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Posted by Surinder Verma on Wednesday, June 17, 2020

हरियाणा के पूर्व उपमुख्यमंत्री श्री चंद्रमोहन ने हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल खट्टर ‌से मांग की है कि सफाई कर्मचारियों की कोविड महामारी के ‌दौरान की गई अभूतपूर्व‌ सेवाओं और योगदान को ध्यान में रखते हुए उनकी ‌सेवाओं को नियमित किया जाए

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्पंचकूला 30 मई – हरियाणा के पूर्व उपमुख्यमंत्री श्री चंद्रमोहन ने हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल खट्टर ‌से मांग की है कि सफाई कर्मचारियों की कोविड महामारी के ‌दौरान की गई अभूतपूर्व‌ सेवाओं और योगदान को ध्यान में रखते हुए उनकी ‌सेवाओं को नियमित किया जाए , इसके साथ ही कोविड के दौरान मरने वालों कर्मचारियों ‌के बीमे की राशि भी 10 लाख रुपए से बढ़ाकर 50 लाख रुपए की जाए ताकि गरीब लोगों को राहत मिल सके। ‌ उन्होंने कहा कि जिस प्रकार से आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं के लिए कोविड के दौरान मृत्यु होने पर एक्सग्रेसिया के तहत परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने का प्रावधान किया गया है। उसी प्रकार का प्रावधान सफाई कर्मचारियों के परिवारों के लिए भी किया जाए ताकि जन सेवा के कार्य को निश्चिंत हो कर अधिक तत्परता से पूरा किया जा सके। ‌ उन्होंने कहा कि जिन सफाई कर्मचारियों ने कोविड रुपी ‌महामारी के दौरान निरन्तर अहर्नीश सेवा करते हुए एक फ्रंटलाइन की तरह कार्य किया है उनको फ्रंटलाइन यौद्धाओं की उपाधि ‌तो दी गई है, लेकिन वेतन देने के नाम पर उनका शोषण किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वेतन के रूप में कुछ कर्मचारियों को 14428 रुपए तथा कुछ को 12400 रूपए प्रति महीने दिए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सारे प्रदेश में लगभग 40000 के लगभग सफाई कर्मचारी कार्यरत जिनमें से अधिकतर डेली वेजिज के आधार पर कार्य कर रहे हैं इनकी सेवाओं को नियमित करने के लिए शीघ्र कदम उठाए जाने की तत्काल जरूरत है। ‌ चन्द्र मोहन ने कहा कि जो सफाई कर्मचारी अनुबंध के आधार पर पिछले 5 वर्षों से अधिक समय से कार्य कर रहे हैं। उनकी सेवाओं को नियमित किया जाए। इसी प्रकार से कालका और पिंजोर नगर पालिकाओं में भी अधिकतर सफाई कर्मचारी ठेके पर लगे हुए हैं। जबकि नगर निगम पंचकूला में 686 कर्मचारी अपनी सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। उनकी सेवाओं को नियमित किया जाए। ‌ उन्होंने कहा कि इससे बड़ी विडम्बना और क्या हो सकती है कि इन सफाई कर्मचारियों को वेतन के भी लाले पड़े हुए हैं और हांसी नगर पालिका के कर्मचारियों को अपना की महीनों के वेतन लेने के लिए धरना और प्रदर्शन करने पर विवश होना पड़ रहा है।