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Posted by Surinder Verma on Wednesday, June 17, 2020

न पुस्तक,न वैक्सीन लेकिन सरकार को स्कूल खोलने की जल्दी: सैलजा

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-अभिभावकों की आशंकाएं बढ़ा रहा प्राइमरी स्कूल खोलने का फरमान

-बिना पुस्तक बच्चे स्कूल जाकर करेंगे क्या, कोरोना सुरक्षा के नाम पर सरकार के हाथ खाली

चंडीगढ़: 30 जुलाई, हरियाणा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कुमारी सैलजा ने कहा है कि
प्रदेश सरकार स्कूली बच्चों तक पाठ्य पुस्तकें पहुंचाने की जिम्मेदारी से मुंह छिपा रही है। प्राइमरी स्कूलों का उदाहरण सामने है जहां पाठ्य पुस्तकें बच्चों को मिली नहीं लेकिन स्कूल खोलने का फरमान जारी कर दिया गया। अभिभावक पूछ रहे हैं कि आखिर सरकार को किस बात की जल्दी है? न वह पुस्तकें दे रही , न कोरोना से बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित कर पा रही है।
आज यहां जारी बयान में कुमारी सैलजा ने कहा कि अगस्त के पहले सप्ताह में प्राइमरी स्कूल खोलने की घोषणा तो सरकार ने कर दी लेकिन यह नहीं बता रही कि पुस्तकें कब तक पहुंचाएगी? कोरोना से बच्चों का बचाव कैसे करेगी? मार्केट में ये पुस्तकें मिलेंगी नहीं, सरकार दे नहीं रही, इस पर स्कूल खोलने की जल्दी। बिना पुस्तक बच्चे स्कूल जाकर करेंगे क्या? नए फरमान का औचित्य तो बताया जाए।
कुमारी सैलजा ने कहा कि 16 जुलाई को 9वीं से 12वीं और 23 जुलाई को छठी से आठवीं तक के स्कूल खोल दिए गए, अब प्राथमिक स्कूलों की बारी है। सरकार ने न तब किसी की सलाह मानी थी, न अब मानने को तैयार लगती है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में एक हजार से अधिक राजकीय मॉडल संस्कृति प्राइमरी स्कूल खोले गए थे। उनमें भी किताबें नहीं दी गई। इन बच्चों की संख्या करीब 50 हजार है और उनसे अतिरिक्त शुल्क वसूला जाता है। कुछ सरकारी स्कूलों में आदान-प्रदान स्कीम के तहत पुराने छात्रों की किताबें कुछ नए छात्रों को जरूर दिलवा दी गई , लेकिन नई किताबें कहां हैं, कब तक मिलेंगी, कोई नहीं बता रहा। बच्चों को दाखिला दिलाने के बाद अभिभावक असहाय हो गए हैं।
कुमारी सैलजा ने दोहराया कि प्राइमरी स्कूल खोलने का समय चिंताजनक है। सर्वोच्च चिकित्सा संस्थानों ने अगस्त के दूसरे से तीसरे सप्ताह में कोरोना की तीसरी लहर आने की आशंका जताई है । स्कूल खुलने के बाद अगर किसी बच्चे को कोरोना हो गया तो कौन जिम्मेदार होगा?