
प्रदेश में फिलहाल कोई चुनाव भले ही नहीं है पर बसपा में मंगलवार को तूफान आ गया है। हरियाणा में बसपा के दो बड़े चेहरे प्रदेश अध्यक्ष रहे प्रकाश भारती व नरेश सारन को पार्टी से निकाल दिया गया। दोनों नेता छात्र जीवन से ही बसपा से जुड़े हैं और करीब 35 साल से सक्रिय रूप से बसपा के लिए काम कर रहे थे। नरेश सारन बसपा से 19 साल यमुनानगर के जिलाध्यक्ष और 8 साल प्रदेश अध्यक्ष रहे। वहीं प्रकाश भारती सात साल प्रदेश अध्यक्ष रहे। अभी दोनों को पार्टी ने जम्मू कश्मीर का प्रभारी लगाया हुआ था। दोनों नेताओं ने निलंबन की बात पर कहा कि यह सब पहले से तय हो चुका था, सिर्फ घोषणा अब हुई।
पार्टी के हित में बात उठाने की सजा मिली : प्रकाश भारती ने बताया कि उन्होंने बसपा द्वारा प्रदेश में दूसरी पार्टियों से गठबंधन करना, बाद में तोड़ देने का पार्टी सुप्रीम मायावती के सामने विरोध किया था। उन्होंने कहा था कि या तो गठबंधन न किया जाए और किया है तो इसे आगे तक ले जाया जाए। इससे हम सत्ता में भागीदार होंगे। कभी इनेलो तो कभी जजपा से गठबंधन करना, कुछ समय बाद तोड़ देने से पार्टी की छवि को नुकसान हो रहा है। इस पर मायावती नाराज हो गईं थीं। तभी से उनके खिलाफ षडयंत्र रचा जा रहा था। उन्होंने कहा कि पार्टी हित में लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखना यदि अनुशासन हीनता है तो फिर हमें लोकतांत्रिक मूल्यों की दुहाई क्यों दी जाती है। उन्होंने तो पार्टी हित में अपनी बात रखी थी।
लखनऊ मीटिंग में पार्टी से निकालने की माया ने धमकी दी थी: नरेश सारन ने बताया कि गठबंधन पर फैसले को 06 सितंबर 2019 को लखनऊ में हरियाणा प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक बुलाई गई। इसमें प्रदेश के सभी नेता शामिल थे। जब हम लोगों ने गठबंधन न तोड़ने का अनुरोध किया तो मायावती जी ने नाराज होकर हमें पार्टी से निकालने की धमकी थी, लेकिन तब शायद चुनाव पास में होने के कारण इस फैसले को आगे के लिए टाल दिया गया। इसके बाद हमें जम्मू कश्मीर का प्रभार दे दिया गया। भारती ने कहा कि उन्होंने पार्टी को अपने जीवन के महत्वपूर्ण 35 साल दिए हैं। इस तरह का पार्टी प्रमुख द्वारा व्यवहार किया जाना हरियाणा के मेहनती कार्यकर्ताओं का अपमान है।
दोनों की आगे की रणनीति : प्रकाश भारती व नरेश सारन ने बताया कि उन्हें पार्टी से निकाले जाने के बाद प्रदेश भर से कार्यकर्ताओं के फोन आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि जल्दी ही कार्यकर्ताओं की बैठक बुलाई जाएगी। जो सभी का फैसला होगा उस पर आगे बढ़ा जाएगा। वहीं भारती ने कहा कि उनसे कई बड़े दलों के नेताओं ने संपर्क किया है, लेकिन अंतिम फैसला साथियों के साथ चर्चा के बाद ही होगा। वहीं राजनीति के जानकारों का मानना है कि दोनों नेता नए दल का गठन कर सकते हैं जिसका नाम बसपा से मिलता-जुलता रखा जाएगा। इसका मकसद बसपा को अपनी ताकत दिखाना हो सकता है, या फिर दोनों कांग्रेस में भी जा सकते हैं।



















