाती है । पार्टी में लोकतंत्र विध्यमान है । इसका आगातभी से हो गया था जब जनसंघ के संस्थापक स्व डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने देश के खिलाफ बनायी जाने वाली नीतियों को अस्वीकार करते हुए ऐसी राजनैतिक दल की स्थापनी की जो आज एक वट वृक्ष बन गया है । सिद्धांत आधारित पार्टी भारतीय जनता पार्टी अपनी विचारधारा के लिए सुप्रसिद्ध है । पार्टी के जो भी नेता हुए उन्होंने अपने पुरुषार्थ से इस पार्टी को सींचा और उसका ये परिणाम है की आज विश्व की सबसे बड़ी पार्टी बनी है । पार्टी के नेता उस समय कभी भी पद का लोभ न रखते हुए अपने आदर्शों के प्रति और पार्टी की निष्ठां के प्रति समर्पित थे, डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने भी एक निदान, एक विधान और एक प्रधान की अवधारणा को दृढ संकल्प लेते हुए जम्मू कश्मीर में जाकर इसका विरोध किया और गिरफ्तार हुए और वहीँ पर जेल में उनकी शहीदी हो गयी , इसके बाद अगर हम बात करें स्व पंडित दीन दयाल उपाध्याय जी फिर श्रद्धेय श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी की ये सभी भी त्याग की मूर्त थे , पार्टी को ऐसे ऐसे नेता प्राप्त हुए जो अपनी सादगी के साथ एक आदर्श समाज और कृतसंकलपी थे । स्वर्ग में बैठे डॉ श्यामा प्रसाद जी ने अपने सपने को साकार होने पर पुष्पवर्षा की हो और वो ऊपर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को और समूची भाजपा के सांसदो को आशीर्वाद दे रहे हो । यह जो भाजपा का सपना था , जो पार्टी के सतम्भो का सपना था आज इतने वर्षों बाद पूरा हो सका।