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Posted by Surinder Verma on Wednesday, June 17, 2020

नवरात्रि व्रत कल्याणकारी मार्ग की ओर ले जाते हैं .

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नवरात्रि व्रत कल्याणकारी मार्ग की ओर ले जाते हैं .
देवराज त्यागी ,प्राकृतिक चिकित्सक
चंडीगढ़: व्रत अथवा उपवास का भारतीय परंपरा में विशेष महत्व रहा है। विभिन्न धर्म और ग्रंथों ने उपवास के आध्यात्मिक मूल्य पर विशेष ध्यान दिया है. उपवास से आध्यात्मिक लाभों के साथ-साथ शारीरिक स्वास्थ्य लाभ भी होता है .
अभी नवरात्रि शुरू हो रहे हैं हिंदू धर्म में नवरात्रों पर उपवास करने से धार्मिक दृष्टि से बड़ा पुण्य मिलता है लेकिन इसके साथ-साथ शारीरिक स्वास्थ्य भी बेहतर हो जाता है. हमारे धार्मिक महर्षियों ने वर्ष में दो बार ऋतु परिवर्तन के समय नवरात्रि व्रत घोषित किया ताकि लोग उपवास रखकर स्वास्थ्य लाभ ले सकें. नवरात्रों के उपवास की मुख्य विशेषता यह है कि यह मौसम बदलने के अवसरों पर आते हैं. एक बार तब जब मौसम सर्दी से गर्मी की ओर जाता है दूसरी बार तब जब मौसम गर्मी से सर्दी की ओर जाता है. ऋतु परिवर्तन के समय सर्दी, जुकाम, बुखार, पेचिश,अजीर्ण, हैजा इत्यादि रोग शरीर को पकड़ लेते हैं. इस समय का उपवास शारीरिक, बौद्धिक तथा आध्यात्मिक सभी स्तरों पर अपना प्रभाव छोड़ जाता है.9 यह उपवास कल्याणकारी मार्ग की ओर अग्रसर होने की प्रेरणा और क्षमता प्रदान करता है. कई हिंदू धर्म में निर्जल या जल सहित उपवास करने की परंपरा है लेकिन धार्मिक उपवासों का हेतु स्वास्थ्य लाभ का न रहकर पुण्य धर्म लाभ का रहता है. यदि धार्मिक उपवास करने वाले शरीर स्वस्थ को भी ध्यान में रखें और इसको भी पुण्य माने तो उनका उपवास अधिक आनंददाई बन सकता है. स्वास्थ्य का धार्मिकता से विरोध नहीं बल्कि पोषक और पूरक है.

वैज्ञानिकों ने रिसर्च करके बताया है कि शरीर उपवास काल में शरीर पर अतिरिक्त चर्बी -कोश का उपयोग ईंधन के रूप में करता है जिससे उनको विभिन्न अंगों को संचालित करने की शक्ति प्राप्त होती है. अतिरिक्त चर्बी कोष की कमी से शरीर का मोटापा कम होता है ,लेकिन जीवनी शक्ति बढ़ जाती है .
नवरात्रों में हम जो खाएं वह हल्की-फुल्की वस्तु होनी चाहिए व्रत का मतलब यह नहीं की अन्न को छोड़कर हर चीज खाते रहे. इन दिनों में हर चीज में संयम रखना चाहिए . उपवास का मतलब है उसके पास अर्थात प्रभु के पास. हमें भगवान का स्मरण रखना चाहिए. उपवास तो शरीर को विश्राम देने का एक साधन मात्र है. जिससे मानव के इस जटिल और रहस्यपूर्ण शरीर को स्वस्थ लाभ का अवसर मिलता है.
व्रत में रसदार फलों को दिन में चार-पांच बार थोड़ा-थोड़ा करके लिया जा सकता है. इससे खून में शुगर का स्तर सही रहेगा तथा शरीर को शक्ति मिलती रहेगी. व्रत में शरीर का पानी कम हो जाता है इसलिए बार-बार पानी पीते रहे. पानी में नींबू और शहद भी मिला सकते हैं इससे ज्यादा ऊर्जा मिलेगी. शरीर को पूरा पोषण मिले इसके लिए हम दूध एवं दही भी ले सकते हैं . सिंघाड़े का आटा बहुत उपयोगी होता है उसकी रोटी भी बना कर खा सकते हैं. यदि किसी की क्षमता ड्राई फ्रूट खाने की हो तो काजू ,बादाम ,किशमिश, मूंगफली दाना भी दिन में एक बार ले सकते हैं.
देवराज त्यागी
संयोजक
वर्धान नेचरोपैथी एंड योग इंस्टिट्यूट चंडीगढ़
M 9478522333