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Posted by Surinder Verma on Wednesday, June 17, 2020

महामारी के चपेट में आकर अकाल मृत्यु को प्राप्त होने वाले पुलिस कर्मचारियों को दी जाने वाली राशि को 30 लाख रुपए से बढ़ाकर 50 लाख रुपए करने के साथ -साथ उसके परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने का प्रावधान भी किया जाए।

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पंचकूला 25- हरियाणा के पूर्व उपमुख्यमंत्री श्री चंद्रमोहन ने हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल खट्टर से मांग की है कि विश्वव्यापी कोरोना रुपी महामारी के चपेट में आकर अकाल मृत्यु को प्राप्त होने वाले पुलिस कर्मचारियों को दी जाने वाली राशि को 30 लाख रुपए से बढ़ाकर 50 लाख रुपए करने के साथ -साथ उसके परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने का प्रावधान भी किया जाए। ‌ उन्होंने कहा कि हरियाणा पुलिस के जवान कोविड के दौरान दिन रात सड़कों पर रह कर एक फ्रंटलाइन योद्धा की तरह ही जनता की सेवा कर रहे हैं। ऐसी कठिन परिस्थितियों में भी अपने घर और परिवार की चिंता किए बिना यह कर्मचारी 24 घंटे अपनी ड्यूटी पर तैनात रहते हैं ताकि प्रदेश में बेहतर कानून व्यवस्था को बनाए रखा जा सके।जिस प्रकार से सेना के नौजवान देश की सीमाओं के सजग प्रहरी बनकर देश की सुरक्षा कर रहे हैं ताकि देश के लोग सुख की नींद सो सकें। उसी तरह राज्य के लोगों की सुरक्षा का दायित्व भी हरियाणा की बहादुर पुलिस पर है। ‌
चन्द्र मोहन ने ,हरियाणा पुलिस के जवानों और अधिकारियों कि कर्तव्य परायता और सत्य निष्ठा का उल्लेख करते हुए कहा कि हरियाणा पुलिस के सिपाही से लेकर इन्स्पेक्टर रैंक तक को विशेष कोविड भत्ता प्रदान किया जाए ताकि वह और अधिक तत्परता से कार्य कर सकें। उन्होंने कहा कि पुलिस के इन कर्मचारियों और अधिकारियों ‌को फ्रंटलाइन यौद्धाओं की उपाधि देकर सम्मानित किया जाना चाहिए। ‌ उन्होंने मांग की है कि पुलिस में सिपाही की भर्ती की आयु में भी बढ़ोतरी की जाए। पिछले लगभग डेढ़ वर्ष से जो विकट परिस्थितियां देश और प्रदेश में चल रही हैं, उनको ध्यान में रखते हुए ही, पुलिस विभाग में सिपाही की भर्ती की आयु को भी 25 वर्ष से बढ़ाकर 27 वर्ष किया जाए , क्योंकि इन अपरिहार्य परिस्थितियों में जहां जीवन यापन करना दुष्कर हो रहा है, वहीं इन युवाओं को अभ्यास करने का मौका भी नहीं मिला है। इस लिए इस विकट समस्या को ध्यान में रखते हुए ही भर्ती की आयु बढ़ाने का निर्णय लिया जाए ताकि उन युवाओं के उज्जवल भविष्य को बचाया जा सके, जो परिस्थितियों के विवश होकर अपने आप को असहाय महसूस कर रहे हैं।