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Posted by Surinder Verma on Wednesday, June 17, 2020

‘आत्म बोध से विश्व बोध’ विचार विमर्श के साथ हुआ कुसुम धीमान की पुस्तक ‘विचारमंजरी’ का विमोचन-

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‘आत्म बोध से विश्व बोध’ विचार विमर्श के साथ हुआ कुसुम धीमान की पुस्तक ‘विचारमंजरी’ का विमोचन-

अखिल भारतीय साहित्य परिषद् इकाई पंचकूला एवं टी.एस. सेंट्रल स्टेट लाइब्रेरी के संयुक्त तत्वावधान में सेक्टर 17 लाइब्रेरी सभागार में ‘आत्म बोध से विश्व बोध’ विषय पर विचार गोष्ठी एवं कुसुम धीमान द्वारा लिखित छंद संग्रह ‘विचारमंजरी’ का विमोचन समारोह आयोजित किया गया जिसमें हरियाणा साहित्य एवं संस्कृत अकादमी उपाध्यक्ष डॉ. कुलदीप चंद अग्निहोत्री मुख्य अतिथि के तौर पर उपस्थित रहे। भिवानी से पधारे संस्था के हरियाणा प्रांतीय अध्यक्ष डॉ. मनोज भारत का वक्तव्य आत्मबोध से विश्व बोध तक विशेष सराहनीय रहा। इस शुभ अवसर पर उपाध्यक्ष डॉ. संतोष गर्ग, पंजाब प्रांत अध्यक्ष प्रो. सुनील शर्मा, नाडा साहब मंडल महामंत्री व समाजसेविका श्रीमती पुष्पा सिंगरोहा एवं संवाद साहित्य मंच अध्यक्ष प्रेम विज विशिष्ठ अतिथि के रूप में शामिल रहे। उपरोक्त के अतिरिक्त इकाई मार्गदर्शक सुनीता नैन एवं राजवीर सिंह ‘राज’ भी विशेष तौर पर उपस्थित रहे।
इकाई महासचिव अनिल ‘चिंतक’ ने मंच संचालन करते हुए कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की। पंचकूला इकाई अध्यक्ष डॉ विनोद शर्मा के अतिथि- सम्मान उपरांत, दीप प्रज्ज्वलन के साथ ही सृजन संस्था अध्यक्ष सोमेश गुप्ता ने सरस्वती वंदना से कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ।

कुसुम धीमान ‘कलिका’ द्वारा रचित काव्य संग्रह ‘विचारमंजरी’ का अतिथियों द्वारा विमोचन- उपरांत सारगर्भित समीक्षा अन्नुरानी शर्मा, इकाई उपाध्यक्ष नीरू मित्तल, किदार अदबी ट्रस्ट संयोजक गणेश दत्त बजाज एवं बिलासा महालय से अदिति अत्रे द्वारा प्रस्तुत की गई।

भिवानी से पधारे डॉ. मनोज भारत ने समाज में निरंतर फैलती हुई पाश्चात्य सभ्यता पर चिंता व्यक्त करते हुए, लुप्त होती विवाह प्रथा व तेजी से पाँव पसारती लीव इन रिलेशनशिप प्रथा के दुष्परिणामों से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि संस्कृति को क्षति पहुंचाते टूटते परिवार, कुटुंब की परंपरा पर कुठाराघात करते हैं। इन सभी विषयों पर हमें लेखनी चलाकर समाज को जागृत करने की ओर ध्यान देना चाहिए ताकि हम आत्म बोध से विश्व बोध की तरफ बढ़ सकें।

पंजाब से पधारे प्रोफेसर सुनील ने कहा कि आज के परिवेश में परिषद् जैसी संस्था और संस्कृति को संरक्षण प्रदान करने वाले विषयों का प्रचार प्रसार नितांत आवश्यक है। विशिष्ट अतिथि संतोष गर्ग ने पुस्तक लेखिका कुसुम धीमान के सकारात्मक व्यक्तित्व की भूरि- भूरि प्रशंसा करते हुए केंद्रीय विषय पर अपने विचार रखे।
मुख्य अतिथि डॉ कुलदीप अग्निहोत्री जी ने अपने संबोधन में छंदबद्ध लेखन की सराहना करते हुए सभी को छंद लेखन के प्रति प्रेरित करते हुए कहा कि आज के समाज का पश्चिम संस्कृति के प्रति आकर्षण बेहद चिंताजनक है लेकिन आप जैसे साहित्यकार यदि अपने दायित्व का निर्वहन निरंतरता से करते रहेंगे तो हम अपने लक्ष्य में सफलता पा सकते हैं और अपनी सभ्यता एवं संस्कृति का संरक्षण भी अवश्य कर पाएंगे।

पुस्तक लेखिका कुसुम धीमान ने अपनी लेखन यात्रा के सभी सहयोगियों का धन्यवाद करते हुए कहा कि अपने बेटे अभिनव एवं पुत्रवधु पूजा का आभार प्रकट किया जिन्होंने उनको पुस्तक लेखन के लिए प्रेरित किया। साथ ही शुभकामना सन्देश देने वाले सभी साहित्यकारों का आभार व्यक्त किया।
अंत में इकाई अध्यक्ष डॉ. विनोद शर्मा ने टी एस सेंट्रल लाइब्रेरी के आयोजन कर्ताओं, अतिथियों एवं श्रोताओं का धन्यवाद करते हुए आभार व्यक्त किया।
उपरोक्त के साथ ही मधु धीमान, डॉ. रेखा मित्तल, एम.एल.अरोड़ा, अनिल शाश्वत व किरन शाश्वत, रेणु अब्बी, सरोज व सुशील चोपड़ा, डॉ. संगीता कुंद्रा, सोहन रावत, किरण चौधरी, पुष्पा हंस, संगीता पुखराज, धर्मपाल मठारू,अभिनव व पूजा मठारू, सुनीता व सुधीर गोयल, उषा धीमान, आर. पीताम्बरी, सुषमा जोशी, गरिमा गर्ग, निहाल, सुरेंद्र वर्मा, सीमा शर्मा, श्याम सुंदर, जय प्रकाश, अमित कुमार, पूनम अरोड़ा, श्रुति कुमार, रितिशा, कीर्ति शर्मा, हरिओम शर्मा, कमला रानी, देवांश, उषा, प्रीति एवं कवलजीत सिंह विशेष रूप में उपस्थित रहे।
द्वारा:-
अनिल शर्मा चिंतक, महासचिव अखिल भारतीय साहित्य परिषद पंचकूला इकाई