सृजन मंच ( रचनात्मकता का एक संस्थान ) के संस्थापक डा डी एस गुप्ता के 89 वें जन्मदिन के उपलक्ष्य में, सृजन द्वारा लेखक दर्शन कुमार वसन के ग़ज़ल संग्रह पुस्तक का विमोचन और सोमेश गुप्ता की टीम द्वारा ग़ज़ल गायिकी का आयोजन आज दिनांक 27 जुलाई 2025 को सुबह सैक्टर 40 के सामुदायिक केंद्र में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि डा मनमोहनसिंह आई पी एस ( रीटायर्ड ) चेयरमैन चण्डीगढ़ साहित्य अकादमी और गैस्ट आफ हानर विनोद खन्ना, प्रधान रीडर एण्ड राइटर सोसायटी आफ इंडिया, चण्डीगढ़, संतोष गर्ग प्रधान राष्ट्रीय कवि संगम, और वीरेन्द्र रावत जी थे। सृजन के प्रधान सोमेश गुप्ता जी ने आए हुए मेहमानों का स्वागत किया। लेखक दर्शन कुमार वसन ने ग़ज़ल संग्रह सिसकती परछाइयां पर रौशनी डाली और लेखन यात्रा का वर्णन किया। विनोद खन्ना और संतोष गर्ग जी ने पुस्तक पर पत्र पढ़े । गुलशन भाटिया, एम एल अरोड़ा आशीष वसन ने ग़ज़लों को पढ़ा। सोमेश गुप्ता और गीता ने – हमें जीने नहीं देते हमें मरने नहीं देते ग़ज़ल, सोमेश गुप्ता और कुशिका गुप्ता ने – धड़कनों में अजीब दलदल है ग़ज़ल, सोमेश गुप्ता और नेहा राज वसन ने – बन बन कर यारो उजड़ेगी ज़ीस्त यहां यूं ही तड़पेगी और सोमेश गुप्ता और सुप्रिया ने – बहुत दिल से शरारत कर रहे हो ग़ज़ल प्रस्तुत की। गायकी कार्यक्रम के आख़िर में सोमेश गुप्ता की टीम ने टप्पे गाये । गिटार पर प्रतीक सेठ और तबला पर राजेश कुमार ने संगत की।
मुख्य अतिथि डा मनमोहनसिंह ने सृजन द्वारा संगीत के क्षेत्र और साहित्य के क्षेत्र में किये जा रहे कार्य की सराहना की। लेखक दर्शन कुमार वसन को ‘सिसकती परछाइयां ‘ पुस्तक के लिए बधाई दी। चण्डीगढ़ शहर में साहित्यिक गतिविधियों पर रौशनी डाली।
मुख्य अतिथि डा मनमोहनसिंह चेयरमैन चण्डीगढ़ साहित्य अकादमी , विशिष्ट अतिथियों विनोद खन्ना जी, संतोष गर्ग जी, विरेन्द्र रावत जी, तथा प्रस्तुति देने वाले सभी मेहमानों और कलाकारों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का शानदार संचालन अंग्रेजी की अत्यंत कुशल शिक्षिका एवं लेखिका उमा निजावन द्वारा किया गया। अन्त में आए हुए सभी मेहमानों का धन्यवाद किया गया।
आज कही गई और गायी गई सभी ग़ज़लें दर्शन कुमार वसन की इस पुस्तक ‘सिसकती परछाईयां’ ‘ से ली गई थीं जिन्हें संगीतकार सोमेश जी ने संगीतबद्ध किया। संगीतकार सोमेश गुप्ता जी ने कहा कि सृजन के माध्यम से वह संगीत की शिक्षा मुफ़्त में देते हैं। वह पहले भी देते रहे हैं और आगे भी देते रहेंगे।




















