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Posted by Surinder Verma on Wednesday, June 17, 2020

ई.एस.टी.आई.सी.–2025 का शुभारंभ समारोह और बी.आर.आई.सी.–एन.ए.बी.आई., मोहाली में “डि.ई.एस.आई.जी.एन. फॉर बायो–ई3” प्रतियोगिता का उद्घाटन

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ई.एस.टी.आई.सी.–2025 का शुभारंभ समारोह और बी.आर.आई.सी.–एन.ए.बी.आई., मोहाली में “डि.ई.एस.आई.जी.एन. फॉर बायो–ई3” प्रतियोगिता का उद्घाटन

मोहाली, 16 अक्तूबर: बी.आर.आई.सी.–राष्ट्रीय कृषि–खाद्य एवं जैव–निर्माण संस्थान (बी.आर.आई.सी.–एन.ए.बी.आई.) ने उभरते विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार सम्मेलन (ई.एस.टी.आई.सी.–2025) का शुभारंभ समारोह आयोजित किया और इसी अवसर पर “डि.ई.एस.आई.जी.एन. फॉर बायो–ई3” प्रतियोगिता की शुरुआत की।

ई.एस.टी.आई.सी.–2025 का उद्देश्य भारत एवं विदेशों के वैज्ञानिकों, नवप्रवर्तकों, नीति–निर्माताओं और विशेषज्ञों को एक साझा मंच पर लाना है, ताकि वे नई एवं उभरती प्रौद्योगिकियों पर विचार–विमर्श कर सकें और सामूहिक सहयोग से समाधान विकसित करें। यह सम्मेलन 3 से 5 नवम्बर, 2025 को नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित होगा। इसमें प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार के मार्गदर्शन में 13 मंत्रालय और विभाग सहभागिता करेंगे। सम्मेलन में भारत की विभिन्न उपलब्धियों को 11 प्रमुख क्षेत्रों में प्रदर्शित किया जाएगा, जिनमें जैव–निर्माण क्षेत्र का नेतृत्व जैव प्रौद्योगिकी विभाग (डी.बी.टी.) एवं बी.आर.आई.सी.–एन.ए.बी.आई. द्वारा किया जाएगा।

विकसित भारत 2047 की दृष्टि के अनुरूप, ई.एस.टी.आई.सी. ऐसे मंचों और नीतियों, जैसे बायो–ई3 (अर्थव्यवस्था, पर्यावरण एवं रोजगार के लिए जैव प्रौद्योगिकी) के माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों के बीच सहयोग को प्रोत्साहित करता है, ताकि सतत विकास को बढ़ावा मिल सके।

“डि.ई.एस.आई.जी.एन. फॉर बायो–ई3” एक राष्ट्रीय प्रतियोगिता है, जो अगस्त 2024 में केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा अनुमोदित बायो–ई3 नीति के अंतर्गत आरंभ की गई है। इस प्रतियोगिता के माध्यम से देशभर के कक्षा 6 से 12 तक के विद्यार्थियों को स्वास्थ्य, पर्यावरण और स्थायित्व से जुड़ी वास्तविक समस्याओं के समाधान हेतु जैव–प्रौद्योगिकी आधारित नवाचार प्रस्तुत करने के लिए आमंत्रित किया गया है।

‘डि.ई.एस.आई.जी.एन.’ का अर्थ है — डी – वास्तविक आवश्यकताओं को परिभाषित करना, ई – साक्ष्य को प्राथमिकता देना, एस – डिज़ाइन द्वारा स्थिरता, आई – एकीकरण, जी – बाज़ार तक पहुँच, एन – शुद्ध सकारात्मक प्रभाव।

विद्यार्थी 1 नवम्बर, 2025 से माईगव इनोवेट इंडिया पोर्टल पर अपने विचार प्रस्तुत कर सकेंगे। यह प्रक्रिया एक वर्ष तक प्रत्येक माह संचालित की जाएगी। विजेता प्रतिभागियों को योग्यता प्रमाणपत्र प्रदान किए जाएंगे तथा चयनित विचारों को बायोरैक के ‘यू–युवा’ या ‘बायो–नेस्ट’ कार्यक्रमों के माध्यम से प्रदर्शन एवं ऊष्मायन हेतु सहायता दी जाएगी।

कार्यक्रम की शुरुआत में प्रो. अश्वनी पारीक, कार्यकारी निदेशक, बी.आर.आई.सी.–एन.ए.बी.आई. ने स्वागत भाषण दिया और संस्थान की प्रमुख उपलब्धियों पर प्रकाश डाला। इसके पश्चात् डॉ. गरिमा गुप्ता ने ई.एस.टी.आई.सी.–2025 पर तथा डॉ. वामसी कृष्णा ने “डि.ई.एस.आई.जी.एन. फॉर बायो–ई3” विषय पर विस्तृत प्रस्तुति दी।

इस अवसर पर प्रो. राजेश एस. गोखले, सचिव, जैव प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार एवं श्री प्रियांक भारती, आई.ए.एस., सचिव, विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं पर्यावरण विभाग, पंजाब सरकार, मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

अपने संबोधन में प्रो. राजेश गोखले ने युवाओं को नवाचारपूर्ण विचारों के साथ इन कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी हेतु प्रेरित किया ताकि वे राष्ट्र–निर्माण में योगदान दे सकें। वहीं श्री प्रियांक भारती ने युवाओं से इन पहलों में उत्साहपूर्वक भाग लेने का आह्वान किया।

समारोह का समापन विशिष्ट अतिथियों के प्रेरक संबोधन के साथ हुआ, जिसमें उन्होंने जैव–प्रौद्योगिकी एवं युवा नवाचार की भूमिका को स्थायी और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। कार्यक्रम का समापन धन्यवाद–प्रस्ताव और राष्ट्रगान के साथ हुआ।