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Posted by Surinder Verma on Wednesday, June 17, 2020

दिल्ली को मिल रही ऑक्सजीन की मात्रा का रोना बंद कर हरियाणा के लिए कोटा बढ़ाये जाने की मांग करनी चाहिए हरियाणा के स्वास्थ्यमंत्री को : योगेश्वर शर्मा

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कहा: ग्रामीण आंचल में कोरोना के मामले व इससे मरने वालों की संख्या में आये दिन  हो रहा है इजाफा, प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री जिनके पास राज्य के गृहमंत्री का भी विभाग है राज्य में दवाईयों और ऑकसीजन की कालाबाजारी को रोकने में पूरी तहर से नाकाम रहे हैं

पंचकूला,13 मई।  आम आदमी पार्टी का कहना है कि कोरोनाकाल के इस भयावह दौर से निबटने में केंद्र के साथ साथ राज्य की खटटर सरकार भी पूरी तरह से नाकाम रही है। पार्टी का कहना है कि एक ओर हरियाणा के मुख्यमंत्री पर्याप्तमात्रा में ऑक्सीजन होने की बात कर रहे हैं तो दूसरी ओर ऑक्सीजन बंटवारे में भेदभाव होने की बात कर रहे हैं कि हरियाणा को दिल्ली के मुकाबले में ऑक्सीजन कम मिल रही है। पार्टी का कहना है कि अब मुख्यमंत्री झूठ बोल रहे हैं या स्वास्थ्यमंत्री, दोनों को प्रदेश की जनता को सच बताना ही चाहिए कि आखिर सच बोल कौन रहा है और झूठ कौन बोल रहा है? पार्टी का कहना है कि दूसरे की थाली में झांकने की बजाये स्वास्थ्यमंत्री को अपने लिए और प्रबंध करने पर ध्यान देना चाहिए और इसे पाने के लिए पूरा जोर लगाना चाहिए।
आज यहां जारी एक ब्यान में आप के उत्तरी हरियाणा जोन के सचिव योगेश्वर शर्मा का कहना है कि  केंद्र में भाजपा की सरकार होने के बाद भी अगर हरियाणा के स्वास्थ्यमंत्री अनिल विज ऑक्सीजन बंटवारे में भेदभाव का आरोप लगाये तो उन्हें तुरंत मंत्री पद छोड़ देना चाहिए। उन्होंने कहा कि दिल्ली को तो सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद ऑक्सीजन का कोटा मिलना शुरु हुआ है। उसमें भी पूरी आपूर्ति नहीं हो पा रही है। ऐसे में  हरियाणा के स्वास्थ्यमंत्री दिल्ली को मिल रही ऑक्सीजन की आपूर्ति को लकर परेशान से लग रहे हैं जोकि उनके इस तरह के ब्यान से नजर आती है,जबकि दिल्ली के नागरिक भी इसी देश के वाङ्क्षशदे हैं और जीवन बचाने का उनका भी हक बनता है। उन्होंने कहा कि अब तो सर्वोच्च न्यायालय द्वारा ऑक्सजीन के बंटवारे को देखने के लिए एक कमेटी का भी गठन कर दिया गया है। ऐसे में हरियाणा के स्वास्थ्यमंत्री अनिल विज को ऑक्सीजन का अधिक कोटा दिये जाने की की मांग इस कमेटी के समक्ष रखकर इसकी आपूर्ति करवानी चाहिए।
 उन्होंने कहा कि दरअसल प्रदेश में शहरों के बाद अब ग्रामीण आंचल में भी कोरोना के मामले व इससे मरने वालों की संख्या में आये दिन इजाफा हो रहा है। शहरी क्षेत्र में कोरोना की जांच कम होने के चलते ही इसके पीडि़तों की संख्या में हो रही कमी को दर्शाया जा रहा है। जबकि हकीकत में लोगों को इलाज की सुविधा पूरी तरह से मिल ही नहीं रही।  शर्मा का कहना है कि महज सोशल मीडिया पर बड़ी बड़ी बातें करने वाले प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री जिनके पास राज्य के गृहमंत्री का भी विभाग है राज्य में दवाईयों और ऑकसीजन की कालाबाजारी को रोकने में पूरी तहर से नाकाम रहे हैं। उनका कहना है कि सरकार ने समय रहते पेरामेडिकल स्टाफ की कमी को दूर किया होता तो आज प्रदेश में बीमारी से लडऩे की स्थिति गंभीर नहीं होती। उन्होंने कहा कि प्रदेश भर से आ रही खबरों में यह बात सामने आ रही है कि ग्रामीण क्षेत्र में कोरोना के मामले सबासे ज्यादा बढ़ रहे हैं, जहां सरकार के इससे निबटने के प्रयाप्त प्रबंध नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रदेश से आ रही खबरों के मुताबिक पिछले करीब एक माह में कोरोना से मरने वालों की संख्या में साढ़े तीन गुणा का इजाफा हुआ है। गत 11 अप्रैल से 9 मई तक हर हफ्ते कोरोना से मरने वालों की संख्या में सात से आठ फीसदी तक का इजाफा हो चुका है।  राज्य में जहां 10 मई तक 5605 मौते हुई,वहीं उनमें से 1879 मौतें ग्रामीण इलाकों में हुईं,जबकि शहरी इलाके में इस दौरान कोरोना से लड़ते हुए जान गंवाने वालों की संख्या 3725 है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के अपने जिले के गांवों में शहर की तुलना मेंकोरोना के मामले  पिछले दिनों काफी ज्यादा बढ़े हैं। इसी दौरान रोहतक के ग्रामीण आंचल में एक हफ्ते में दस हजार लोगों की जांच होने पर 1800  कोरोना पाजिटव मिले हैं। उन्हांने कहा कि  देश में कोरोना वैक्सीन लगाने में हरियाणा 15वें नंबर पर है। लेकिन यहां टीके की बर्बादी सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से सबसे ज्यादा है। उन्होंने कहा कि केंद्र की जारी रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में सबसे ज्यादा 6.49 प्रतिशत डोज अभी तक खराब हो चुकी हैं। अभी तक प्रदेश में 44 लाख 2 हजार 220 डोज लोगों को लगाई गई हैं। यदि प्रतिशत के अनुसार खराब हुई डोज का आंकड़ा निकालें तो यह 2,87,467 होता है। केंद्र सरकार शुरुआती दौर में प्रति डोज 210 रुपए में खरीद रही थी। उस हिसाब से इसकी कीमत 6 करोड़ 3 लाख 68 हजार रुपए होती है। हर व्यक्ति में दो डोज के 14 दिन बाद एंटीबॉडी बन जाती है। जो डोज खराब हुई है, उससे प्रदेश में 1,43,733 लोगों को दोनों डोज लग सकती थी।