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Posted by Surinder Verma on Wednesday, June 17, 2020

नौकरी ढुंढने वाले नहीं बल्कि नौकरी देने वाले बनें – राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय।  

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नई शिक्षा नीति में बच्चों को प्राईमरी व उच्च शिक्षा से ही रूचि अनुसार कौशल शिक्षा का प्रवाधान – बच्चे बडे होकर नौकरी ढुंढने वाले नहीं बल्कि नौकरी देने वाले बनें – राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय।
चंडीगढ़,  27 नवम्बर – हरियाणा के  राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय ने कहा कि आज के समय में गुणवत्ता की शिक्षा के साथ-साथ मानवीय मूल्यों पर आधारित नैतिक शिक्षा बच्चों के लिए बेहद जरूरी है। राज्यपाल श्री दत्तात्रेय आज बीपीएस प्लेनेटोरियम अम्बाला छावनी  में   आयोजित मंथन स्कूल लीडरशिप समिट-2021 में उपस्थित निसा (नेशनल इंडिपेंडट स्कूल अलायंस) से जुड़े स्कूलों के प्रतिनिधियों को तथा शिक्षाविदों को बतौर मुख्य अतिथि सम्बोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने निसा द्वारा तैयार की गई एक रिपोर्ट का भी विमोचन किया। इस रिपोर्ट में कोविड-19 के संकट काल के दौरान ऑनलाईन शिक्षा लर्निंग लॉस आदि बच्चों की शिक्षा से सम्बन्धित विषयों पर तैयार की गई है।
उन्होनें कहा कि कोविड-19 के संकटकाल के दौरान सभी वर्ग किसी न किसी रूप में प्रभावित हुए हैं और सबसे ज्यादा नुकसान बच्चों की शिक्षा का हुआ है। हालांकि कोविड -19 प्रेरित महामारी ने हमें शिक्षा में प्रौद्योगिकी के महत्व का एहसास कराया।
उन्होंने कहा कि इस महामारी में बच्चों की शिक्षा में विपरीत प्रभाव पड़ा है। सर्वे में पाया गया है कि 40 प्रतिशत बच्चें ही आनलाईन शिक्षा ग्रहण कर पाए हैं। ऐसे में बच्चों की शिक्षा क्षतिपूर्ति के लिए हमें सिलेबस को दोहराने की आवश्यकता है । इसके लिए टयूटोरियल कक्षाएं शुरू करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि उन्हें इस बात से भी खुशी हो रही है कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में मूल्य आधारित शिक्षा, कौशल व व्यवसायिक शिक्षा तथा बच्चों के समग्र विकास पर काफी जोर दिया गया है। नई शिक्षा नीति में यह भी प्रावधान किया गया है कि बच्चों को प्राईमरी व उच्च शिक्षा से ही उनकी रूचि अनुसार कौशल शिक्षा दी जाए ताकि ये बच्चे बडे होकर नौकरी ढुंढने वाले नहीं बल्कि नौकरी देने वाले बनें।
उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य और शिक्षा सेवाए पैसे कमाने के लिए नहीं हैं। आज कम्पीटीशन का युग है। ऐसे में अंग्रेजी के महंगे स्कूलों में पढे हुए बच्चे आगे निकल जाते है। और ग्रामीण बच्चे अंग्रेजी न आने से हीन भावना का शिकार हो जाते है। ऐेसे में उन बच्चों की ओर भी विशेष ध्यान देने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि अंग्रेजी के साथ-साथ अपनी मातृभाषा का भी ज्ञान बच्चे दिल से प्राप्त करें। उन्होंने कहा कि जो शिक्षा दिल से प्राप्त की जाती है उससे अच्छे संस्कार आते हैं और व्यक्ति समाज में एक अच्छा नागरिक बनकर देश के विकास में अपना योगदान देता है।
श्री दत्तात्रेय ने कहा कि 70 साल में पहली बार प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में तैयार की गई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में मातृभाषा को बढावा दिया गया है। इससे ग्रामीण क्षेत्र के बच्चे सभी प्रकार की शिक्षा अपनी मातृभाषा में ग्रहण कर कम्पीटिशन में आगे निकल पाएगें।
उन्होंने यह भी कहा कि हरियाणा सरकार ने गुणवता की शिक्षा के साथ बच्चों की खेल गतिविधियों पर फोकस किया है। हरियाणा राज्य में ग्यारह सौ से अधिक सरकारी प्ले स्कूल कार्यरत हैं। सुपर-100 कार्यक्रम के तहत गरीब मेधावी छात्रों को जेईई-नीट परीक्षा के लिए निशुल्क कोचिंग दी जा रही है। इस साल सुपर-100 के 26 छात्रों को आईआईटी में दाखिले के लिए चुना गया है। यह हम सब के लिए गर्व की बात है।
उन्होंने कहा कि कल ही हमने अपना संविधान दिवस मनाया है । सभी स्कूलों में एक पीरियड कक्षा ऐसी होनी चाहिए जिसमें सवैधानिक, मूल्यों, देशभक्ति, समानता, न्याय, बंधुत्व और स्वतंत्रता के बारे छात्रों को शिक्षा दी जाए ताकि हमारे स्कूल आदर्श नागरिक बना सकें । उन्होंनें कहा कि हमें बच्चों को नेशन फर्स्ट की भावना के साथ सर्वागींण विकास करना है। प्रत्येक बच्चे को स्काउट्स एनसीसी, एनएसएस, खेल और कई अन्य रचनात्मक गतिविधियों में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करें, जिसके लिए हमारे स्कूल परिसर में एक आधारभूत तंत्र की आवश्यकता है।
उन्होंने निसा से यह सुनिश्चित करने का आह्वान किया कि सभी सदस्य स्कूलों को एनईपी-2020 को लागू करने के लिए तिमाही, अर्धवार्षिक और वार्षिक शेड्यूल तैयार करना चाहिए। विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति के रूप में, मैंने उन्हें एनईपी-2020  के कार्यान्वयन के लिए त्रैमासिक, अर्धवार्षिक व वार्षिक  कार्यक्रम बनाने के लिए कहा है।
इस मौके पर मंडलायुक्त रेणू एस फूलिया, उपायुक्त विक्रम सिंह, निसा के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. कुलभूषण, फाउंडर, सुपर-30 से आनंद,  सीईओ, सिटी मोंटेसरी स्कूल लखनऊ से प्रो. गीता, महासचिव, फेडरेशन ऑफ प्राइवेट स्कूल वेलफेयर एसोसिएशन बलदेव सैनी, वाइस चीफ, एफ.पी.एस.डब्ल्यू. अमित मेहता, मुख्य संरक्षक, एफ.पी.एस.डब्ल्यू विजय टिटोली, संरक्षक, एफ.पी.एस.डब्ल्यू तरसेम जिंदल, उपाध्यक्ष, एडवोकेसी, यनिसा मधुसूदन,  प्रखंड अध्यक्ष, एफ.पी.एस.डब्ल्यू. हरपाल सिंह, प्रखंड अध्यक्ष, नारायणगढ विक्रांत के साथ-साथ एफ.पी.एस.डब्ल्यू. अधिकारीगण, गणमान्य व्यक्ति व प्रशासनिक अधिकारीगण मौजूद रहे।