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- 109 Countries Coordinate Sting Operation Thunderball to Seize Illegally Captured Wildlife, 600 Arrests
- इस साल जून तक 2000 मामलों में संरक्षित जीवों के हजारों अंग मिले
- 440 हाथी दांत जब्त, 4300 जीवित पक्षियों और 10 हजार कछुओं को बचाया
Dainik Bhaskar
Jul 15, 2019, 09:29 AM IST
लियो (फ्रांस). जानवरों का बचाने के लिए 109 देशों ने मिलकर ऑपरेशन थंडरबाल चलाया। वन्यजीवों की तस्करी रोकने और उनके संरक्षण के लिए इंटरपोल और वर्ल्ड कस्टम्स ऑर्गनाइजेशन (डब्ल्यूसीओ) ने मिलकर यह कार्रवाई की। 2000 मामलों में 600 लोगों को तस्करी के आरोप में गिरफ्तार किया गया। इस साल अब तक 440 हाथी दांत जब्त किए गए है। इसके अलावा 4300 जीवित पक्षियों और दुर्लभ प्रजाति के 10 हजार समुद्री कछुओं को भी बचाया गया। अकेले जून महीने में ही 23 लंगूर, 30 शेर, चीता, बाघ समेत एक टन से अधिक पेंगोलिन की हडि्डयों को जब्त किया गया है। इतना ही नहीं 74 ट्रक अवैध लकड़ी, 2600 से अधिक पौधे भी बरामद किए हैं।
2017 में थंडरबर्ड और 2018 में ऑपरेशन थंडरस्टॉर्म भी चलाया
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ऑपरेशन थंडरबॉल का प्रमुख मकसद तस्करों के इलाके, उनके रास्ते और अधिक मांग वाले देशों को चिह्नित कर इसे बंद कराने का दबाव बनाना है। दोनों संगठनों ने 2017 में ऑपरेशन थंडरबर्ड चलाया था। 2018 में इसी तरह की कार्रवाई को ऑपरेशन थंडरस्टॉर्म नाम दिया गया।
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वन्यजीवों और वनस्पतियों की तस्करी से जुड़ा नशीली दवाओं और हथियारों का काम दुनिया में तीसरा बड़ा आपराधिक व्यापार है। इसलिए तस्करों के निशाने पर सबसे ज्यादा हाथी (दांतों के लिए ) और आंतरिक अंगों के लिए बड़ी बिल्लियां (शेर, चीता, बाघ) रहती हैं। इसके चलते कुछ प्रजातियां खतरे में पड़ गई हैं और उन पर विलुप्त होने का खतरा है।
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वर्तमान में वन्य जीवों और वनस्पतियों से निर्मित दवाओं की सबसे अधिक मांग चीन में है। इसी के चलते यहां अवैध शिकार कर शार्क फिन्स, गैंडे के सींग लाए जाते है। साथ ही छोटे स्तनपायी जीवों में पेंगोलिन के अंगों मांग ज्यादा है।
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पूरी प्रणाली के बदलने की जरूरत
डब्ल्यूसीओ के पर्यावरण कार्यक्रम के प्रबंधक रो राथ ने बताया, ‘‘अगर हम उन विशेष देशों में तस्करी के रास्तों की पहचान कर पाते हैं और उन पर शिकंजा कसते हैं, तो वे दूसरे तरीके से अपराध करने लगते हैं। इस कारण पूरी प्रणाली को ही बदलने की जरूरत है।’’
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डब्ल्यूसीओ महासचिव कूनियो मिकुरिया ने कहा, ‘‘ऑपरेशन थंडरबाल के जिस तरह परिणाम दिख रहे हैं, यह वन्यजीव अपराध के खिलाफ राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर का साझा अभियान है। इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। ऐसे प्रयास से पूरी दुनिया में जागरूकता आएगी। सामाजिक संगठन तस्करों की पहचान कर पकड़वाने में मदद करेंगे।’’
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