पंचकूला 27 मई- हरियाणा के पूर्व उपमुख्यमंत्री श्री चंद्रमोहन ने कहा कि देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू आधुनिक भारत के निर्माता थे, जिन्होंने देश के विकास को एक नया आयाम देने के साथ साथ ,देश में लोकतंत्र की मजबूती के लिए काम करते हुए विदेशों में भी भारत की प्रतिष्ठा को चार चांद लगाए। आज पंडित जवाहरलाल नेहरू को उनकी पुण्यतिथि पर अपने भावभीने श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए चन्द्र मोहन ने कहा कि पंडित नेहरू की देश भक्ति और उनके देश के प्रति असीम प्रेम ने उन्हें मानव से महामानव बना दिया। देश प्रेम की उत्कट भावना से अभिप्रेरित होकर ही उन्होंने सभी राजसी ठाट-बाट का परित्याग करके राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के नेतृत्व देश की आजादी रुपी महायज्ञ में भाग लिया और देश की आन-बान और शान को बनाए रखने के लिए ही देश की विभिन्न जेलों में 3259 दिन जेल कांटी, लेकिन देश प्रेम की लौ को उन्होंने कभी भी कुन्द नहीं होने दिया। उन्होंने कहा कि देश ने 15 अगस्त 1947 को आजादी का नया सवेरा देखा और पंडित जवाहरलाल नेहरू देश के पहले प्रधानमंत्री बने तथा उन्होंने देश से गरीबी और अशिक्षा को दूर करने का संकल्प लिया और देश के सर्वांगीण विकास की परिकल्पना को मूर्त रूप देने के लिए ही उन्होंने पंचवर्षीय योजना बनाने के साथ साथ ही, योजना आयोग का भी गठन किया गया ताकि देश का सन्तुलित और समग्र विकास सुनिश्चित हो सके। चन्द्र मोहन ने कहा कि पंडित नेहरू शिक्षा के महत्व को भली-भांति समझते थे और यही कारण था कि उन्होंने देश में अनेक विश्विद्यालयों, भारतीय प्राधौगिक संस्थान एवं भारतीय प्रबंधन संस्थानों की स्थापना करवाई ताकि देश का युवा पढ़ लिख कर अपनी प्रतिभा के बल पर विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में नए नए कीर्तिमान स्थापित करके देश का नाम विदेशों में गौरवान्वित कर सके। इन संस्थानों को वह शिक्षा का मन्दिर मानते थे। उन्होंने कहा कि पंडित जवाहरलाल नेहरू की सोच बड़ी सकारात्मक थी और खेती के विकास के लिए उन्होंने बड़े -बड़े बांध और डैम बनाने की परिकल्पना को मूर्त रूप दिया और भाखड़ा नंगल डैम को 22 अक्टूबर 1963 को देश को समर्पित किया , जिससे पंजाब और हरियाणा तथा राजस्थान के लोगों की तकदीर ही बदल गई, इससे न केवल सिंचाई के जल उपलब्ध हुआ अपितु पर्याप्त मात्रा में बिजली भी मिलने लगी और इसका परिणाम यह हुआ कि वह देश जो विदेशों से पेट भरने के लिए अनाज मंगवाता था, नेहरू की दूरदर्शिता का ही परिणाम है कि आज देश के किसान जरूरत से ज्यादा अनाज पैदा कर रहे हैं। नेहरू भाखड़ा बांध को किसानों की जीवन रेखा मानते और यही कारण है कि वह एक मात्र देश के पहले प्रधानमंत्री थे , जो प्रधानमंत्री होते हुए भी इस परियोजना को 13 बार देखने गए । चन्द्र मोहन ने कहा आज भारतीय जनता पार्टी को पंडित नेहरू से सीख लेने की जरूरत है, जिन्होंने अपने राजनैतिक प्रतिद्वंद्वी को भी देश के विकास में भागीदार बनाया और इसका सबसे बड़ा उदाहरण पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई रहें हैं। नेहरू ने प्रधानमंत्री होते हुए देश का संयुक्त राष्ट्र संघ में प्रतिनिधित्व करने के लिए वाजपेई को भेजा था जो उनके उदार हृदय का परिचायक था। उन्होंने हरियाणा सरकार को सुझाव दिया कि आज कोविड जैसी विश्वव्यापी महामारी में भाजपा को नेहरू से सबक सिखते हुए ही विपक्षी दलों के नेताओं को साथ लेकर और एक जुट होकर ही इस अदृश्य राक्षस का मुकाबला किया जा सकता है । *****************
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Posted by Surinder Verma on Wednesday, June 17, 2020
























