चण्डीगढ़, 12 नवंबर। देश में केन्द्र व राज्य सरकारों ने आत्मनिर्भर-भारत, स्टैंड-अप इंडिया और स्टार्ट-अप इंडिया जैसे कार्यकर्मों की बदौलत कोरोना संकट को अवसर में बदला है। इससे नए युग की शुरूआत हुई यह बात हरियाणा के राज्यपाल श्री बंडारू दत्तात्रेय ने गुरुग्राम विश्वविद्यालय में आयोजित ‘‘आपदा में अवसर-बिजनेस मॉडल का नया रूप’’ (Opportunities in crisis : Reinventing Business Models) जैसे प्रासंगिक तथा महत्वपूर्ण विषय पर अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी में बोलते हुए कही।
श्री दत्तात्रेय ने कहा कि फरवरी 2020 से कोरोना नाम के वायरस ने पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले लिया और भौतिक प्रगति के लिए दौड़ रही दुनिया की तेज रफ्तार पर अचानक ब्रेक लग गया। बड़ी-बड़ी कंपनियां, फैक्ट्रियां, दफ्तर, दुकानें सब बंद करनी पड़ी।
राज्यपाल ने कहा कि हमनें देशवासियों, वैज्ञानिकों, डाक्टरों, समाज सेवियों तथा संस्थाओं के सहयोग से इस भारी आपदा में कईं अवसर ढूंढे हैं। उन्होंने कहा कि आर्थिक क्षेत्र में इस महामारी ने एक नई दृष्टि और अनगिनत नए प्रयोगों, नई अवधारणाओं को जन्म दिया है। शिक्षा क्षेत्र की ही बात की जाए तो महामारी के दौरान लाॅकडाउन में ऑनलाइन शिक्षण का एक कारगर उपाय हमनें सीखा है। इस ऑनलाइन शिक्षण के क्षेत्र में आज बड़े बड़े संस्थान सफलता पूर्वक काम कर रहे हैं। यहां तक कि हमारे कई विश्वविद्यालयों ने तो डिग्री और डिप्लोमा र्कोसेस आॅनलाईन शुरू कर दिए हैं। आपदाकाल में व्यापार एवं व्यवसाय को नए रूप में ढाला है, जिससे देश की अर्थव्यवस्था को ज्यादा प्रभावित नहीं होने दिया और भारत सबसे जल्दी संभलने वाले देशों में शुमार हुआ।
उन्होंने कहा कि भारत जैसे विशाल जनसंख्या वाले विकासशील देश ने कोराना की लड़ाई में अपनी श्रेष्ठता सिद्ध की है। इसी कारण भारत के कई देशों के साथ सम्बन्ध प्रगाढ़ हुए हैं। भारत ने अपने देश में बनी कोरोना वैक्सीन 95 से भी अधिक देशों में पहुंचाई है। इसके साथ-साथ भारत में कोरोना वैक्सीन कवरेज का 100 करोड़ का आंकड़ा पार करके यह सिद्ध कर दिया है कि हर परिस्थिति में बुलन्द होसलों के साथ काम करने में सक्षम हैं।
श्री दत्तात्रेय ने कहा कि इसी वक्त में सकारात्मक सोच के कारण “आपदा में अवसर” तथा “आत्मनिर्भर भारत” जैसे नारे मिले जो बाद में अभियान बन गए। आज हम इस आपदा से मिले सबक से अनेक क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहे हैं, हमारे यहां इसी आपदा के समय पीपीई किट, मास्क, सेनेटाइजर जैसी जरूरी चीजों का निर्माण रिकॉर्ड स्तर पर होने लगा। मुझे पूरा विश्वास है कि आर्थिक क्षेत्र में नए प्रयोग तथा नए तौर-तरीकों को विकसित करने में यह संगोष्ठी महत्वपूर्ण सिद्ध होगी।
राज्यपाल ने कहा कि कोविड के समय में लोगों को मानसिक मजबूती देने के लिए गुरुग्राम विश्वविद्यालय ने ‘‘सुकून’’ नाम से हेल्पलाइन संचालित की। उन्होंने कोरोना काल में गुरुग्राम विश्वविद्यालय द्वारा किए गए कार्यों को सराहा।
उन्होंने कहा कि इस संगोष्ठी में देश-विदेश से करीब सौ से अधिक लेखकों ने अपने शोध पत्र भेजे हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें विश्वास है कि देश के विकास तथा आत्मनिर्भर भारत के स्वप्न को साकार करने सभी विद्वान-शिक्षक अपने अध्ययन एवं शोध कार्यों से निरंतर महत्वपूर्ण योगदान देंगें। इस सम्मेलन में गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद जी, कुलपति डा. मार्कण्डेय आहूजा तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
श्री दत्तात्रेय ने कहा कि फरवरी 2020 से कोरोना नाम के वायरस ने पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले लिया और भौतिक प्रगति के लिए दौड़ रही दुनिया की तेज रफ्तार पर अचानक ब्रेक लग गया। बड़ी-बड़ी कंपनियां, फैक्ट्रियां, दफ्तर, दुकानें सब बंद करनी पड़ी।
राज्यपाल ने कहा कि हमनें देशवासियों, वैज्ञानिकों, डाक्टरों, समाज सेवियों तथा संस्थाओं के सहयोग से इस भारी आपदा में कईं अवसर ढूंढे हैं। उन्होंने कहा कि आर्थिक क्षेत्र में इस महामारी ने एक नई दृष्टि और अनगिनत नए प्रयोगों, नई अवधारणाओं को जन्म दिया है। शिक्षा क्षेत्र की ही बात की जाए तो महामारी के दौरान लाॅकडाउन में ऑनलाइन शिक्षण का एक कारगर उपाय हमनें सीखा है। इस ऑनलाइन शिक्षण के क्षेत्र में आज बड़े बड़े संस्थान सफलता पूर्वक काम कर रहे हैं। यहां तक कि हमारे कई विश्वविद्यालयों ने तो डिग्री और डिप्लोमा र्कोसेस आॅनलाईन शुरू कर दिए हैं। आपदाकाल में व्यापार एवं व्यवसाय को नए रूप में ढाला है, जिससे देश की अर्थव्यवस्था को ज्यादा प्रभावित नहीं होने दिया और भारत सबसे जल्दी संभलने वाले देशों में शुमार हुआ।
उन्होंने कहा कि भारत जैसे विशाल जनसंख्या वाले विकासशील देश ने कोराना की लड़ाई में अपनी श्रेष्ठता सिद्ध की है। इसी कारण भारत के कई देशों के साथ सम्बन्ध प्रगाढ़ हुए हैं। भारत ने अपने देश में बनी कोरोना वैक्सीन 95 से भी अधिक देशों में पहुंचाई है। इसके साथ-साथ भारत में कोरोना वैक्सीन कवरेज का 100 करोड़ का आंकड़ा पार करके यह सिद्ध कर दिया है कि हर परिस्थिति में बुलन्द होसलों के साथ काम करने में सक्षम हैं।
श्री दत्तात्रेय ने कहा कि इसी वक्त में सकारात्मक सोच के कारण “आपदा में अवसर” तथा “आत्मनिर्भर भारत” जैसे नारे मिले जो बाद में अभियान बन गए। आज हम इस आपदा से मिले सबक से अनेक क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहे हैं, हमारे यहां इसी आपदा के समय पीपीई किट, मास्क, सेनेटाइजर जैसी जरूरी चीजों का निर्माण रिकॉर्ड स्तर पर होने लगा। मुझे पूरा विश्वास है कि आर्थिक क्षेत्र में नए प्रयोग तथा नए तौर-तरीकों को विकसित करने में यह संगोष्ठी महत्वपूर्ण सिद्ध होगी।
राज्यपाल ने कहा कि कोविड के समय में लोगों को मानसिक मजबूती देने के लिए गुरुग्राम विश्वविद्यालय ने ‘‘सुकून’’ नाम से हेल्पलाइन संचालित की। उन्होंने कोरोना काल में गुरुग्राम विश्वविद्यालय द्वारा किए गए कार्यों को सराहा।
उन्होंने कहा कि इस संगोष्ठी में देश-विदेश से करीब सौ से अधिक लेखकों ने अपने शोध पत्र भेजे हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें विश्वास है कि देश के विकास तथा आत्मनिर्भर भारत के स्वप्न को साकार करने सभी विद्वान-शिक्षक अपने अध्ययन एवं शोध कार्यों से निरंतर महत्वपूर्ण योगदान देंगें। इस सम्मेलन में गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद जी, कुलपति डा. मार्कण्डेय आहूजा तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
कैप्शन-1- हरियाणा के राज्यपाल श्री बंडारू दत्तात्रेय गुरुग्राम विश्वविद्यालय में ‘‘आपदा में अवसर-बिजनेस मॉडल का नया रूप’’ विषय पर आयोजित अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी की दीप प्रज्जवलित कर शुरूआत करते हुए।
कैप्शन-2- हरियाणा के राज्यपाल श्री बंडारू दत्तात्रेय गुरुग्राम विश्वविद्यालय में ‘‘आपदा में अवसर-बिजनेस मॉडल का नया रूप’’ विषय पर आयोजित अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी में बोलते हुए।
कैप्शन-3- हरियाणा के राज्यपाल श्री बंडारू दत्तात्रेय गुरुग्राम विश्वविद्यालय में ‘‘आपदा में अवसर-बिजनेस मॉडल का नया रूप’’ विषय पर आयोजित अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी में पुस्तिका का विमोचन करते हुए।





















