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Posted by Surinder Verma on Wednesday, June 17, 2020

बिजली निगम ने संड्री चार्ज के नाम पर Rs.56,487 बिल में गलत तरीके से भेजे, 5 हजार पैनल्टी लगी

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बिजली निगम द्वारा पुराने मीटर को स्लो बताते हुए उपभोक्ता पर संड्री चार्ज के नाम पर 56,487 रुपए वसूलने की कोशिश को उपभोक्ता फोरम ने नियमों के विपरीत पाते हुए गलत करार दिया है। फोरम के चेयरमैन गुलाब सिंह, सदस्य जवाहरलाल गुप्ता व गीता प्रकाश ने सुनवाई के दौरान पाया कि यह चार्ज नियमों के विरुद्ध किया गया है। इससे उपभोक्ता के अधिकारों का हनन हुआ है। उन्होंने फैसला सुनाते हुए बिजली निगम को सुधार के बाद बिल जारी करने, पांच हजार रुपए की पैनल्टी व दो हजार रुपए लिटीगेशन कोस्ट देने के आदेश दिए। बिजली निगम को डायरेक्शन दी कि आदेश जारी होने की तिथि से जब तक पांच हजार रुपए का भुगतान नहीं हो जाता उस तिथि तक सात फीसदी ब्याज भी देना होगा।

मॉडल कॉलोनी के रहने वाले निशांत कुमार को बिजली िनगम ने जनवरी 2018 में 58,135 रुपए बिल भेजा। इसमें संड्री चार्ज के नाम से 56,487 रुपए चार्ज किए गए थे। इस पर निशांत ने बिजली निगम के एसडीओ व एक्सईएन से मुलाकात कर बिल ठीक कराने की अपील की। अधिकारियों ने उन्हें बताया कि जब जनवरी 216 बिजली का मीटर घर से बाहर लाकर नया लगाया गया तो लैब में जांच दौरान पुराना मीटर स्लो मिला है। अॉडिट टीम ने नवंबर 2014 से जनवरी 2016 (जब मीटर बदला गया) पीरियड का चार्ज किया है। उन्होंने ओडिट की कॉपी भी निशांत को दी। निशांत ने कहा कि ओडिट टीम भला उस पर कैसे चार्ज कर सकती है। उसे उपभोक्ता से चार्ज वसूलने का अधिकार नहीं है। उस पर उसने पूरे मामले को उपभोक्ता फोरम में रखा।



बिजली निगम के अफसरों द्वारा गलत बिज भेजने पर और चिकित्सक द्वारा झूठी याचिका लगाने पर लगा जुर्माना

फोरम की पीठ के सवालों का जवाब नहीं दे सके बिजली निगम अधिकारी: सुनवाई में उपभोक्ता फोरम के चेयरमैन गुलाब सिंह, सदस्य जवाहर लाल गुप्ता व गीता प्रकाश की पीठ ने बिजली निगम के अधिकारियों से पूछा कि उन्होंने मीटर उतारते समय उपभोक्ता को बताया था कि मीटर में कोई खराबी है। क्या निश्चित प्रफार्मों भरवाया था, क्या जब मीटर लैब में जांचा गया तो वहां पर उपभोक्ता था? इस पर निगम अधिकारी संतोषजनक जवाब या डाक्यूमेंट पेश नहीं कर पाए। फाेरम ने निगम के संड्री चार्ज करने के नियम को गलत करार दिया और आदेश दिया कि 56,487 रुपए का करेक्शन कर उपभोक्ता को नया बिल दिया जाए, पांच हजार रुपए पैनाल्टी व दो हजार रुपए लिटीगेशन कोस्ट के रूप में उपभोक्ता को दिए जाएं।

गलत शिकायत भेजने पर अस्पताल के डॉक्टर की याचिका खारिज, 5 हजार जुर्माना भी लगा

भास्कर न्यूज | यमुनानगर

डिस्ट्रिक कंज्यूमर फोरम ने जगाधरी के वरदान अस्पताल के डॉ. राजेश बंसल पर पांच हजार रुपए की पैनल्टी लगाई है। बंसल ने चालाकी से अग्रणी इलेक्ट्रिकल कंपनी हेवल्स के स्थानीय डीलर को फोरम में पार्टी बनाया था। फोरम ने एक महीने के भीतर डॉ. बंसल को पैनल्टी की रकम जमा करवाने के आदेश दिए हैं।

दरअसल डॉक्टर राजेश बंसल ने 20 जुलाई 2015 को डिस्ट्रिक कंज्यूमर फोरम में एक याचिका दायर की थी। बंसल ने कहा था कि 23 अप्रैल 2014 को उसने हेवल्स कंपनी की 125 एएमपी टीपीएन एमसीसीबी 4500 रुपए में खरीदा था। इस उपकरण का इस्तेमाल आमतौर पर अचानक हाई वोल्टेज के बाद होने वाले शॉर्ट सर्किट को रोकने के लिए किया जाता है। डॉ. बंसल ने बताया कि 17 जनवरी 2015 को अचानक हाई वोल्टेज की वजह से उसके अस्पताल में मल्टीपारा मोनिटर्स, नेबुलाइर्स, एलईडी लाइट्स, इनक्यूबेटर, डायलसिस मशीन, एक्सरे मशीन खराब हो गई। खरीदे गए उपकरण ने कोई काम नहीं किया। जिसके कारण अस्पताल के मरीजों को भी परेशानी हुई। याचिका में डॉ. बंसल ने श्याम नगर स्थित हेवल्स कंपनी के स्थानीय डीलर के साथ बठिंडा की भंडारी इंजीनियरिंग कंपनी व हेवल्स इंडिया लिमिटेड को भी पार्टी बनाया था।



मेरा खरीद से कोई सरोकार नहीं : डीलर

कंज्यूमर फोरम में सुनवाई के दौरान हेवल्स के स्थानीय डीलर ने साफ कहा कि डॉ. राजेश बंसल ने न तो उनकी दुकान से कोई उपकरण खरीदा था। न ही उसने डॉ. बंसल को कोई उपकरण खरीदने की सलाह दी थी। उसका आरोप था कि लाभ लेने के चक्कर में डॉ. बंसल ने उसे पार्टी बनाया है। सुनवाई के दौरान डॉ. बंसल भी ऐसा कोई बिल फोरम के सामने पेश नहीं कर पाए जिससे यह साबित हो सके कि खराब उपकरण स्थानीय डीलर से खरीदा गया है। इसी वजह से फोरम ने डॉ. बंसल की याचिका खारिज कर उन पर पांच हजार रुपए की पैनल्टी लगाई है।