प्रस्ताव तैयार करें: अपने इलाके के पार्षद (Councillor)
के माध्यम से नगर निगम (Municipal Corporation) को एक लिखित प्रस्ताव दे
निगम की बैठक में पारित: यह प्रस्ताव नगर निगम की आम हाउस मीटिंग (House Meeting) में रखा जाए वहां उपस्थित पार्षदों के बहुमत से इसे पारित किया जाना आवश्यक है
राज्य सरकार की मंजूरी: निगम द्वारा पास किया गया प्रस्ताव हरियाणा के शहरी स्थानीय निकाय विभाग (Urban Local Bodies Department) के पास अंतिम मंजूरी के लिए भेजा जाए रतन लाल कटारिया (19 दिसंबर 1951 – 18 मई 2023) हरियाणा के दिग्गज बीजेपी नेता और अंबाला से तीन बार सांसद रहे थे। उन्होंने मोदी सरकार में केंद्रीय जल शक्ति और सामाजिक न्याय राज्य मंत्री के रूप में कार्य किया था। उनका अंतिम संस्कार पंचकूला के सेक्टर 25 स्थित श्मशान घाट में पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया गया था| वह 50 वर्षों से RSS से जुड़े हुए थे।
राजनीतिक सफर
मई 2019 में उन्हें केंद्रीय जल शक्ति व सामाजिक न्याय अधिकारिता मंत्री बनाया गया। कटारिया 1985 में रादौर विधानसभा से विधायक रहे। व राज्यसव मन्त्री भी रहे इसके अलावा रतन लाल हरियाणा सरकार में रेवेन्यू मिनिस्टर और 1996 वेयर हाउसिंग कॉर्पोरेशन के चेयरमैन रहे।
रतन लाल कटारिया 13 वर्ष की आयु में बाल कलाकार के रूप में प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरु से सम्मानित हुए। उनका एक बेटा और 2 बेटी हैं।
संसदीय क्षेत्र: उन्होंने हरियाणा की अंबाला लोकसभा (आरक्षित) सीट का प्रतिनिधित्व किया।
सांसद कार्यकाल: वह 1999, 2014 और 2019 में लोकसभा के लिए चुने गए।
इसके अलावा, 2000 से 2003 तक वे हरियाणा बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष थे|
व्यक्तिगत जीवन
शिक्षा: उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में एम.ए. और एल.एल.बी. की डिग्री हासिल की थी।
निधन: लंबी बीमारी के बाद 18 मई 2023 को 72 वर्ष की आयु में चंडीगढ़ के पीजीआई (PGI) अस्पताल में उनका निधन हो गया।
भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने हरियाणा की अंबाला लोकसभा सीट से बंतो कटारिया को प्रत्याशी घोषित कर पूर्व सांसद स्वर्गीय रतन लाल कटारिया की अंतिम इच्छा पूरी की है। रतन लाल जी चाहते थे कि उनकी पत्नी को अंबाला से टिकट मिले। उनके निधन के बाद से बंतो कटारिया ही उनकी राजनीतिक विरासत को संभाले हुए है
उम्मीदवारी: वे पूर्व केंद्रीय मंत्री और दिवंगत सांसद रतन लाल कटारिया की पत्नी हैं। उनके निधन के बाद भाजपा ने उनकी राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाते हुए बंतो कटारिया को अंबाला से टिकट दिया था
परिणाम: इस चुनाव में उन्हें कांग्रेस उम्मीदवार के हाथों हार का सामना करना पडा पर आज भी पुरी तरह सक्रिय है लोगों के काम भी करती है समाज सेवा भी करती हैं | 1980 से भाजपा से जुड़ी हुई हैं बंतो बंतो कटारिया का जन्म 4 मई 1964 में घरौंडा में हुआ। परिवार शुरू से ही जनसंघ से जुड़ा है। शादी के वक्त केवल मैट्रिक तक ही शिक्षा ग्रहण की हुई थी। शादी के बाद परिवार के सहयोग और अपनी लगन से BA, MA, LLB तक की शिक्षा ग्रहण की। बंतो ने कुछ समय तक हरियाणा उच्च न्यायालय में वकालत भी की।
कुछ पुरानी यादें
एक बार में ( हेमंत किगरं) पुर्व केंद्रीय मंत्री स्वर्गीय श्री रत्न लाल कटारिया जी से उन के घर में किसी काम से मिलने गया तो मुझे कह रहे थे मुझे दिल्ली शताब्दी में जाना है रास्ते में गाड़ी बात कर लेंगे मुझे स्टेशन म पर भी छोड़ देना मैंने कहा ठिक है वैसे मेरे पास ही ईनका घर है उस समय बंतो कटारिया जी भी घर पर ही थी यह बहुत पुरानी बात है
बंतो कटारिया 1980 से भाजपा की सदस्य हैं और मंडल अध्यक्ष से लेकर प्रदेश उपाध्यक्ष तक की जिम्मेदारी संभाल चुकी हैं कुछ माह से प्रदेश भाजपा की उपाध्यक्ष भी हैं।


























