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Posted by Surinder Verma on Wednesday, June 17, 2020

आईएलबीएस के डायरेक्टर से गलत और भ्रामक बयान के लिए होम्योपैथिक डॉक्टरों द्वारा माफी कीअपील

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डॉक्टर सरीन आईएलबीएस के निर्देशक ने ए एन आई को संबोधित करते हुए एक बहुत गलत और भ्रमित करने वाला वाली टिप्पणी करी। उन्होंने कहा की कहा की आजकल बहुत सारे लोग इम्यूनिटी बूस्टर के नाम पर जो दवाई ले रहे हैं जैसे होम्योपैथिक और आयुर्वेदिक जोकि अनसाइंटिफिक है की वजह से लोगों को लिवर रिलेटेड बीमारियां हो रही है अपने को करुणा कॉविड से बचने के चक्कर में ऐसा हो रहा है।
डॉक्टर ए के गुप्ता प्रेसिडेंट होम्योपैथिक मेडिकल एसोसिएशन ऑफ इंडिया दिल्ली ब्रांच इस बात का खंडन किया और कहा यह बहुत निंदनीय है की जिस चिकित्सा पद्धति विज्ञान के बारे में उनको कोई ज्ञान नहीं है तो उनको इस तरह की बेतुकी बात नहीं करनी चाहिए थी हालांकि जब वह सब जानते हैं कि जो उनकी दवाइयां हैं उनमें साइड इफेक्ट होते हैं ना की होम्योपैथिक पद्धति के अंदर। इस बात पर एतराज करते हुए डॉक्टर ए के गुप्ता ने उन्हें इस बात को वापस लेने और सामाजिक तौर पर माफी मांगने की सलाह दी।
डॉ गुप्ता का कहना है कि जब यह दवाइयों का उपयोग आयुष मंत्रालय द्वारा नियोजित किया गया प्रधानमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री द्वारा प्रचार किया गया ऐसे समय में अगर लोगों ने यह इम्यूनिटी बूस्टर लिया तो क्या गलत किया जबकि इस करुणा कोरोना के महामारी में अभी तक कोई निश्चित चिकित्सा का प्रोटोकॉल नहीं बन पाया है और बीमारी बेकाबू होती जा रही है यहां तक की डब्ल्यू एच ओ ने भी अभी तक कोई सटीक इलाज एलोपैथिक चिकित्सा प्रणाली में नहीं है। आए दिन सुझाव बदलते रहते हैं।
डॉ गुप्ता ने कहा की इस नाजुक परिस्थिति में जबकि महामारी एक भयानक रूप ले रही है ऐसे में इस तरह के बयान बहुत नुकसानदायक हो सकते हैं जबकि सरकार इंटीग्रेशन ऑफ मेडिकल सिस्टम पर जोर दे रही है अगर उनको इस बारे में कुछ कहना भी था तो वह इस तरह से भी कह सकते थे की यह दवाइयां डॉक्टर की देखरेख में ले ना कि लोगों को इस समय परिस्थिति में जब उनका मनोबल पहले से ही बहुत खत्म हुआ पड़ा है निराशआत्मक और गलत ज्ञान लोगों में भ्रांति और एक गलत संदेश जाएगा जिससे लोगों को इलाज कराने में दुविधा होगी। इसलिए इस संदर्भ में डॉक्टर सरीन को अपना बयान वापस ले कर और सामाजिक तौर पर क्षमा मांग कर आयुष प्रणाली के डॉक्टरों को संतुष्ट करना होगा अन्यथा डॉक्टरों में असंतोष और गुस्सा है जो उनको लीगल नोटिस देने पर बाध्य कर सकता है।