बीपीएल परिवार के दो कमरों के मकान के लिए सरकार ने दो साल में दी ग्रांट, नया घर तैयार हुआ ही था कि पुराने की छत गिरी, दो मासूमों की मौत
भास्कर न्यूज | यमुनानगर/ सरस्वतीनगर
गांव सारन में कच्चे मकान की छत गिरने से दो भाइयों की मौत हो गई। टपकती छत के नीचे इन्होंने पता नहीं कितने बारिश के सीजन निकाल दिए। मकान बनाने की सरकारी योजना भी इनके घर तक रेंगते हुए पहुंची, लेकिन दो कमरों के मकान के लिए ग्रांट देने में अधिकारियों ने दो साल लगा दिए। मकान पूरा न बनने से वे टपकती छत के नीचे ही रहने को मजबूर थे। अब जाकर मकान बना था, बरसात को देखते हुए परिवार कच्ची छत के कमरे से सामान शिफ्ट करने की प्लानिंग बना ही रहा था कि छत गिर गई। इसके नीचे दबने से 11 साल के मनप्रीत और 8 साल के रजत की मौत हो गई। उनका बीमार पिता राजेश बाल-बाल बच गए। सारन निवासी राजेश के परिवार जैसे कई परिवार हैं, जोकि मकान बनाने की सरकारी ग्रांट मिलने की उम्मीद में कई माह से कच्ची छतों के नीचे रहने को मजबूर हैं। बसपा के नरेश सारन, जजबा की प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. रणजीत कौर परिवार को सांत्वना देने पहुंची।
रजत (8) और मनप्रीत (11) के फाइल फोटो।
सरस्वतीनगर | मनप्रीत और रजत की मां डिंपल विलाप करती हुईं व मकान की गिरी कच्ची छत।
मां और तीन साल का बेटा इसलिए बच गए क्योंकि फोन आ गया था
हादसे का शिकार हुए बच्चों की मां डिंपल ने बताया कि रात करीब नौ बजे तेज बारिश आ रही थी। तभी उसके पास रिश्तेदारी से फोन आया। वह तीन साल के बेटे कर्ण को लेकर कमरे से बाहर आ गई। इसी दौरान कमरे की छत गिर गई और उसमें बड़ा बेटा मनप्रीत और दूसरा बेटा रजत दब गए। हालांकि उनका पति राजेश बाल-बाल बच गया।
राजमिस्त्री पिता खुद का घर न बना सके
मनप्रीत और रजत का पिता राजेश बीमार हैं। उसे शुगर व अन्य बीमारियों ने घेर रखा है। वह चारपाई पर ही लेटे रहते हैं। राजेश राजमिस्त्री थे। बीमारी के चलते वे काम नहीं कर पाते। उन्होंने राजमिस्त्री होते हुए काफी लोगों के घर बनाए, लेकिन अपना नहीं बना पाए। राजेश के पुराने मकान में दो कमरे, रसोई और बरामदा है। जिस कमरे में परिवार सोता था, उसकी पीछे की एक दीवार कच्ची थी। तीन दिन से बारिश के चलते वह दरक गई। जैसे ही वह गिरी तो छत गिर गई। इसके नीचे दोनों भाई दब गए। रात को बिजली न होने के बाद भी उन्हें मात्र 10 मिनट में ही ग्रामीणों ने मलबे से निकाल लिया, लेकिन नहीं बचे।
3 किस्तों में मिलते हैं आवास योजना के पैसे
बीपीएल परिवारों को आवास योजना में मकान बनाने के लिए सरकार की तरफ से करीब डेढ़ लाख रुपए की ग्रांट दी जाती है। यह ग्रांट तीन किस्तों में दी जाती है। पहली किस्त का पैसा खर्च होने पर दूसरी किस्त दी जाती है और दूसरी किस्त का पैसा खर्च होने पर तीसरी किस्त। कोई भी किस्त सरकार की तरफ से समय पर नहीं दी जाती। इसलिए इस तरह के हादसे होते हैं।


















