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Posted by Surinder Verma on Wednesday, June 17, 2020

स्कूली बच्चों के लिए फिर से खुला गांधी स्मारक भवन सेक्टर 16 का गांधी म्यूजियम अबः देवराज त्यागी, सचिव गांधी स्मारक निधि चंडीगढ़

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स्कूली बच्चों के लिए फिर से खुला गांधी स्मारक भवन सेक्टर 16 का गांधी म्यूजियम अबः देवराज त्यागी, सचिव गांधी स्मारक निधि चंडीगढ़

चंडीगढ़, 18 अक्तूबरः गांधी स्मारक भवन सेक्टर 16 का गांधी म्यूजियम अब फिर से सभी स्कूलों के बच्चों के लिए खुल गया है, इसकी जानकारी गांधी स्मारक निधि चंडीगढ़ के सचिव देवराज त्यागी ने दी।

पत्रकारों से खास बातचीत में उन्होंने बताया कि पिछले ढाई सालों से कोरोना बीमारी के प्रकोप के चलते उक्त म्यूजियम को स्कूली बच्चों के लिए खास तौर पर बंद रखा हुआ था मगर अब जबकि कोरोना बीमारी का प्रकोप खत्म होने को है तो गांधी स्मारक निधि चंडीगढ़ के प्रबंधन ने यह फैसला लिया है कि इसे सभी स्कूलों के बच्चों के लिए खोल दिया जाये ताकि वे राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी के जीवन को करीब से समझ सकें और उनकी शिक्षाओं और विचारधाराओं को अपने जीवन में उतार कर राष्ट्र निर्माण में अपना अहम योगदान दे सकें।

याद रहे गांधी स्मारक भवन सेक्टर 16 के गांधी म्यूजियम में कई एसी खास बातें हैं जो पूरे उत्तर भारत में और कहीं देखने को नहीं मिलतीं। यहां गांधी जी के जीवन के हर पहलू से जुड़ी यादों को खास तौर पर संजो कर रखा गया है। यहां बापू गांधी जी की आवाज आज भी गूंजती है। यह आवाज महात्मा गांधी जी द्वारा बिरला सदन नई दिल्ली में 11 जून 1947 में आयोजित हुए मिलन समारोह में दिए गए भाषण की है। इसमें बापू लोगों को संबोधित करते हुए कहते हैं, ”जो आदमी खुदा से डरता है उसे किसी से डरने की जरूरत नहीं।”

यहां गांधी स्मारक भवन सेक्टर-16 के अंदर स्थापित म्यूजियम के मुख्य गेट पर एक टेलीफोन रखा है। यह टेलीफोन उसी तरह का है जो कि पुराने समय में होते थे, जिनमें सिक्का डालने के बाद नंबर डायल होते थे। इस टेलीफोन का रिसीवर उठाएं और एक सिक्का डालकर बापू का 22 मिनट 46 सेकेंड का भाषण हिंदी और अंग्रेजी में सुन सकते है।

बापू का चरखा करता है यहां सब का स्वागत

स्वदेशी का नारा देते हुए बापू ने खादी और चरखा को प्रोत्साहित किया था। बापू के बनाए म्यूजियम में अलग-अलग चरखे रखे हुए हैं, जिसमें बापू के जीवन के सिद्धांतों को भी पेश किया गया है। इसके अलावा म्यूजियम के अंदर जेल है। यह जेल ठीक उसी प्रकार है जैसी जेलों में संघर्ष के दौरान बापू रहकर आए थे।

खड़ाऊं व मटका भी है यहां पर

म्यूजियम के अंदर बापू के पैरों की खड़ाऊं, पानी पीने के लिए इस्तेमाल होने वाले मिट्टी के मटके को भी रखा गया है। इसी प्रकार से बापू के जीवन से जुड़े विभिन्न और विचारों को ठीक उसी तरह से डिस्प्ले किया गया है जैसे वह साक्षात दिख रहे हों।

बापू की डाक टिकट भी म्यूजिम में

बापू की तस्वीर वाले डाक टिकट को भारत सरकार ने लंबे समय तक इस्तेमाल किया है। बापू की तस्वीर वाले हर टिकट को म्यूजियम में सहेजा गया है, जिसमें भारत सरकार द्वारा जारी डेट को भी पेश किया गया है।

खास आकृषण का केंद्र है ‘गांधी जी की जेल’

यहां म्यूजियम में स्थापित ‘गांधी जी की जेल’ का एक अल्ग आकृषण है । इसे पूर्ण रूप से जेल का रूप दिया गया है। इसमें गांधीजी कुर्सी पर बैठे हैं। उनके सामने एक टेबल है। गांधी स्मारक भवन में प्रवेश करते ही गांधीजी की भव्य प्रतिमा मिलेगी और म्यूजियम में प्रवेश करने से पहले ही दीवार पर दांडी यात्रा का सीन और उसका रूट अंकित है। म्यूजियम के अंदर एक भाग में दांडी यात्रा के दौरान नमक बनाने के सीन की मूर्ति के अलावा चरखा कातते हुए दिखाई देगी। जेल के बाहर उनके पूर्ण जेल जीवन का विवरण दिया गया है।

गौरतलब है कि गांधी स्मारक भवन सेक्टर 16 का गांधी म्यूजियम सभी स्कूली बच्चों के लिए पूरी तरह से फ्री है यहां पर इसे देखने के लिए कोई फीस नहीं ली जाती। इतना ही नहीं यहां पर गांधी जी के जीवन पर फिल्में भी दिखाई जाती हैं। गांधी स्मारक निधि चंडीगढ़ के सचिव देवराज त्यागी ने यह भी बताया कि वे जल्द ही नगर प्रशासन चंडीगढ़ तथा हरियाणा और पंजाब राज्यों की सरकारों के शिक्षा विभागों को खास तौर पर पत्र लिख रहे हैं ताकि वे अपने सरकारी स्कूलों के बच्चों को यहां गांधी स्मारक भवन में गांधी म्यूजियम देखने के लिए भेजें और वे अपने राष्ट्रपिता की शिक्षाओं को अपने जीवन में अपना सकें।