सावित्रीबाई फुले महिला शिक्षा व महिला सशक्तिकरण की महान प्रणेता
श्री बंडारू दत्तात्रेय
माननीय राज्यपाल, हरियाणा
यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः ।
यत्रैतास्तु न पूज्यन्ते सर्वास्तत्राफलाः क्रियाः ।।
जहाँ नारी का सम्मान होता है, वहां देवताओं का वास होता है। जहां नारी का सम्मान नहीं होता वहां सभी कार्य निष्फल हो जाते हैं और वह देश और समाज तरक्की नहीं करता। इसी श्लोक से प्रेरणा पाकर सावित्रीबाई फुले ने अपने पति महात्मा ज्योतिबा फुले के साथ मिलकर अस्पृश्यता, आधिपत्य, जातिवादी व्यवस्था, समाज विरोधी व यथास्थितिवादी ताकतों के खिलाफ बहादुरी से लड़ाई लड़ कर महिलाओं की शिक्षा के लिए क्रान्तिकारी अभियान शुरू किया। जिसकी बदौलत महिलाओं को चुल्हा चैका से आगे निकल कर पढ़ने का अवसर मिला।
उन्होंने समाज के कमजोर वर्गों की लड़कियों, विशेष रूप से पिछड़े, अनुसूचित जातियों और जनजातियों की लड़कियों को शिक्षा की चोखट तक पहुंचाया। उनके लिए स्कूल खोले और ऐसे समय में लाखों लोगों के जीवन में शिक्षा के रूप में आशा की किरण जगाई जब स्कूलों में जाना तो दूर की बात जबकि कोसों तक स्कूल ही नहीं थे।
वास्तव में यह भारतीय समाज में महिलाओं के समग्र सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम था। सावित्रीबाई फुले, जो नारी शक्ति की प्रतीक हैं और नारी सशक्तिकरण की महान क्रांति की अग्रदूत बनी। नारी सशक्तिकरण का विषय अब केंद्र और राज्य सरकारों का मुख्य केंद्र बन गया है। इसका श्रेय भारत की पहली महिला शिक्षिका सावित्रीबाई फुले को जाता है। आज हम उनकी जयंती पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं।
आज महिला सशक्तिकरण व समाज सुधार का अभियान और अधिक प्रासंगिक हो गया है क्योंकि हम एक नए भारत – ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ का निर्माण कर रहे हैं, जिसे सावित्रीबाई फुले के दृष्टिकोण को लागू किए बिना पूरा नहीं किया जा सकता है। गरीबों में से सबसे गरीब लोगों की सेवा करने की उनकी प्रतिबद्धता थी। सवित्रीबाई फुले ने छुआ-छूत, अस्पृश्यता के कारण सामाजिक रूप से पिछड़ी , वचित महिलाओं का जीवन स्तर उपर उठाने के उद्देश्य से शिक्षा की अलख जगाई। उनके महिला शिक्षा के अभियान को आगे बढ़ाते हुए भारतीय संविधान में भी समानता, न्याय, बन्धुत्व और स्वतंत्रता को परिलक्षित किया गया है।
वर्तमान में गरीब महिलाओं के उत्थान के लिए हर संभव सकारात्मक उपायों सहित विशेष प्रयास शुरू किए जा रहे हैं। इसी दिशा में बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान (बीबीबीपीए) एक वरदान साबित हो रहा है। बाल लिंगानुपात में सुधार पर इसका बहुत सकारात्मक प्रभाव पड़ा है। स्वास्थ्य प्रबंधन सूचना प्रणाली की नवीनतम उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रीय स्तर पर 2014-15 में 918 के मुकाबले 2020-21 में 937 तक पहुंच गया है। हरियाणा में यह आंकड़ा 927 है।
हमारी बेटियाँ बहुत कुशल व प्रतिभाशाली है। अगर उन्हें सही प्रकार से मार्गदर्शन व उचित पटल प्रदान किया जाए, तो वे जीवन में नई उचांइयों को छू सकती हैं। साथ ही समाज और देश की तरक्की में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकती हैं। भारत की कुछ महान महिला इंदिरा गांधी, सुषमा स्वराज, निर्मला सीतारमण, जे जयललिता, आनंदी गोपाल जोशी, जो महिलाओं के लिए रोल मॉडल हैं। भारत की पहली महिला न्यायाधीश न्यायमूर्ति अन्ना चांडी, अंतरिक्ष में जाने वाली पहली भारत की बेटी कल्पना चावला तथा अबला बोस व अन्य महिलाएं शिक्षा की उन्नति में किए गए उनके प्रयासों के लिए जानी जाती हैं। महिलाओं के श्रम अधिकारों के लिए लड़ने वाली सामाजिक कार्यकर्ता अनसूया साराभाई, 1959 में इंग्लिश चैनल को तैर कर पार करने वाली पहली भारतीय और एशियाई महिला आरती साहा, बैडमिंटन खिलाड़ी साइना नेहवाल, पी.वी सिंधु, भारोत्तोलक कर्णम मल्लेश्वरी बहुत ऐसे नाम है जिन्होंने अपने-अपने क्षेत्रों में देश का नाम रोशन किया है।
हरियाणा की बात की जाए तो यहां महिला प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। भारतीय महिला हॉकी टीम की कप्तान रानी रामपाल, पहलवान गीतिका जाखड़, एथलीट दीपा मलिक, फ्रीस्टाइल पहलवान साक्षी मलिक, फोगाट बहनें अंतरराष्ट्रीय स्वर्ण पदक विजेता भारतीय डिस्कस थ्रोअर कृष्णा पूनिया, पेशेवर ओलंपिक शॉट पुटर मनप्रीत कौर और दो बार माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने वाली और कांगशुंग फेस से माउंट एवरेस्ट पर सफलतापूर्वक चढ़ाई करने वाली संतोष यादव दुनिया की पहली महिला है।
मैं जो बताने की कोशिश कर रहा हूं वह यह है कि हमें महिलाओं की प्रतिभा को कम नहीं आंकना चाहिए। उनमें कौशल, कला, प्रबंधन और एकाग्रता, अनुशासन और नेतृत्व के दृढ़ संकल्प के साथ कई मोर्चों पर नेतृत्व करने की एक बड़ी क्षमता है। जरूरत है एक ऐसे पटल की, जो बिना किसी भेदभाव के उन्हें प्रोत्साहित करे। आज हमारे पास पांच महिलाओं के नेतृत्व वाले स्टार्टअप हैं जिन्होंने यूनिकॉर्न क्लब में प्रवेश किया है। उपासना टाकू के नेतृत्व वाले डिजिटल भुगतान समाधान मोबि-विक, रुचि दीपक का एको बीमा, रुचि कालरा की ऑफ बिजनेस और गजल अलघ के मामार्थ है। छवीं आर्थिक गणना के अनुसार, हमारे पास देश में इस समय 8.05 मिलियन महिला उद्यमी हैं।
यह खुशी की बात है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में कई पहल की हैं। महिला उद्यमिता मंच स्थापित करना नीति आयोग की प्रमुख पहल है, जो महिला उद्यमियों के लिए अपनी तरह का एक एकीकृत सूचना पोर्टल है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में भी सामाजिक और आर्थिक रूप से वंचित वर्गों पर विशेष जोर देने के साथ-साथ सभी छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए लैंगिक समानता को प्राथमिकता दी गई है। स्वच्छ विद्यालय मिशन के तहत, सभी स्कूलों में लड़कियों के लिए शौचालय बनाए गए हैं। लड़कियों के लिए शौचालयों की कमी ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों में नामांकन बढ़ाने में एक बड़ी बाधा रही है। महिलाओं के बेहतर स्वास्थ्य के लिए देश में प्रधान मंत्री उज्ज्वला योजना (पीएमयूवाई) की शुरूआत की गई जिससे जलाउ लकड़ी के धुंए से छुटकारा मिलेगा। साथ ही समय की बचत होगी ।
देश में यह योजना सफल साबित हुई है और अक्टूबर, 2021 तक प्रधान मंत्री उज्ज्वला योजना के तहत कुल 8.48 करोड़ से अधिक क्नैकशन जारी किए गए हैं। इसी प्रकार, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत, अब तक, 77 करोड़ महिलाओं को 70 लाख स्वयं सहायता समूहों में शामिल करने के साथ 6768 ब्लॉकों को कार्यक्रम के तहत कवर किया गया है। एसएचजी को प्रारंभिक पूंजीकरण सहायता प्रदान करने से लेकर सालाना लगभग 80,000 करोड़ रुपये का ऋण दिया जा रहा है। इसके साथ-साथ उन्हें अपने उत्पादों के बेचने के लिए भी सुविधाएं प्रदान की जा रहा है।
महिलाओं को सशक्त बनाने व सामाजिक, आर्थिक दशा सुधारने में तीन तलाक, तत्काल तलाक को एक आपराधिक कानून बनाना और लड़कियों की शादी की उम्र को बढ़ाकर 21 वर्ष करना एक मील का पत्थर है। ये प्रगतिशील कदम सावित्रीबाई फुले के विचारों व अभियान के अनुरूप हैं।
मैं यहां एक तथ्य साझा कर रहा हूँ, पिछले दिनों कुलाधिपति के रूप में, मुझे एक विश्वविद्यालय में दीक्षांत समारोह में जाने का मौका मिला जहां 42 स्वर्ण पदक विजेताओं को सम्मानित किया गया, जिनमें से 36 लड़कियां थीं। यह एक सकारात्मक संकेत है। महिलाएं हर क्षेत्र में आगे आ रही हैं और उन्हें प्रोत्साहित किया जा रहा है। समाज के कमजोर वर्गों और ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को दूसरों के बराबर लाने के लिए हमें बहुआयामी दृष्टिकोण अपनाकर और ज्यादा प्रतिबद्धता से कार्य करना ही सच्चे अर्थों में सावित्रीबाई फुले को सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
सावित्रीबाई फुले द्वारा महिला सशक्तिकरण के लिए दिखाए गए मार्ग का अनुसरण सभी को अपने सच्चे मन, आत्मा और भावना से करना चाहिए। उन्होंने हर तरह से महिलाओं के लिए समानता के लिए लड़ाई लड़ी। सामाजिक सुधारों की उनकी सोच शिक्षा और महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण से जुड़ी हुई है। आज लड़कियों के प्रति हमारी सोच बदल गई है। पहले कन्या को बोझ के रूप में देखा जाता था लेकिन अब महालक्ष्मी के रूप में। यह एक अच्छा शगुन है। आइए हम समावेशी विकास के लक्ष्य को साकार करने और आगे बढ़ाने के लिए सावित्रीबाई फुले की कल्पना के अनुसार महिलाओं के सर्वांगीण विकास के लिए कड़ी मेहनत करें।
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Posted by Surinder Verma on Wednesday, June 17, 2020
























