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Posted by Surinder Verma on Wednesday, June 17, 2020

पहला आर्थ्रोस्कोपी सम्मेलन चण्डीगढ़ आर्थोस्कोपी कॉन्फ्रेंस एंड रिहैब कोर्स 2023 आयोजित आर्थोस्कोपी और स्पोर्ट्स मेडिसिन के बारे में जागरूक करने के लिए एक पहल

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पहला आर्थ्रोस्कोपी सम्मेलन चण्डीगढ़ आर्थोस्कोपी कॉन्फ्रेंस एंड रिहैब कोर्स 2023 आयोजित
आर्थोस्कोपी और स्पोर्ट्स मेडिसिन के बारे में जागरूक करने के लिए एक पहल
 

चण्डीगढ़ :  उत्तर भारत में पहली बारओईआरटी (ऑर्थेपेडिक एजुकेशन रिसर्च एंड ट्रस्ट) चण्डीगढ़ ने एक विशेष आर्थ्रोस्कोपी सम्मेलन सीएसीआरसी 2023 (चण्डीगढ़ आर्थोस्कोपी कॉन्फ्रेंस एंड रिहैब कोर्स) आयोजित किया। आर्थ्रोस्कोपी के क्षेत्र में प्रतिष्ठित और प्रसिद्ध विशेषज्ञों डॉ. एमएस ढिल्लों (एचओडी पीजीआई), डॉ. सुधीर गर्ग (एचओडी जीएमसीएच 32) और डॉ. रवि गुप्ता (सीनियर कंसल्टेंट फोर्टिस मोहाली) की उपस्थिति में ये कार्यक्रम हुआ। चण्डीगढ़ के अलावा, मुंबई, अमृतसर, बंगलौर, कोयम्बटूर, राजस्थान, जम्मू, कोलकाता, बिहार, झारखंड और छत्तीसगढ़ के 300 से अधिक डॉक्टरों और चिकित्सा पेशेवरों ने इस दो दिवसीय सम्मेलन में भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान सात लाइव सर्जरी, ग्यारह व्याख्यान सह पैनल चर्चा और नौ कार्यशाला आयोजित की गईं। देश भर के सभी विशेषज्ञों ने कॉन्फ्रेंस के दौरान आयोजित विभिन्न सत्रों में अपने अनुभव साझा किए और लाइव सर्जरी की।
क्षेत्र के प्रमुख आर्थोपेडिक सर्जन – डॉ. सिद्धार्थ अग्रवाल और डॉ. इंदरदीप सिंह ने उत्तरी भारत में इस आर्थोस्कोपी सम्मेलन के आयोजन की पहल की है। डॉ. सिद्धार्थ अग्रवाल ने कहा, जैसा कि हम जानते हैं कि आर्थोस्कोपी मिनिमली इनवेसिव कीहोल सर्जरी है। इसमें खिलाड़ियों को चोट के बाद भी फिट होने और मैदान में खेलना जारी रखने में मदद मिलेगी। कई बार चोट लगने के बाद किसी खिलाड़ी का करियर समाप्त हो जाता है लेकिन इस तकनीक और उचित रिहैब से खिलाड़ी के लिए मैदान पर वापस आना संभव है। वहीं डॉ. इंदर ने कहा, स्पोर्ट्स मेडिसिन और आर्थ्रोस्कोपी के क्षेत्र में विशेषज्ञ डॉक्टर कम हैं। संस्था ने ने देश भर के डॉक्टरों से मिलने और नियमित और आर्थोपेडिक सर्जन को शिक्षित करने की कोशिश की है ताकि वे अंततः रोगी देखभाल में शामिल हो।
साथ ही, विशेषज्ञों ने कहा कि इस तरह के आयोजन समय की आवश्यकता है और इसलिए उभरते सर्जनों को प्रशिक्षित करने के लिए इसे नियमित अंतराल पर आयोजित किया जाना चाहिए।