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Posted by Surinder Verma on Wednesday, June 17, 2020

पंजाब विश्वविद्यालय द्वारा संचालित संस्कृत संस्थान विश्वेश्वरानन्द विश्वबन्धु साधु आश्रम, होशियारपुर में ‘वेदार्थनिर्णयमें आख्यानों की उपयोगिता’ विषयपर दिनांक 20.2.2023 को कार्यशाला का उद्घाटन हुआ।

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Chandigarh March 16, 2023

महर्षिविश्वामित्र वेदवेदांग कार्यशाला

दिनांक 20 फरवरीसे26 फरवरीतक

            पंजाब विश्वविद्यालय द्वारा संचालित संस्कृत संस्थान विश्वेश्वरानन्द विश्वबन्धु साधु आश्रम, होशियारपुर में वेदार्थनिर्णयमें आख्यानों की उपयोगिता विषयपर दिनांक 20.2.2023 को कार्यशाला का उद्घाटन हुआ। इस कार्यशाला में लगभग 40 से अधिक संस्कृत छात्रों ने सस्वर वेदपाठ मंत्रोच्चारण के प्रशिक्षण के लिए पंजीकरण करवाया। श्री दंडी स्वामी संस्कृत महाविद्यालय, लुधियाना से पधारे पंडित प्रणब तिवारी, पंडित संस्कार त्रिपाठी ने इन विद्यार्थियों को मंत्रोच्चारण का प्रशिक्षण देना प्रारंभ किया जो की दिनांक 26.2.2023 तक चलता रहा।

            दिनांक 25.2.2023 को महर्षि विश्वामित्र वेद-वेदांग कार्यशाला में संस्थान से सेवा निवृत्त प्रो. रघबीर सिंह ने वेद मन्त्रों के अर्थ ज्ञान को समझने के लिए आख्यानों की उपयोगिता तथा विभिन्न भाष्यकारों का परिचय देते हुए वैदिक एवं लौकिक व्याकरण के भेद से प्रकाश डाला। सत्र के द्वितीय व्याख्यान में संस्थान से सेवा निवृत्त प्रो. प्रेम लाल शर्मा ने ऋत और सत् का ज्ञान कराते हुए विभिन्न संवाद सूक्तों के माध्यम से वैदिक मन्त्रों का सरल विधि से अर्थ ज्ञान एवं आधुनिक परिप्रेक्ष्य में वेद निहित ज्ञान को सर्वोपरि बताया। इसी श्रृंखला में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से पधारे विशिष्ट वक्ता के रूप में प्रो. ललित गौड़ ने महाभारत एवं समस्त वैदिक साहित्य में निहित विभिन्न कथानकों तथा दृष्टान्तों के माध्यम से वैदिक शब्दों के निर्वचन पर प्रकाश डाला तथा मानव जीवन के लिए उपयोगी वेद मन्त्रों के स्वरूप एवं उच्चारण का ज्ञान कराया। इस सत्र के अंतिम वक्ता के रूप में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से पधारे प्रो. राजेश्वर मिश्र ने वेदार्थ निर्णय में आख्यान एवं उपाख्यानों की परिभाषा तथा महत्त्व को बड़े सरल एवं सारगर्भित रूप से समझाया।

            दिनांक 26.2.2023 को कार्यशाला का समाप्नोत्सव हुआ इस सत्र का प्रारंभ विशिष्ट अतिथि पंजाब विश्वविद्यालय चंडीगढ़ से पधारे प्रो. वीरेन्द्र कुमार अलंकार के वक्तव्य से हुआ। जिसमें उन्होंने वेदों के शाब्दिक अर्थों एवं आख्यानों को सरल तरीके से प्रस्तुत किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता पंजाब विश्वविद्यालय, साधु आश्रम के पूर्व  प्रो. जगदीश प्रसाद सेमवाल ने की। अपने वक्तव्य में उन्होंने वैदिक आख्यानों पर सरल एवं सारगर्भित रूप से प्रकाश डाला। कार्यक्रम की मुख्यातिथि श्रीमती संगीता मित्तल, उपाध्यक्षा- सोनालिका ग्रुप होशियारपुर से रही जिनका स्वागत एवं माल्यार्पण संस्थान की विभागाध्यक्षा प्रो. ऋतु बाला ने किया। जिनके द्वारा विभाग की शोध पत्रिका का विमोचन किया गया तथा संस्थान को उनके द्वारा 2.50 लाख की सहयोग राशी प्रदान की गयी एवं आचार्यों के द्वारा सभी आये हुए अतिथियों को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।

            इस कार्यशाला में सत्कारयोग्य संगीता हांडा, प्रो. इंद्रदत्त उनियाल, प्रो. सुधांशु कुमार षडंगी, प्रो. भद्रसेन, प्रो. कृष्णा मुरारी, प्रो. कृष्णा सैनी, डा. रविन्द्र कुमार बरमोला, डा. रूबी जैन, डा. उदयन, डा. शिव कुमार वर्मा, डा. सांख्यायन, प्रो. कन्हैया लाल पाराशर, प्रेम लाल शर्मा, प्रो. भद्रसेन, प्रो. दलबीर सिंह, श्री कपिल मोहन, श्री भूपेंद्र, आचार्य नितिन विभागीय छात्रों एवं कर्मचारियों की उपस्थिति रही।

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