चंडीगढ़,सुनीता शास्त्री। गुरुद्वारा साहिब, सेक्टर 19, चंडीगढ़ में आज गुरुपूरब समारोह धूमधाम से मनाया गया। कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा के दिन सिक्खों के प्रथम गुरु श्री गुरु नानक देव जी के 550वें प्रकाशोत्सव पर भारतीय जनता पार्टी चंडीगढ़ के प्रदेश अध्यक्ष संजय टंडन ने सेक्टर 19 स्थित गुरुद्वारा में माथा टेका और गुरु का आशीर्वाद प्राप्त किया । इस अवसर पर गुरुद्वारा साहिब की कमेटी ने टंडन को सिरोपा भेंट कर उन्हें सन्मानित किया ।उनके साथ पार्टी के जिला अध्यक्ष जितेन्द्र मल्होत्रा भी उपस्थित थे । इस अवसर पर संजय टंडन ने सभी लोगों को बधाई और गुरु नानक देव जी ने मानवता का सन्देश दिया । उन्होंने कहा कि सिख कौम बहादुरों की कौम है । मानवता की रक्षा हेतु सिख गुरु साहिबान और सिखों ने अपने प्राण तक न्योछावर किये । ऐसी सिख कौम के प्रथम गुरु नानक देव जी को शत शत नमन है उन्होंने अपने जीवनकाल में भी सभी लोगों को सदा देने की बात की ।आज महोत्सव में विशेष आकर्षण रहा एक ताजा बना 550 किलो वजनी केक रहा, जिसे लंगर में वितरित किया गया। सिखों के प्रथम गुरु, गुरु नानक देव जी के 550वें जन्मदिवस के मौके पर यह केक तैयार करवाया था नेशनल बेकर्स ने, जिसकी आउटलेट चंडीगढ़ और जीरकपुर में हैं।प्रकाश उत्सव मनाने के लिए इस दुर्लभ केक को करीब 15 कारीगरों ने मिलकर दो दिनों में तैयार किया था। केक काटने के कार्यक्रम में प्रसिद्ध पंजाबी गायक सुखिंदर शिंदा सम्मानित अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।इसके साथ ही, श्री संजय टंडन, प्रदेश अध्यक्ष, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) चंडीगढ़ और शहर की स्टार रेडियो जॉकी आरजे मीनाक्षी ने भी कार्यक्रम में भाग लिया।श्री गुरुद्वारा साहिब सिंह सभा, सेक्टर 19 डी, चंडीगढ़ के अध्यक्ष, सरदार तेजिंदर सिंह ने कहा, मैं गुरुपूरब के अवसर पर भारत में बने अब तक के सबसे बड़े केकों में से एक को यहां प्रस्तुत करके खुशी महसूस कर रहा हूं। इसे लंगर में प्रसाद के रूप में वितरित किया गया। इस अवसर पर उपस्थित अन्य महानुभावों में प्रमुख थे- श्री परमजीत सिंह, सतनाम सिंह, समनदीप सिंह, दलजीत सिंह, रणबीर सिंह व परमबीर सिंह।एक्सप्रेस इमिग्रेशन अपील सर्विसेज (प्राइवेट) लिमिटेड की चंडीगढ़ शाखा के हेड हरप्रीत सिंह ने सभी उपस्थित अतिथियों और संगत का शुक्रिया अदा किया।गुरु नानक देव जी की जयंती हर साल गुरुपूरब के रूप में मनाई जाती है, जिसे प्रकाश उत्सव भी कहा जाता है। यह सिख धर्म के सबसे पवित्र त्योहारों में से एक है।

























