चंडीगढ़, सुनीता शास्त्री।इंडियन सोसायटी फार असिस्टड रीप्रोडक्शन (ईसर) के शिखर सम्मेलन में संतान सुख हासिल करने के लिए अन्य डाक्टरी उपचार के अलावा गर्भाश्य ट्रांसप्लांट पर भी चर्चा हुई। इस राष्ट्रीय स्तर के सम्मेलन में पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश तथा चंडीगढ़ से प्रसिद्ध स्त्री रोग माहिर, भू्रण वैज्ञानिक तथा प्रजन्न संबंधी माहिर शामिल हुए। ईसर की चेयरपर्सन डा. जी.के. बेदी ने इस सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि इस दूसरे सम्मेलन का मुख्य विषय गर्भाश्य के संबंधित है, जिसमें महिलाओं के स्वास्थ्य के सभी पहलू आ जाते हैं। उन्होंने बताया कि इस सम्मेलन में गर्भाश्य ट्रांस्पलांट पर सबसे ज्यादा जोर दिया गया, जो कि किराए की कोख के बढिया विकल्प के रूप में उभर रहा है। डा. बेदी ने बताया कि दिन-ब-दिन बांझपन के केसों में इजाफा हो रहा है तथा इस समय 10 से 15 महिलाएं इस समस्या से पीडि़त हैं। उन्होंने बताया कि 2014 में स्वीडन में गर्भाश्य ट्रांस्पलाट के बाद पहले बच्चे ने जन्म लिया था, जबकि भारत में गर्भाश्य ट्रांस्पलांट द्वारा पहला बच्चा 2017 में पैदा हुआ था। इंडियन सोसायटी फार असिस्टड रीप्रोडक्शन 1991 में अस्सितत्व में आई थी। इस संस्था की चंडीगढ़ कमेटी में चेयरपर्सन डा. जी.के. बेदी, उप चेयरमैन डा. निर्मल भसीन, सचिव डा. पूजा मेहता, कोषाध्यक्ष डा. रिमी सिंगला, ज्वाइंट सचिव डा. परमिंदर कौर तथा डा. सुनीत चंद्र शामिल हुए।ईसर की प्रधान डा. जयदीप मल्होत्रा ने मुख्य भाषण दिया, जबकि श्रीमती राजबाला मलिक विशेष मेहमान के रूप में शामिल हुए। सरकारी मेडीकल कालेज सेक्टर-32 की डा. रीति मेहरा ने गर्भाश्य में या इसके आसपास रसौली के बारे भाषण दिया। इस सम्मेलन को इस क्षेत्र की माहिर डाक्टरों ने संबोधन किया तथा विचार चर्चा में नगर मेयर राजबाला ने हिस्सा लिया। इस अवसर पर दीपप्रज्जलित करने के बाद उन्होंने कहा कि अब निसंतान माता पिता भी सन्तान सुख प्राप्त कर सकेंगे। डाक्टरों ने गर्भाश्य ट्रांस्पलांट से सिद्ध कर दिया कि डाक्टर भगवान का दूसरा रूप है। वह इंसान को दूसरी जिन्दगी देते हैं।
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Citizen Awareness Group ईसर शिखर सम्मेलन में गर्भाश्य ट्रांस्पलांट तथा बांझपन पर हुई चर्चा- ...
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Posted by Surinder Verma on Wednesday, June 17, 2020


















