बसंत ऋतु के शुभ आगमन का संदेश देती हुई पत्रिका कवितावली के फरवरी 2026 का अंक जो हमारी शाश्वत परंपरा का वाहक बनकर आपके समक्ष संवेदनात्मक वैभव और काव्य चेतना की अक्षय ज्योति को प्रज्वलित करेगा। ऐसे शुभ अंक का अनावरण कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रसिद्ध अभिनेता, निर्देशक और निर्माता संजय मल्होत्रा के कर कमलों द्वारा संपन्न हुआ।
अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ऑनलाइन माध्यम से साहित्यकारों को जोड़ने वाले आयोजक, ग्रेट ब्रिटेन से पत्रिका के मुख्य संपादक डॉ. सुरेश पुष्पाकर जी ने कहा कि संजय मल्होत्रा उन विरले कलाकारों में से हैं जिन्होंने कैमरे के सामने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया और कैमरे के पीछे भी कहानी कहने की कला को एक नई ऊंचाई प्रदान की। संजय मल्होत्रा तकनीक और भावना के बीच अद्भुत संतुलन रखते हैं उनकी फिल्मों में एक गहरा अनुभव और सामाजिक संवेदना होती है।
मुख्य अतिथि संजय मल्होत्रा जी ने अनावरण करते हुए कवितावली पत्रिका की साज- सज्जा, चित्रकारी और इनमें प्रकाशित रचनाओं की भरपूर प्रशंसा की। इस अनावरण के शुभ अवसर पर देश- विदेश से अनेक रचनाकार जुड़े रहे। संपादकीय मंडल से डॉ विजय कपूर, ईनू शर्मा, कमल अरोड़ा, डॉ संतोष गर्ग, निर्लेप होरा, डॉ कृष्णा गोयल, गणेश दत्त बजाज, मंजूषा राजाभोज, नीरज तंवर, मुस्कान सहगल आदि रचनाकार भी जुड़े रहे।
कार्यक्रम के दूसरे चरण में कविताओं के माध्यम से सभी रचनाकारों ने समाज को संवेदनात्मक संदेश दिए। प्रसिद्ध साहित्यकारा डॉ निर्मल सूद ने कहा कि थोड़ी खुशियां जेब में भरकर निकलो, आंसू पोंछ दुखियों के, हौले से हंसी थमा दो। निर्लेप होरा ने गीत के माध्यम से कहा कि यूं किसी का दिल जलाना अच्छी बात नहीं।।
कवयित्री रेखा मित्तल ने कहा कि कोई पूछे कौन हूं मैं, तो कह देना कुछ खास नहीं।
डॉ. सुरेश पुष्पाकर ने अपनी लघुकथा के माध्यम से दर्शकों को संदेश दिया कि संघर्ष न कभी खत्म होता है और न ही वह किसी को पराजित कर पाता है। संघर्ष तो जीवन का रंग मंच है जहां हर बार उतरने वाला कलाकार नई ऊर्जा लेकर लौटता है और कहा कि जीवन का असली रंग संघर्ष है जो उसे मजबूत बनाता है।
कवितावली पत्रिका के सलाहकार संपादक, सुप्रसिद्ध कलाकार अभिनेता कमल अरोड़ा जी ने अपनी कविता के माध्यम से संदेश दिया कि जिसने जन्म दिया, पाला पोसा बड़ा किया, उसे कभी वृद्धाश्रम में छोड़ो मत।
डॉ संतोष गर्ग ने अपनी काव्य रूपी प्रार्थना के शब्दों में कहा कि मेरे इस देश का भगवन् ,न हो कभी बाल भी बांका। इसके साथ ही डॉ पवन कुमार जैन, कवयित्री ललिता पुरी, कुसुम धीमान, प्रेरणा तलवार आदि रचनाकारों ने भी अपनी कविताएं प्रस्तुत की और कार्यक्रम के अंत में डॉ. विजय कपूर ने सभी उपस्थित रचनाकारों का धन्यवाद किया।




















