Mirror 365 - NEWS THAT MATTERS

Dear Friends, Mirror365 launches new logo animation for its web identity. Please view, LIKE and share. Best Regards www.mirror365.com

Posted by Surinder Verma on Wednesday, June 17, 2020

युवा फिल्म निर्माताओं ने बनायी लघु फिल्म पिंड्स ऑफ पंजाब , जातिगत भेदभाव और नशीली दवाओं के दुरुपयोग को दर्शाया

0
395

चंडीगढ़,सुनीता शास्त्री। पंजाबी फिल्म उद्योग के बंधे-बंधाये ढर्रे को तोड़ते हुए, शहर के कुछ युवा एवं उत्साही फिल्म निर्माताओं ने सिनेमाई वास्तविकता की कॉन्सेप्ट का उपयोग करके 15 मिनट की एक छोटी फिल्म ‘पिंड्स ऑफ पंजाब तैयार की है। सिनेमाई यथार्थवाद फिल्म बनाने की एक प्रकार की शैली है जो पात्रों को वैसे ही प्रस्तुत करती है जैसे कि वे असली जिंदगी में होते हैं। यह शैली दर्शकों के बीच यथार्थवादी अनुभव स्थापित करती है। ट्रान्ज़ा स्टूडियो के बैनर तले यह फिल्म हाल ही में यूट्यूब पर रिलीज हुई है।स्वतंत्र लघु फिल्म में मादक द्रव्यों के सेवन और जाति आधारित भेदभाव जैसे मुद्दों को छूकर वर्तमान ग्रामीण पंजाब के विभिन्न रंगों को दर्शाया गया है।ट्रान्ज़ा के संस्थापक और एमडी, 20 वर्षीय निशांत सिंह भिंडर, जिन्होंने पिंड्स ऑफ पंजाब का निर्देशन और लेखन किया है, ने कहा, ‘इस लघु फिल्म में पंजाबी सिनेमा की धारणा को बदलने की क्षमता है, क्योंकि इसे भारत और दुनिया के अन्य हिस्सों में देखा गया है। यह पंजाबी सिनेमा का एक नया अवतार पेश करती है। कहानी को वास्तविक रूप से और बिना ज्यादा धूमधड़ाके के दिखाया गया है। यह भी एक तथ्य है कि फिल्म की शैली अपराध थ्रिलर वाली है, जिससे यह एक अलग ही श्रेणी में आ जाती है। ‘पंजाबी सिनेमा जगत के एक जाने-माने अभिनेता और लेखक अक्श मेहराज ने फिल्म के संवाद लिखे हैं और इसमें अभिनय भी किया है।अनमोल सिद्धू (26), इसके क्रिएटिव डायरेक्टर हैं, उन्होंने कहा, ‘पंजाबी सिनेमा में शैली का ध्यान कम ही रखा जाता है और इस फिल्म में कहानी कहने व शूटिंग की नयी शैली का प्रयोग किया गया है। यह कहानी एक दंपति के जीवन के इर्द-गिर्द घूमती है। लडक़ी एक प्रमुख जमींदार की बेटी है और बिहार के एक प्रवासी मजदूर के साथ भाग जाती है, जो कि एक निम्न जाति का है, जबकि लडक़ी जाट सिख परिवार से है। कहानी में आगे दिखाया गया है कि दंपति को र्किन बाधाओं का सामना करना पड़ता है, जैसे जबरन वसूली, ड्रग्स, और जातिगत भेदभाव।उल्लेखनीय है कि ट्रान्ज़ा स्टूडियो, चंडीगढ़ में स्थित युवाओं की एक टीम ने स्थापित किया है, और यह भारत, आयरलैंड और कनाडा में सक्रिय है। पिछले 3 वर्षों में, स्टूडियो ने दो फीचर फिल्मों और आठ लघु फिल्मों का सफलतापूर्वक वितरण किया है, जिन्हें राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय फिल्म समारोहों में भी मान्यता मिली है।सिनेमा टोग्राफर एवं निर्माता, अंगद सिंह (20) ने कहा, ‘यह लघु फिल्म कुछ नया पेश करती है। इसके करेक्टर लोगों को अपने जैसे लगते हैं और फिल्म का चित्रण काफी स्वाभाविक है। इन पहलुओं के चलते हमें यकीन है कि कुछ ऐसा होगा जो दर्शकों को पसंद आएगां संगीत देने वाले जपप्रीत सिंह (24) ने कहा, ‘फिल्म में प्रत्येक स्थान और करेक्टर के साथ एक खास संगीत वाद्ययंत्र को जोड़ा गया है। इन सबके मेल से फिल्म के संगीत को एक खास टच मिला है।’ु अभिनेत्री हशनीन चौहान हैं, जिन्होंने इससे पहले यार जिगरी कसूटी डिग्री और डाकुआं दा मुंडा जैसी फि़ल्मों में अभिनय किया है। अन्य अभिनेताओं में शिवम और गगन गिल के नाम उल्लेखनीय हैं। दोनों थिएटर कलाकार हैं। जसनूर देओल ने फिल्म में एक अभिनेता के रूप में कैरियर की शुरुआत की है।दिवजोत एस. जट्टाना और पीयूष सिंगला इसके कार्यकारी निर्माता हैं, जबकि गुरबाज माकन पोस्ट प्रोडक्शन सुपरवाइजर, उदय जैन ओसवाल, डीआई (डिजिटल इंटरमीडियरी) कलरिस्ट और सौरभ अरोड़ा वीएफएक्स (विजुअल इफेक्ट्स) सुपरवाइजर हैं। आर्यन शर्मा और दिवजोत एस. जट्टाना ने यूनिट प्रोडक्शन मैनेजर की भूमिका निभायी है।