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Posted by Surinder Verma on Wednesday, June 17, 2020

डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्टेट इंस्टीट्यूट की डायरेक्टर प्रिंसिपल की नियुक्ति पर पंजाब -हरियाणा हाईकोर्ट ने रोक लगाई

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आवेदन करने की अंतिम तिथि से पहले शुद्धिपत्र के जरिये क्राइटेरिया में तब्दीली करने पर पीजीआई, चण्डीगढ़ की प्रोफेसर ने ली अदालत की शरण
चंडीगढ़, सुनीता शास्त्री।डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस, से. 56, मोहाली की डायरेक्टर प्रिंसिपल की पोस्ट पर नियुक्ति पर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है। प्राप्त विवरण के मुताबिक बीती 30 अक्तूबर को इस संस्थान में डायरेक्टर प्रिंसिपल की पोस्ट का विज्ञापन अखबारों में प्रकाशित हुआ था। आवेदन करने की अंतिम तिथि 22 नवंबर से कुछ दिन पहले ही 17 नवंबर को एक शुद्धिपत्र के जरिए इस पोस्ट के लिए क्राइटेरिया में तब्दीली कर दी गई। नियमों के मुताबिक उक्त पद हेतु केवल उन्हीं डॉक्टर्स को योग्य माना जाता है जिन्हें किसी मैडिकल कॉलेज या संस्थान में प्रोफेसर अथवा असिस्टेंट प्रोफेसर के तौर पर कम से कम दस वर्ष का अध्यापन का अनुभव हो तथा साथ ही इनमें से पांच वर्ष तक किसी विभाग में प्रोफेसर के पद पर कार्यरत रहा होना चाहिए। लेकिन इस शुद्धिपत्र के उन डॉक्टर्स को भी आवेदन भरने में छूट दे दी गई जिन्हें प्रोफेसर के पद पर पांच वर्ष से कम का तथा एडिशनल प्रोफेसर का पांच वर्ष का अनुभव हो एवं लेवल 13 (सातवां वेतन आयोग) के बराबर या अधिक पे-स्केल पाता हो। याचिकाकर्ता डॉ. (सुश्री) उमाशंकर साइकिया, जो पीजीआई, चंण्डीगढ के हिस्टोपैथोलाजी विभाग में प्रोफेसर नियुक्त हैं, ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में दायर अपनी याचिका में कहा है कि ऐसा करते हुए मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया के नियमों को दरकिनार कर दिया गया। इसके अलावा न तो आवेदन करने की तिथि बढ़ाई गई और न ही अन्य आवेदकों को इस बारे में सूचित किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसा पीजीआई, चंण्डीगढ में ही पेडियाट्रिक्स मेडिसिन विभाग में बतौर प्रोफेसर कार्यरत डॉ. (सुश्री) भवनीत भारती को फायदा पहुंचाने के लिए किया गया। इस पद के लिए कुल 5 आवेदन आए जिनमें डॉ. भवनीत भारती का चयन कर लिया गया।उनकेचयन से यह साफ हो गया था कि क्राइटेरिया में तब्दीली किसी खास मकसद से की गई थी। डॉ. साइकिया, जिन्हें वर्किंग फैकल्टी के तौर पर बीस वर्ष का अनुभव है तथा पीजीआई के हिस्टोपैथोलाजी विभाग में बतौर प्रोफेसर साढ़े सात वर्ष से कार्यरत हैं, ने अपने वकीलों जीवन गौतम व एस डी बंसल के माध्यम से पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में इस नियुक्ति के खिलाफ याचिका दायर कर दी जिस पर सुनवाई करते हुए माननीय जज जीएस संधावालिया ने स्टे लगा दी वो इस मामले में अगली सुनवाई के लिए 12 फरवरी 2021 की तारीख दी है।