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Posted by Surinder Verma on Wednesday, June 17, 2020

व्यंग्यकार के पास भाषा, शिल्प और विसंगतियों को पकडऩे की क्षमता होना जरूरी : सुभाष चंदर

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चंडीगढ़,सुनीता शास्त्री।चंडीगढ़ में पहली बार व्यंग्य की महापंचायत में पांच राज्यों – पंजाब , हिमाचल, हरियाणा, उत्तर प्रदेश व दिल्ली के अलावा के चंडीगढ़ के लगभग पचास व्यंग्यकारों ने शिरकत की । देश और समाज गतिविधियों और विसंगतियों के मिजाज और व्यंग्य लेखन की आवश्कता पर बल देते हुए चर्चा की गई। इस अवसर पर इन पांच राज्यों के व्यंग्यकारों की रचनाओं पर केंद्रित व्यंग्य पत्रिका अट्टहास के विशेषांक का विमोचन किया गया, जिसका अतिथि संपादन गुरमीत बेदी है। चंडीगढ़़ के हिमाचल भवन के मुख्य सभागार में देर शाम तक चले इस कार्यक्रम का आयोजन माध्यम साहित्यिक संस्थान के व्यंग्यकार गुरमीत बेदी के संयोजन में किया गया। देश के वरिष्ठतम व्यंग्यकार व आलोचक सुभाष चंदर ने इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि शिरकत की जबकि प्रमुख व्यंग्यकार व अट्हास पत्रिका के प्रमुख संपादक अनूप श्रीवास्तव व साहित्यकार राम किशोर उपाध्याय कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता अनिल कपूर ने की। कार्यक्रम का संचालन गुरमीत बेदी ने किया। काय्रक्रम का आरम्ीा दीप प्रज्वलित कर किया गया तत्पश्चात अपने संबोधन में सुभाष चंदर ने कहा कि व्यंग्यकार के पास भाषा, शिल्प और विसंगतियों को पकडऩे की क्षमता होना जरूरी है। उन्होंने कहा व्यंग्य लिखना कोई सिखा नहीं सकता। जो हमारे आसपास घट रहा है,उस पर पैनी नजर रखने की आवश्यकता है। सुभाष चंदर ने कहा कि व्यंग्य के नाम पर आज सपाटबयानी चरम पर है। व्यंग्य किसी घटना का आख्यान नहीं है और न ही किसी विसंगति पर प्रतिक्रिया भर है। रचना में व्यंग्य लाना है तो शैलीय उपकरणों को समृद्ध करना होगा। रचना ऐसी हो जिसमें देश, काल, परिवेश हों और उसे रिक्शेवाले से लेकर प्रबुद्ध प्रोफेसर तक सभी समझ जाएं।सुभाष चंदर ने कहा व्यंग्यकार अपनी रचनाओं के जरिए विसंगतियों के खिलाफ माहौल बनाने का काम करते हैं और गहरे तक जाते हैं। व्यंग्य लिखने के पीछे एक विशेष सोच होती है। यह वह सोच ही होती है जो किसी को हरिशंकर परसाई बना देती है। जिस किसी के पास भाषा, शिल्प और चीजों को पकड़ने की क्षमता होती है , वह व्यंग्य लिख सकता है। उन्होंने युवा व्यंग्यकारों को सलाह दी कि वे वरिष्ठ व्यंग्य लेखकों को पढें, उन्हें समझें और चीजों को पकडऩे का हुनर सीखें।वरिष्ठ व्यंग्यकार और अट्टहास पत्रिका के प्रमुख संपादक अनूप श्रीवास्तव ने कहा कि व्यंग्यकार की समाज में बड़ी महत्वपूर्ण भूमिका है। वह चाहे किसी सामाजिक परिवर्तन को करने में सफल न हो लेकिन वह समाज की आत्मा को झकझोरने में पूर्णतया सक्षम होता है। उन्होंने हिमाचल पंजाब हरियाणा व ट्राई सिटी चंडीगढ़ के व्यंग्य कारों को अट्टहास पत्रिका के साथ जुडऩे का आह्वान किया और यह भी कहा कि व्यंग्य की गोष्ठियां हर माह नियमित रूप से होनी चाहिए और व्यंग्यकारों को समाज की विसंगतियों को निर्भीक होकर रेखांकित करना चाहिए। राम किशोर उपाध्याय ने कहा कि व्यंग्य लेखक से साहित्य को बड़ी अपेक्षाएं हैं। यह सर्वविदित है कि साहित्य से दुनिया नहीं बदलती लेकिन पाठक को सोचने पर विवश कर देती है । उन्होने कहा कि व्यंग्यकार के पास ऐसा शिल्प होना चाहिए जो उसकी बात को संप्रेषित कर सके। प्रिंसिपल भूपिंदर सिंह ने शिक्षक दिवस पर टीचर की उपेक्षा पर तीखा व्यंग्य करते हुए वर्तमान स्थिति और व्यवस्था को रेखांकित किया।व्यंग्य की इस महापंचायत में हिमाचल से राजेंद्र राजन, अशोक गौतम, अजय पाराशर, मृदुला श्रीवास्तव, प्रभात कुमार, कुलदीप शर्मा , मेला राम शर्मा, राजीव त्रिगर्ती, वीरेंद्र शर्मा ,पवन चौहान, अजय श्रीवास्तव व रतन चंद निर्झर, पंजाब से लाजपत राय गर्ग, सुभाष शर्मा , सरदार सेवी, हरियाणा से जसविंदर शर्मा, ट्राइसिटी चंडीगढ़ से प्रेम विज, मदन गुप्ता सपाटू, अशोक नादिर, प्रिंसिपल भूपिंदर सिंह, सुभाष शर्मा, डॉ सुनीता शास्त्री, रतन चंद रत्नेश, डॉ दलजीत कौर , नीलम कुमारी, गुरदर्शन सिंह मावी, बलवंत तक्षक ने शिरकत की ।