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Posted by Surinder Verma on Wednesday, June 17, 2020

सुखना लेक के कैचमेंट एरिया में मौजूद सभी कमर्शियल और रिहायशी निर्माण 3 माह में गिराने के निर्देश

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  • अंधाधुंध निर्माण पर पंजाब-हरियाणा को 100-100 करोड़ का जुर्माना
  •  कैचमेंट एिरया में आते हैं कैंबवाला, खुड्डा अलीशेर, किशनगढ़, कांसल, और सकेतड़ी आदि
     

Dainik Bhaskar

Mar 03, 2020, 08:52 AM IST

चंडीगढ़ . सुखना कैचमेंट एरिया को लेकर पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने सोमवार को बड़ा फैसला सुनाया। जस्टिस राजीव शर्मा और जस्टिस एचएस सिद्धू की बेंच ने 21 सितंबर 2004 के सर्वे ऑफ इंडिया के मैप के मुताबिक सुखना लेक के कैचमेंट एरिया में आने वाले सभी व्यावसायिक और रिहायशी निर्माण तीन महीने में गिराने के निर्देश दिए हैं। उन लोगों के पुनर्वास के भी निर्देश दिए हैं जिनके बिल्डिंग प्लान अप्रूव हैं।

ऐसे लोगों को  25 लाख रुपए मुआवजा भी दिया जाएगा। साथ ही इन लोगों को चंडीगढ़ के आसपास अल्टरनेटिव साइट्स दिए जाने के भी निर्देश दिए गए हैं। कैचमेंट एरिया में अंधाधुंध निर्माण को लेकर हाईकोर्ट ने पंजाब व हरियाणा सरकार पर 100-100 करोड़ रुपए का जुर्माना भी लगाया। बेंच ने कहा- दोनों राज्य सरकारें यह राशि मिनिस्ट्री ऑफ एनवायर्नमेंट फॉरेस्ट एंड क्लाइमेट चेंज के पास 3 महीने में यह पैसा जमा कराएंगे। मिनिस्ट्री इस पैसे का इस्तेमाल सुखना लेक को वापस इसके मूल स्वरूप में लाने पर खर्च करेगी।

 हजारों मकान हैं कैचमेंट एरिया में… सुखना कैचमेंट एरिया में हजारों मकान आते हैं  जिनमें कई वीआईपीज भी रहते हैं। सबसे ज्यादा वीआइपी कांसल और सुखना एन्क्लेव में रहते हैं। चंडीगढ़ के कैंबवाला, खुड्डा अलीशेर और किशनगढ़, पंजाब का कांसल और हरियाणा का सकेतड़ी गांव कैचमेंट एरिया के दायरे में आता है।

निर्देश  : जिम्मेदारी तय करने को हाई पावर कमेटी गठित की जाए…
हाईकोर्ट ने सुखना कैचमेंट एरिया में बड़े स्तर पर हुए निर्माण कार्यों की जिम्मेदारी तय करने के लिए पंजाब और हरियाणा सरकार के चीफ सेक्रेटरी और चंडीगढ़ के प्रशासक के सलाहकार को एक हाईपावर कमेटी गठित किए जाने के निर्देश दिए हैं। बेंच ने कहा कि 4 सप्ताह में कमेटी गठित की जाए और उसके अगले 3 महीने में जिम्मेदारी तय कर बताएं कि निर्माण की अनुमति किसने दी ।

चेतावनी  : आसपास के एरिया से सीवरेज की गंदगी न पहुंचे लेक में… हाईकोर्ट ने फैसले में कहा- इस बात का ध्यान रखा जाए कि कांसल, कैंबवाला और सकेतड़ी की तरफ से सुखना लेक में सीवरेज की गंदगी न पहुंचे। साथ ही लेक की डी-सिल्टिंग करते समय हर बार सुनिश्चित किया जाए कि लेेक की एवरेज कैपेसिटी एरिया बढ़े। सुखना लेक में पानी के रेगुलर फ्लो के लिए सीवेज की समस्या का भी समाधान करने के निर्देश दिए गए।

लेक को जीवित व्यक्ति का दर्जा दिया… सुखना लेक के सरंक्षण के लिए अलग-अलग 7 याचिकाओं का निपटारा करते हुए लेक को जीवित व्यक्ति का दर्जा दिया और शहर के लोगों को उसका अभिभावक बताया। कोर्ट ने 148 पृष्ठों के फैसले में कहा कि गुरु ग्रंथ साहिब में भी हवा, पानी, धरती और आकाश को ईश्वर का घर और मंदिर बताया है।

 यह है मामला… 
चंडीगढ़ निवासी गौतम खन्ना ने सुखना लेक के कम होते दायरे और सिल्ट की समस्या को लेकर हाईकोर्ट को पत्र लिखा था। हाईकोर्ट ने इस पत्र पर 28 नवंबर 2009 को संज्ञान लेते हुए चंडीगढ़ प्रशासन को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। इसके बाद से इस मामले पर लगातार सुनवाई हो रही है। पत्र में कहा गया था कि सुखना का एरिया ढाई किलोमीटर से कम होकर डेढ़ किलोमीटर रह गया है। साथ ही लेक के आसपास अवैध निर्माण भी हो रहे हैं। 

नयागांव का मास्टर प्लान 2021 अवैध करार…
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में नया गांव के मास्टर प्लान 2021 को भी अवैध माना है। इसकी अधिसूचना 2 जनवरी 2009 को जारी की गई थी। बेंच ने इसके साथ ही 21 सितंबर 2004 के सर्वे ऑफ इंडिया के मैप के मुताबिक श्री माता मनसा देवी अर्बन कॉम्पलैक्स एरिया को भी सुखना कैचमेंट का हिस्सा मानते हुए अवैध माना है।