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Posted by Surinder Verma on Wednesday, June 17, 2020

हरियाणा के राज्यपाल ने पाठ्यक्रम को उद्योग की ज़रूरतों के अनुरूप बनाने का किया आह्वान छात्र नौकरी मांगने वाले नहीं, बल्कि नौकरी देने वाले बनें – प्रो. असीम कुमार घोष

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चंडीगढ़, 30 अप्रैल – हरियाणा के राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष ने राज्य के शैक्षणिक संस्थानों से अपने पाठ्यक्रमों को उद्योग की आवश्यकताओं और उभरती तकनीकों के अनुरूप ढालने का आह्वान करते हुए कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल विद्वान तैयार करना नहीं, बल्कि ऐसे नवप्रवर्तक और उद्यमी विकसित करना होना चाहिए, जो हरियाणा के परिवर्तन को गति दें। उन्होंने कहा कि हमारे छात्र नौकरी मांगने वाले नहीं, बल्कि नौकरी देने वाले बनें।

राज्यपाल आज पंचकूला में ‘स्टेट सपोर्ट मिशन’ और ‘स्वर्ण जयंती हरियाणा इंस्टीट्यूट फॉर फिस्कल मैनेजमेंट’द्वारा आयोजित एक उच्च-स्तरीय कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस कार्यक्रम का उद्देश्य हरियाणा में औद्योगिक नवाचार को सुदृढ़ करना, राज्य की विरासत का संरक्षण करना तथा शिक्षा प्रशासन में सुधार लाने हेतु प्रमुख रणनीतिक पहलों को प्रस्तुत करना था। इस अवसर पर हरियाणा की प्रथम महिला श्रीमती मित्रा घोष भी उपस्थित रहीं।

अपने संबोधन में प्रो. असीम कुमार घोष ने कहा कि हरियाणा में एक अग्रणी ज्ञान और नवाचार केंद्र के रूप में उभरने की अपार संभावनाएं हैं, और इस प्रकार की पहलें उस दिशा में मजबूत आधार तैयार करती हैं। उन्होंने कहा कि “समर्थ हरियाणा” केवल एक नारा नहीं, बल्कि एक मार्गदर्शक दर्शन है, जिसका उद्देश्य नवाचार, सहयोग और ज्ञान-आधारित प्रशासन के माध्यम से आकांक्षाओं को उपलब्धियों में परिवर्तित करना है।

उन्होंने कहा कि प्रगति अलग-थलग प्रयासों से नहीं, बल्कि सामूहिक सहयोग से हासिल होती है। राज्यपाल ने नीति, प्रौद्योगिकी, शिक्षा और उद्योग के बीच समन्वित प्रयासों का आह्वान करते हुए एक सशक्त “समर्थ हरियाणा” के निर्माण पर बल दिया। उन्होंने ‘स्टेट सपोर्ट मिशन’ और स्वर्ण जयंती हरियाणा इंस्टीट्यूट फॉर फिस्कल मैनेजमेंट को दूरदर्शी पहलों की संकल्पना और उनके सफल क्रियान्वयन के लिए बधाई दी, जो नवाचार को बढ़ावा देने, प्रशासन को सुदृढ़ करने और समावेशी व सतत विकास के लक्ष्य को आगे बढ़ाने में सहायक हैं।

कार्यक्रम के दौरान ‘राष्ट्रीय शिक्षा मूल्यांकन एवं सत्यापन’ (एनइइवी ) पोर्टल का लाइव प्रदर्शन किया गया। यह पोर्टल ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति’ 2020 के क्रियान्वयन की निगरानी के लिए एक व्यापक, डेटा-आधारित मंच है। इसके माध्यम से उच्च शिक्षा संस्थानों में वास्तविक समय में डेटा संकलन, प्रदर्शन मानकीकरण और विश्लेषण-आधारित निर्णय लेने की सुविधा उपलब्ध होती है, जिससे शिक्षा क्षेत्र में पारदर्शिता, जवाबदेही और प्रशासनिक दक्षता में सुधार होता है।

कार्यक्रम की शुरुआत में स्वर्ण जयंती हरियाणा इंस्टीट्यूट फॉर फिस्कल मैनेजमेंट के महानिदेशक डॉ. राज नेहरू ने मुख्य अतिथि का स्वागत किया तथा संस्थान की गतिविधियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि यह संस्थान प्रौद्योगिकी और सहयोग के माध्यम से उद्योग, शिक्षा जगत, विरासत संरक्षण और शिक्षा प्रशासन को एकीकृत कर समावेशी विकास के लिए एक बेहतर मॉडल विकसित कर रहा है।

इस अवसर पर हरियाणा राज्य उच्च शिक्षा परिषद के अध्यक्ष प्रो. के.सी. शर्मा, उच्च शिक्षा के महानिदेशक एस. नारायणन, राज्यपाल के एडीसी धीरज कुमार, पंजाब विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. रेणु विग सहित कई कुलपति, उद्योग जगत के प्रतिनिधि और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।