10 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर उमंग अभिव्यक्ति मंच पंचकूला ने उमंग लघु कथाएं पुस्तक का विमोचन साहित्य व उर्दू अकादमी के डायरेक्टर श्री चंद्र त्रिखा व ग्रंथ अकादमी के डायरेक्टर प्रोफेसर वीरेंद्र चौहान जी के कर कमलों द्वारा हरियाणा अकादमी भवन सेक्टर 14 पंचकूला में बड़ी धूमधाम से मनाया। मंच की फाउंडर श्रीमती नीलम त्रिखा ने बताया की महिला अंतर्राष्ट्रीय दिवस के अवसर पर 16 कवित्रीयों द्वारा लिखित इस पुस्तक जिसमें सभी ने अपने निजी अनुभव सांझा किए हैं जो कि एक लघु कथा के रूप में है और सभी को प्रेरणा देते हैं कार्यक्रम की शुरुआत मैं सभी ने पुष्पगुच्छ देकर श्री चंद्र त्रिखा व प्रोफेसर वीरेंद्र चौहान जी का स्वागत किया इस मौके पर न्यूयॉर्क से इस पुस्तक का हिस्सा रही सुषमा मल्होत्रा ने ऑनलाइन के माध्यम से सभी को बधाई दी वह भारतीय संस्कृति के प्रचार व प्रसार पर महिलाओं की स्थिति पर चर्चा की तथा वीरेंद्र चौहान जी ने एक बहुत ही सशक्त संदेश दिया आपके साथ महिला होने के नाते यदि कोई बदतमीजी करता है तो पहले रोको, फिर टोको ,ना माने तो फिर ठोको लेकिन बिल्कुल भी समाज की परवाह ना करो कि कोई क्या कहेगा आपको अपनी आवाज बुलंद करनी ही पड़ेगी यूएसए ह्यूस्टन से भारत आई हुई साहित्यकारा डॉक्टर सरिता मेहता ने भी भारत और यूएसए में रहने वाली महिलाओं के जीवन पर चर्चा की वह हयूस्टन में विद्या धाम रजिस्टर्ड संस्था की अध्यक्षा है और भारतीय संस्कृति के प्रचार व प्रसार में लगी हुई है और इस पुस्तक का हिस्सा भी हैं इस मौके पर मंच की फाउंडर नीलम त्रिखा को उन्होंने एक सशक्त महिला के रूप में सम्मानित भी किया पुस्तक में हिस्सा लेने वाली कवित्रीयों के नाम इस तरह से श्रीमती शिखा श्याम राणा, नीलम त्रिखा, सुषमा मल्होत्रा यूएसए ,डॉक्टर सरिता मेहता यूएसए ,नीरजा शर्मा ,परमिंदर सोनी, डॉक्टर वशिष्ठ धीरजा शर्मा अलका शर्मा बोस ,गीता उपाध्याय निशा वर्मा शीनू वालिया, संगीता पुखराज ,दृष्टि त्रिखा, हर्षित बोस व नरेश चौधरी इस मौके पर डॉ सरिता मेहता जो विद्या धाम यूएसए की अध्यक्ष है को श्री चंद्र त्रिखा व प्रोफेसर वीरेंद्र चौहान जी ने व मंच की फाउंडर नीलम त्रिखा व शिखा श्याम राणा सहित अन्य सभी सदस्यों ने पुष्पगुच्छ , सम्मान पत्र व शॉल देकर उनको सम्मानित किया इस पुस्तक में महिलाओं के लिए एक बहुत ही जागरूकता पूर्ण वह प्रेरणात्मक प्रसंग दिए हुए हैं और नारी को किसी भी स्थिति में कमजोर नहीं होना चाहिए इस बात पर जोर दिया गया है विपरित परिस्थितियों में भी किस तरह से उन्होंने विजय हासिल की है सभी साहित्यकारों ने इस तरह की कहानियां जो की सच्चाई पर आधारित हैं इस पुस्तक में सांझा की है कार्यक्रम के पश्चात सभी ने एक दूसरे को बधाई दी और डॉक्टर चंद्र त्रिखा प्रोफेसर वीरेंद्र चौहान जी का धन्यवाद किया।



























