इस बैठक में गुरुग्राम एवं रेवाड़ी क्षेत्र के लगभग 10 प्रमुख औद्योगिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। प्रमुख रूप से प्रोग्रेसिव फेडरेशन ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (PFTI) के चेयरमैन दीपक मैनी, वाइस चेयरमैन डॉ. एस.पी. अग्रवाल, लेबर लॉ एडवाइजर एसोसिएशन गुरुग्राम के अध्यक्ष एडवोकेट आर. एल. शर्मा, मानेसर इंडस्ट्रीज वेलफेयर एसोसिएशन से राजेश गुप्ता, चैंबर ऑफ कॉमर्स के सचिव एस के आहूजा, कादीपुर इंडस्ट्रीज एसोसिएशन से श्रीपाल शर्मा, रेवाड़ी चैंबर ऑफ कॉमर्स से कृष्ण यादव, आईडीए सेक्टर-37 से सी.बी. सिंह, सोहना मेवात इंडस्ट्रीज एसोसिएशन से आर.पी. खटाना तथा चैंबर ऑफ इंडस्ट्रीज से अश्वनी शर्मा उपस्थित रहे।
श्रम विभाग की ओर से डिप्टी लेबर कमिश्नर नवीन शर्मा, सहायक श्रमायुक्त चंद्र पाल, श्री मनोज कुमार, अनिल शर्मा एवं पवन कुमार भी बैठक में मुख्य रूप से उपस्थित रहे।
बैठक के दौरान उद्योगपतियों ने राज्य सरकार द्वारा हाल ही में घोषित न्यूनतम वेतन की अनुपालन पर जोर दिया। प्रोग्रेसिव फेडरेशन ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (PFTI) के चेयरमैन श्री दीपक मैनी ने कहा कि एकमुश्त लगभग ₹4000/- की वृद्धि उद्योगों, विशेषकर एमएसएमई सेक्टर के लिए आर्थिक रूप से चुनौतीपूर्ण है। उन्होंने सुझाव दिया कि इस प्रकार की वृद्धि को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाना चाहिए, जिससे उद्योगों पर अचानक वित्तीय भार न पड़े और रोजगार पर प्रतिकूल प्रभाव न आए।
बैठक की अध्यक्षता करते हुए अतिरिक्त श्रमायुक्त डॉ. अनुराधा लम्बा ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार द्वारा न्यूनतम वेतन वृद्धि की अधिसूचना जारी की जा चुकी है, जिसे 1 अप्रैल 2026 से लागू किया जाना अनिवार्य है। उन्होंने सभी उद्योग प्रतिनिधियों से अपील की कि वे इस अधिसूचना का पूर्ण पालन सुनिश्चित करें तथा अपने-अपने क्षेत्रों में औद्योगिक शांति एवं आपसी समन्वय बनाए रखें।
बैठक में उपस्थित डिप्टी लेबर कमिश्नर नवीन शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित न्यूनतम वेतन में वृद्धि श्रमिकों के सामाजिक एवं आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह वृद्धि वर्तमान महंगाई एवं जीवनयापन की बढ़ती लागत को ध्यान में रखते हुए की गई है, जिससे श्रमिकों को बेहतर जीवन स्तर प्राप्त हो सके।
उन्होंने सभी उद्योग प्रतिनिधियों से अपील की कि वे सरकार द्वारा जारी अधिसूचना का समयबद्ध एवं पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित करें। साथ ही उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि श्रम विभाग उद्योगों की व्यावहारिक समस्याओं एवं सुझावों को गंभीरता से लेते हुए उन्हें उच्च स्तर पर अवगत कराएगा।
नवीन शर्मा ने आगे कहा कि श्रम विभाग का उद्देश्य श्रमिकों के हितों की रक्षा के साथ-साथ उद्योगों के साथ सकारात्मक समन्वय बनाए रखना है, ताकि प्रदेश में औद्योगिक शांति, उत्पादकता एवं विकास निरंतर बना रहे।
एडवोकेट आर. एल. शर्मा अध्यक्ष, लेबर लॉ एडवाइजर एसोसिएशन, गुरुग्राम ने कहा कि न्यूनतम वेतन में वृद्धि श्रमिकों के हित में एक महत्वपूर्ण कदम है, किन्तु इसके कार्यान्वयन के दौरान उद्योगों की व्यवहारिक कठिनाइयों को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार को उद्योगों के साथ निरंतर संवाद बनाए रखते हुए ऐसी नीतियां बनानी चाहिए जो श्रमिकों के कल्याण के साथ-साथ उद्योगों की स्थिरता और प्रतिस्पर्धात्मकता को भी सुनिश्चित करें।
उन्होंने आगे कहा कि औद्योगिक शांति और दोस्ताना माहौल बनाए रखने के लिए श्रम विभाग को उद्योगों और श्रमिकों के साथ नियमित रूप से बैठकें एवं संवाद स्थापित करना चाहिए, ताकि सभी पक्षों के बीच आपसी समझ और सहयोग को बढ़ावा मिल सके।
उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में एक संतुलित दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक है, जिससे श्रमिकों और उद्योगों के बीच सामंजस्य बना रहे और प्रदेश में औद्योगिक विकास की गति प्रभावित न हो।




















