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Posted by Surinder Verma on Wednesday, June 17, 2020

3 महिलाएं, जो दशकों तक संघर्ष करती रहीं, अब पद्मश्री से सम्मानित हुईं

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नई दिल्ली/पटना/रांची.पिछले दिनों केंद्र सरकार ने 112 लोगों को पद्म पुरस्कार से सम्मानित किया। इनमें बिहार की किसान चाची के नाम से मशहूर राजकुमारी देवी, झारखंड की जमुना टुडू (लेडी टार्जन) और जर्मनी की फ्रेडरिक इरीना ब्रूनिंग (सुदेवी माताजी) शामिल हैं। तीनों महिलाओं ने अपने जीवन में दशकों संघर्ष किया और एक मुकाम पाया। अबतीनों कोपद्मश्री सेसम्मानित किया गया है।दैनिक भास्कर मोबाइल ऐप ने तीनों की प्रेरक कहानियां जानीं।

सरकार ने एक विदेशी समेत चार हस्तियों को पद्म विभूषण, दो विदेशी समेत 14 लोगों को पद्म भूषण और आठ विदेशी समेत 94 लोगों को पद्मश्री से सम्मानित किया है। 2018 तक 4502 हस्तियों को पद्म पुरस्कार दिए जा चुके हैं।

  1. आनंदपुर (मुजफ्फरपुर).63 साल कीराजकुमारी देवी कोलोग किसान चाची पुकारते हैं। मुजफ्फरपुर जिले के आनंदपुर गांव में रहने वाली राजकुमारी की शादी 1974 में हुई थी। लंबे समय तक संतान नहीं हुई तो ससुराल में ताने सहे। 1983 में बेटी पैदा हुई, तब भी ताने ही मिले। घर से अलग कर दी गईं। खेती करने लगीं। वैज्ञानिक तरीके अपनाए। अचार-मुरब्बा बनाकर साइकिल से बाजार बेचने जाने लगीं।

    महिला का बाजार जाकर उत्पाद बेचना समाज पचा नहीं पाया। बहिष्कार कर दिया। लेकिन, वह रुकीं नहीं। 2003 में किसान मेले में उनके उत्पाद को पुरस्कार मिला। सीएम घर आए। अब किसान चाची के साथ 250 महिलाएं जुड़ी हैं, जो अचार-मुरब्बा तैयार करती हैं। अब वह साइकिल के बजाए स्कूटी से चलती हैं। उनके प्रोडक्ट विदेशों में निर्यात होते हैं।

    अमिताभ केबीसी में बुला चुके हैं, मोदी तारीफें कर चुके हैं:2006 में किसान श्री सम्मान मिला। यहीं से किसान चाची नाम पड़ा। वाइब्रेंट गुजरात-2013 में आमंत्रित की गईं। तब मुख्यमंत्री रहे नरेंद्र मोदी ने उनका फूड प्रोसेसिंग मॉडल सरकारी वेबसाइट पर डाला। 2015 और 2016 में अमिताभ बच्चन ने केबीसी में बुलाया था।

  2. घाटशिला (झारखंड). झारखंड के सिंहभूम जिले की 38 साल की जमुना टूडू लेडी टार्जन के नाम लोकप्रिय हैं।बात 1998 की है, जब जमना की शादी बेडाडीह टोला गांव में हुईं थी। जमुना को लगा कि उनके गांव के आसपास जंगलों की ज्यादा कटाई हो रही है। जमुना ने गांववालों से कटाई रोकने को कहा, लेकिन किसी ने साथ नहीं दिया।

    जमुना ने हार नहीं मानी और चार महिलाओं को साथ जोड़कर जंगल को कटाई से बचाने के लिए वन माफिया से भिड़ गईं। 2004 में वन रक्षक समिति बनाई, जिससे गांव की 60 महिलाएं जुड़ीं। देखते ही देखते पुरुषों को भी साथ आना पड़ा। अब 300 महिलाओं का ग्रुप है, जो इलाके में जंगल काटने नहीं देता। पूरा गांव पेड़ों को राखी बांधता है। बेटी पैदा होने पर 18 पौधे रोपने की परंपरा है। विवाह के वक्त 10 पौधे परिवार को दिए जाते हैं। यह परंपरा जमुना ने ही शुरू कराई थी।

    जमुना देश की प्रथम 100 महिलाओं में शामिल रही हैं :जंगल बचाने की मुहिम को देखते हुए जमुना को 2013 में फिलिप्स ब्रेवरी अवाॅर्ड से सम्मानित किया गया। 2014 में उन्हें स्त्री शक्ति अवाॅर्ड मिला। 2016 में देश की प्रथम 100 महिलाओं में शामिल की गईं। राष्ट्रपति ने उन्हें दिल्ली बुलाकर सम्मानित किया।

  3. नई दिल्ली.जर्मनी की नागरिक फ्रेडरिक इरीना ब्रूनिंग 1978 में सिर्फ 20 साल की थीं, जब थाईलैंड, सिंगापुर, इंडोनेशिया और नेपाल की सैर पर निकली थीं। लेकिन, ब्रज में ही बस गईं। यहां गाय खरीदी। फ्रेडरिक ने कहा- ‘उसके बाद मेरी जिंदगी पूरी तरह से बदल गई। मैंने गायों पर ढेरों किताबें खरीदीं और हिंदी सीखी। जब गाय बूढ़ी होकर दूध देना बंद कर देती है तो लोग उसे छोड़ देते हैं। मैं ऐसी गायें को एक जगह लाकर उनकी देखरेख करती हूं।’ इसी काम की वजह से फ्रेडरिक सुदेवी माताजी के नाम से जानी जाने लगीं।

    उन्होंने एक गोशाला शुरू की। 41 साल में वह लाखों गायों को पाल चुकी हैं। अभी उनके पास 1200 गायें हैं, जो दूध नहीं देतीं। लोग बीमार या घायल गायों को आश्रम के बाहर छोड़कर जाते हैं। फ्रेडरिक उन गायों के इलाज और पालने का जिम्मा उठा रही हैं।

    हर महीने 25 लाख खर्च; कुछ दान है, कुछ पुश्तैनी संपत्ति से :गोशाला में 60 लोग काम करते हैं। उनका परिवार भी गोशाला से चलता है। हर महीने गोशाला पर 25 लाख रुपए खर्च होते हैं। यह राशि वह बर्लिन में अपनी पुश्तैनी संपत्ति से मिलने वाले किराए और यहां लोगों से मिलने वाले दान से जुटाती हैं।

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      Inspiring Stories of 3 Women